बुधवार, 7 दिसंबर 2016

बोफोर्स का भूत

बोफोर्स का भूत
जिब 1989 मैं वी. पी. सिंह सत्ता मैं आया अर बोफोर्स घोटाले की हटकै गंभीरता तै जांच शुरू करवाई तै पांच लोगां नै स्विस अदालत तै या प्रार्थना करी थी अक ओ भारत सरकार ताहिं कोए सूचना ना दे। वे पांच माणस थे - बोफोर्स के एजैंट ‘विन चढ़ा’, इटली के दंपति आटोवियो तथा मारियो क्वाट्रोची तथा दो हिन्दूजा बन्धु। हिन्दूजा जिन्हें इस देश में हर तरहां की स्वतन्त्रता हासिल सै नै यो आरोप लगाया था अक इस मामले मैं जै कोए सूचना भारत सरकार ताहिं दी जावै सै तै उसनै न्याय नहीं मिलैगा क्योंकि मानव अधिकारों के मामले मैं जो हालात इस देश मैं सैं वे दम घोटू सैं। एक अनुमान के हिसाब तै बोफोर्स रिश्वत के लगभग 16 करोड़ रुपइये स्विस खात्यां तै (जो लोटस, ट्यूलिप अर मॉन्ट ढलांक नाम के झूठे खाते थे) जुबिली फाइनेंस कारपोरेशन (जिनेवा) के खात्यां (जिनका संबंध हिन्दूजा तै सै) मैं स्थानान्तरित कर दिये गये। देखैं - (इण्डिया टुडे, 28 फरवरी 97) ईबै स्विस अधिकारियों नै कुछ और कागजात भारत मैं भेजने सैं अर चित्रा सुब्रामण्यम के हिसाब तै उन कागजातां का संबंध हिन्दूजा ताहिं दिये जाण आले धन गेल्यां सै। (देखें - इण्डियन एक्सप्रेस, 25 जनवरी 1998)
भाजपा के नेतावां खासकर बाजपेई जी अर अडवाणी जी नै सोनिया गांधी अर क्वाट्रोची के संबंध खूब उछालैं सैं पर बेरा ना के बात रही अक हिन्दूजा के बारे मैं वे एक शब्द बी नहीं बोले। एक ढाल तै या बात अचम्भे आली सै पर दूसरी ढाल या अचम्भे आली नहीं बी सै। पाछले कुछ सालां मैं हिन्दुजा नै भारत अर इंग्लैंड में संघ परिवार की गतिविधियां खातर खूबै पीस्सा दिया सै। अर इस पीस्से नै इनके मुंह कै ताला लुवा राख्या सै। पाछै सी ‘आउट लुक’ पत्रिका 2 फरवरी) नै अपणे पाठकां का अटल बिहारी वाजपेयी पर हिन्दूजा के बीच के सम्बन्धां की कान्ही ध्यान खींचण की कोशिश करी बताई। सन् 92 मैं वाजपेई नै प्रधानमंत्री नरसिंह राव को एक चिट्ठी लिखी जिसमें लिख्या था अक हिन्दूजा अपणे स्विस बैंक के खाते की जांच करवावण नै तैयार सै। यो भी एक निरा ए पाखण्ड था चूंकि हिन्दूजा नै यो आच्छी ढाल बेरा था अक स्विस बैंक आले उस खाते मैं बोफोर्स आला काला धन जमा ए कोनी करवा राख्या। ‘आउट लुक’ की रिपोर्ट तै एक बात का और बेरा लाग्या अक हिन्दूजा नै बम्बई के अपणे ‘इण्डस इण्डबैंक’ के उद्घाटन के बख्त अर लन्दन मैं दीवाली के मौके पे किस ढाल धूमधाम तै इनकी आवभगत करी थी। 1995 मैं जिब भारत के सांसदां का एक शिष्ट मंडल लन्दन गया तो बाजपेयी जी उस शिष्ट मंडल के मुखिया थे अर हिन्दूजा की तरफ तै सारे सांसदां ताहिं टेम्ज नदी मैं नाव पै सैर सपाटे खातर न्यौता गया था। मुखिया नै बिना बताये अक कूण सैर करावै सै यो न्यौता कबूल कर लिया। जिब बेरा लाग्या तै सी पी एम के सांसद सोमनाथ चाटर्जी नै इसका कसूता विरोध कर्या अर जिब नाव पै सवार सांसदां ताहिं हिन्दूजा नै यो भाषण दिया अक अपणै हित मैं ओ भारत मैं किस ढाल की राज व्यवस्था चाहवैं सैं तै अटल बिहारी जी मूक दर्शक बने रहे।
इस बात मैं कोए शक नहीं अक बोफोर्स मैं अगला नंबर हिन्दूजा का ए सै। अर इसमैं कोए अचरज की बात नहीं सै अक सोनिया गान्धी की मांग का समर्थन अटल बिहारी नै भी करया। अर आगै भी इनका हिन्दूजा नै बचावण खातर असली चेहरा साहमी आवै। इस ढाल का कमाया औड़ काला धन फेर लैक्शनां मैं अर सांसद खरीदण के काम मैं लाया जावै सै। संघ परिवार सारी हाण नैतिक मूल्यां की बात करें जावै सै। या बात न्यारी सै अक उसकी कथनी अर करनी में शुरू तै ए कोए मेल नहीं रह्या अर सौ सौ कोस का अन्तर रह्या सै। कल्याण सिंह दलबदलुआं नै कुर्सी देकै, उत्तर प्रदेश की सबतै बड्डी मन्त्री परिषद बणा कै राज का सुख भोगण लागरया। तेरह म्हिने भाजपा नै केन्द्र मैं काचे काटे अर ईब पांच साल का और पास बणवावण खातर जनता के तलवे चाट्टण नै होरी सै।
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