नया खरणा
लैक्शनां के बख्तां मैं नेतावां के भाषण सुणकै ईसा लाग्या जणो तै ये जनता की खात्तर आसमान के तारे बी तोड़ कै ल्या सकै सैं। अर जिब वोटर थोड़ी घणी ना नुकर सी कर दे तो इननै ईसा लागै जणो तै आसमान टूट कै पड़ग्या हो। कई उम्मीदवार आसमान पै उठण लागरे थे पर छह अक्तूबर नै धड़ाम तै धरती पै आकै पड़गे। कईयां के दिमाग तै ईबै तै आसमान पै चढ़ लिये सैं। नाड़ै कोण्या मुड़ कै देन्ती उनकी। उनके बस्ता ठाऊ उननै और आसमान पै चढ़ा दें सैं। कई तो आसमान पै थूकदे वार नहीं लान्ते। पर कइयां खात्तर तो आसमान पाटण आली बात होगी छह तारीख नै। आसमान मैं थेगली लाणा चाहवैं सैं कुछ लोग अर कुछ आसमान पै दिया जलाणा चाहवैं सैं अर आसमान नै सिर पै ठायें हांडैं सैं। कई ईब तै पहलम आसमान पर तै पड़ लिये सैं। कई आसमान तै पड़कै खजूर पै अटकरे सैं अर न्यों कहवैं सैं अक म्हारे याड़ी तो बड़े आस्तीन के सांप लिकड़े। कई गरीबां पै आस्तीन चढ़ाये हांडैं सैं। कई आह भरैं सैं कई-कई बर दिन मैं अक एम.पी. जरूर बणां। पर लोगां की खात्तर आहुति देण नै कोए त्यार कोनी सब भेड़ की ऊन तारण खात्तर हांडैं सैं। जनता के दरबार नै तो ये इन्दर का अखाड़ा मानैं सैं जित इन्दर परी हों अर ये ऐस करें जां। माणस की इज्जत तारते वार कोनी लावैं बणे पाछै तो पिछाणण तै बी नाट ज्यां अर कित का कौण बतावैं। 15 दिन लोगां के आगै पाछै हांड कै फेर पांच साल लोगां नै अपणे पाछै हंडावैं सैं। वे तैं न्यों समझैं सैं अक जनता इसे ढालां अपणी इज्जत बेचती हांडै सैं। जनता की इननै कोई परवाह कोण्या। उसकी इज्जत गेल्यां खेलण मैं तो ये माहिर होगे। बेरा ना ईसे माणसां की इतिश्री कद होवैगी। किसे काम खात्तर जा कै देखल्यो इधर-उधर करण लाग ज्यांगे। इधर-उधर की लाकै माणसां नै आपस मैं लड़वा देंगे। इधर की दुनिया चाहे उधर होज्या पर इनके काम पै जूं नहीं रेंग कै दे। गैन्डे बरगी मोटी खाल होज्या सै इनकी। जै किसे काण्ड मैं फंसे पाज्यां अर कोए सवाल ठादे तो इधर-उधर झांकण लाग ज्यांगे। बात का सीधा जवाब नहीं देवैं। इधर-उधर की हांकणा शुरू कर देंगे कै न्यों कैह देंगे अक बेरा सै मनै तों किसके इशारे पै जाचै सै। न्यों कहवैंगे अक हाथ नै हो सै, इस हाथ द्यो अर उस हाथ ल्यो। इस कान की बात उस कान ताहिं कोनी जाण दें अर कै इस कान सुणकै उस कान उड़ा देंगे। किसै नै कहया सै कलजुग नहीं करजुग है यह, यहां दिन को दे और रात को ले। क्या खूब सौदा नकद है, इस हाथ से दे उस हाथ से ले।
जनता मैं जिब लैक्शनां के टेम भाषण देंगे तो कहवैंगे अक हम भ्रष्टाचार का खात्मा करकै दम लेंगे। हम ईंट का जवाब पात्थर तै देवैंगे, हम उनकी ईंट तै ईंट बजा द्यांगे चाहे बेशक अपणी ए ईंट तै ईंट बाजण लागरी हो। अर एक बै लैक्शन जीते पाछे तो ये ईद के चान्द होज्यां सैं। आपणा घर भरण की खात्तर अपने ईमान का बी सौदा करतें वार कोनी लावन्ते। देश जाओ चाहे भाड़ मैं। बेशक फेर जनता उनपै आंगली ठावन्ती रहे। भाइयां नै कोए परवाह कोनी। उल्टा जनता नै ए उंगली दिखावण लागज्यां सैं। जनता की उंगली पाकड़ कै पौंहचा पाकड़ का जतन करें जांगे। जो जनता का असल मैं भला चाहवै सै वे तो आंगलियां पै गिने जा सकैं सैं। पर इननै वे छंटे औड़ आंगलियां पै नचाये जावैं सैं अर कई बै तो उघड़ की नाच्चण लागज्यां सैं अर उठते-बैठते शरीफां नै सांसै कोण्या आवण दें। उसनै उठाऊ चुल्हा कहवैंगे के पागल की उपाधि दे देंगे कै बावला बता देंगे। ये छाकरे नेता न्यों कहवैंगे अक आपां तो उड़ती चिड़िया के पर गिन दिया करां। अर जिब जनता नै उनकी जरूरत हो तै उड़न छू होन्ते कति वार नहीं लावैं। जनता नै सारी हाण उल्टा पाठ पढ़ावैंगे। कोए भी बढ़िया काम हो उसमैं फांचर ठोके बिना नहीं रैह सकदे। कई तो घणे कसूते कढ़ी बिगाड़ हो सैं और किसे की सुनै कोण्या। बस अपणी-अपणी हांके जावैंगे। पाछले पांच च्यार सालां मैं ए घणी डूब पड़गी। ये इसे खरने के नेता पाक्के सैं अक यू खरणा और कितै तो दीवा लेकै टोहे तै भी कोण्या पावै। आया राम गया राम भी हरियाणा तै ऐ शुरू हुया था अर यू नये खरणे के बीज का पेटैंट बी हरियाणा करवावन्ता दीखै सै।
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