सोमवार, 5 दिसंबर 2016

मेरी बी सुणियो

मेरी बी सुणियो
लैक्सनां का टेम सै। नेता मारे-मारे फिरैं सैं। जनता किमै गर्मी मैं दुखी सै किमैं महंगाई मैं काल होरी सै। अमीरां का तै पेट का पानी बी ना हिलता पर आम आदमी पेट के धंधे मैं चौबीस घंटै लाग्या रहवै सै। फेर बी आच्छी ढालां पेट कोन्या भरता अर पेट की बात सबके साहमी बताई बी ना जान्ती। चौगिरदें कै आम आदमी कै पेट की मार मारण लागरे सैं पीस्से आले। म्हारे नैतावां के बस्ते ठाऊ आजकाल जनता के पेट की थाह लेन्ते हांडै सै। जनता पेट बजान्ती हांडै सै अर कहवै सै अक सरकार म्हारे पेट पै ए क्यों लात मारै सै?
एक किसान खेत मैं शीशम के पेड़ तलै बैठ्या बैठ्या के सोचै सै अपने नेता के बारे मैं भला:
सुण नेता जी सम्राट तनै, कर दिया बारा बाट तनै
मूंधी मार दी खाट तनै, लिया कालजा चाट तनै
बनाई राज की हाट तनै, जनता दर दर ठोकर खावै।।
शेर बकरी का मेल नहीं, या राजनीति कोई खेल नहीं
तूं नीति घटिया चाल रह्या, क्यों इज्जत नै उछाल रह्या
म्हारे बैरी नै तूं पाल रह्या, क्यों लुटवा म्हारा माल रह्या
ईबी ना कर तूं टाल रह्या, जनता सारी खोल दिसावै।।
लोक राज नारा कड़ै गया, लोक लाज म्हारा कड़ै गया
क्यों करवाया मखौल बता, क्यों तेरा पाट्या झोल बता
क्यों खुलवाई पोल बता, हर कोए यो सवाल उठावै।
गेहूं का बना घास दिया, हरियाणा का कर नाश दिया
हरियाणा कै मारी चोट, जनता का बता के खोट
जानवर कै दी इसनै वोट, दिये बिन गिनती के नोट
क्यों दिया तने गल घोट, ना म्हारी समझ मैं आवै।।
कुछ ना साथ मैं जाणा सै, आड़ै ए हिसाब चुकाणा सै,
जो हां भरकै नै नाटैगा, ना उसके कदे पूरा पाटैगा
तेरे वाद्यां नै कूण चाटैगा, बीर दिल मेरे नै डाटैगा
बणा रागनी गम नै बांटैगा, तनै साची साच बतावै।।

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