फेर बी लाडो खड़ी सै
रै सुरते लाडो फिल्म देख्याया के? अरै जीते कितकी लाडो देखूं था टिकट के पीस्से तो कोनी। क्यूं के सौ रुपइये की टिकट सै उसकी? ना भाई जीते इतनी तो कोण्या बस बीस रुपइये सै पर आज काल या कड़की चाल री सै इसका तो तनै बेरा ए सै। फेर के हुया मेरे यार इसतै फालतू की तो रोज दारू ना पी ज्यावां सां। अर हां सुरते न्यों सुण्या सै अक या फिल्म तो बहोत काम्मल सै पर सरकार नै इसका टैक्स माफ नहीं करया। उड़ै खरखौदे गया जिब जिकरा होरया था अक नेशनल फिल्म डवलपमैंट कारपोरेशन के सहयोग तै बनी या पहली हरियाणवी फिल्म सै अर इसकी जो कथा सै उस ताहिं कोए नेशनल एवार्ड बी मिल्या सै। अर जिकरा तै उड़ै न्यूं भी था या पहली हरियाणवी फिल्म सै जो पैंतीस एम एम में बनी सै। कूण माणस थे जो यो जिकरा कर रे थे? न्यों तो सूरते मनै बेरा ना पर वे तै न्यों बी कहवैं थे अक नेशनल फिल्म डवलपमैंट कारपोरेशन नै इस फिल्म ताहिं नेशनल एवार्ड खात्तर भी सिफारिश करी सै।
जीते भाई इस फिलम का टैक्स माफ ना करण में मनै तो किमै पोलटिक्स दीखै सै। वा क्यूकर भाई सुरते। हरियाणवी फिल्म जो क्याहें दीन की भी नहीं थी उनके तो हरियाणा सरकार नै टैक्स माफ करे अर लाडो फिल्म जिसकी कहानी महिला के अधिकारां की कहानी सै उसके मान सम्मान खात्तर लड़ाई की कहानी सै, जिसके गीत रागनी गजब के सैं अर जिसकी प्रोडक्शन भी ऊंचे दरजे की सै उसका टैक्स माफ कोण्या करया। इसका मतलब तो योहे हुआ अक म्हारी सरकार हमनै आच्छी हरियाणवी फिल्म दिखा कै राज्जी कोण्या। इस फिल्म मैं कोए अश्लीलता ना, राजेन्द्र खरकिया नै ‘पाणी आली पाणी प्यादे क्यों लेकै डोल खड़ी होगी’ रागनी गावण मैं तोड़ कर राख्या बतावैं सैं फेर बी टैक्स माफ क्यूं ना करया म्हारी सरकार नै?
अर जीते न्यों सुण्या सै अक टैक्स माफ करण खातर एक कमेटी बणा राखी सै म्हारी सरकार नै। उस कमेटी नै तो घणे जोर की सिफारिश करी थी इस फिल्म का टैक्स माफ करण की पर फेर बेरा ना इसका टैक्स माफ क्यूं ना हुया। या तो बहोतै माड़ी बात हुई भाई सुरते। जिब कमेटी नै तगड़ी सिफारिस कर दी थी तो बात कड़ै जाकै अटकी? भाई जीते घणा तो मनै बेरा ना पर रोहतक मैं मान सरोवर पार्क मैं कइ जणे बैठे न्यों बतलावैं थे अक सी एम की मेज पै जाकै उल्ट-पुल्ट होग्या। रै सुरते के बात काम्मल हरियाणवी फिल्म म्हारे सी.एम. साहब नै आच्छी कोणया लागती के? मनै तो इसा लागै सै अक म्हारे सी एम साहब ताहिं या फाइल पहोंचै कोण्या ली सै। बीचै मैं कोए कुण्डली मारकै बैठ्या सै। जिब चन्द्रावल जिसी फिलम का टैक्स माफ हो सकै सै तो उसी फिलमां तै सो गुणा काम्मल फिल्म का टैक्स माफ ना हो तो दुख तो आवै ए सै।
रै जीते मनै तो इसा-सा लागै सै अक या फाइल ऊपरली मेज पै जाकै अटकी सै। इसमैं एकै चोटाला अर के दो पालिटिसनां के अहम की टकराहट अड़कै खड़ी होगी, म्हारे मुख्यमंत्री चौटाला साहब की अर डी. आर. चौधरी की। सुरते आच्छा तो या फिलम इननै बनाई सै के? भाई जीते या फिलम डी.आर. साहब के बेटे अश्विनी नै अर उसकी पत्नी कुमुद नै बनाई बतावैं सैं। तो भाई सुरते इसमैं छोरे की बहू अर छोरे का के कसूर? अर हरियाणा के बढ़िया हरियाणवी फिलम देखण आल्यां का के कसूर? या तो वाहे बात हुई भाई अक ‘झोटे झोटे लड़ैं अर झाडां का खोह’। बाबूआं की लड़ाई मैं छोरे की बहु अर छोरा पीस दिये अर बढ़िया हरियाणवीं संस्कृति की वाहक “लाडो” फिलम पीस कै धरदी। म्हारा ताऊ बंशीलाल के बालकां के किसे केस मैं मिसाल कायम करग्या था अक राजनीतिक द्वेष का असर बेकसूर बालकां पै नहीं पड़णा चाहिए।
अर एक और बात सै जीते अक बढ़िया हरियाणवी फिलम के चाहवण आल्यां नै बी या टैक्स माफी की बात क्यूं नहीं ठाली ईब ताहिं? राजेन्द्र खरकिया के रागनी प्रेमियां नै बी या बात क्यूं नहीं ठाई? महिला के अधिकारां खात्तर जी ज्यान एक करकै लड़ण आले संगठनां नै बी इसपै सोचणा चाहिये।
रै सुरते छोड़ मेरे यार यू टैक्स तो माफ होन्ता रहवैगा बोल कद देखण चालैगा या लाडो फिलम? तेरे हिसाब तै तो या घणी काम्मल फिलम सै? रै जीते कद का किसनै बेरा सै भाई? कबीर बी कैहग्या - काल करे सो आज कर, आज करे सौ अब। पल में परले होएगी, बहुरी करेगा कब? तो भाई आजै चालांगे। पर भाई सुरते भाभी नै साथ ले चालिये। रै जीते वाके करैगी। उनकी खात्तर फिलम बणी अर वे ए देखैं नहीं तो फेर के फायदा। मैं भी मनभरी नै ले चालूंगा। हां जै काम्मल नहीं पाई फिलम तो तेरे धोरै पीस्से उल्टे ले ल्यूंगा। रै जीते तूं चाल अर जै फिलम आच्छी ना लागी तो दुगणे पीस्से मेरे धोरै ले लिये।
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