बुधवार, 7 दिसंबर 2016

रै इबी बखत सै ले ल्यो सम्भाला

रै इबी बखत सै ले ल्यो सम्भाला
भारत नै अमरीका गेल्यां हाल मैं एक समझौता कर्या सै। इस समझौते के तहत भारत सात सौ चौदह आइटमां पर तै लाई औड परिणामात्मक पाबन्दी हटा लेगा। हटाले तो हटाले म्हारी सेहत पै के फर्क पड़ैगा? पड़ैगा अर घणा कुढ़ाला फर्क पड़ैगा। अप्रैल 2000 ताहिं तै इन सात सौ चौदह चीजां पर तै पाबन्दी हटाई जागी अर अप्रैल 2001 ताहिं बाकी के सारे आइटमां पर तै हटा ली जागी। अर या अमरीका अमरीका ताहिं नहीं इसमैं जापान, आस्ट्रेलिया, कनाडा अर योरपीय संघ भी शामिल हैं जिनकी गेल्यां 2003 ताहिं ये पाबन्दी हटावण का समझौता पहलमै कर लिया था। तो इस समझौते का मतलब के सै। इसका मतलब यो सै अक भारत मैं बिना किसे रोक टोक के कृषि उत्पादां का आयात करया जा सकैगा। फेर के होग्या कर लेंगे आयात हमनै के लेणा देणा? म्हारे हरियाणा के किसानां नै धान के भा मैं उतार चढ़ाव का मजा तो थोड़े ए दिन पहलम चाख कै देखा सै अर ईब ताहिं मुंह का कडुआपन ठीक नहीं हो लिया सै। इब अमरीका आले समझौते पाछै तो अमरीकी कृषि उत्पादां की भारत मैं बाढ़ सी आ ज्यागी। फेर आवै तो आ ज्याओ हमनै के? इसी बात नहीं सै भारत का किसान अर भारत की खेती जमा तबाह हो ज्यागी।
बिजली बोर्ड के जमाने मैं बिजली दर 97 पीस्से प्रति यूनिट थी। पर जिब तै ये बिजली बोर्ड तोड़ कै बिजली प्राइवेट कम्पनियां के हाथां मैं दी सै उसे बख्त तै बिजली के रेट भी तीन च्यार गुणा बधगे। एनरोन कम्पनी धोरै महाराष्ट्र राज्य बिजली बोर्ड चार रुपइये 98 पैसे प्रति यूनिट की दर तै बिजली खरीदी जावै सै। तमिलनाडु मैं सी एम आर वासवा कम्पनी चार रुपइये दस पैसे कीमत लेवैगी। उड़ीसा मैं तीन रुपये नब्बे पैसे हो लिया बिजली का भा। इस महंगी बिजली नै किसान की कड़ और बी तोड़ कै धरदी। अर इबै के सै? अखबारां मैं रोज पढ़ण मैं आवै सै अक डीजल के भा, मिट्टी के तेल के भा इस बजट मैं और भी बधावैगी सरकार। किसान की एक हाथ लाम्बी जीभ बाहर आ ज्यागी। कई प्रदेशां मैं किसान आत्म हत्या करण लागरे सैं चाहे पंजाब हो, चाहे हरियाणा हो अर चाहे कर्नाटक हो।
हरियाणा के किसानां नै इन सारी बातां पै सोचणा चाहिये अर जो वोट मांगण आवै उसपै इन बातां पै खुलासा करवाना चाहिये अक गोहाणा तै रोहतक का बस का भाड़ा था दो आन्ने। उस बखत गिहूं का भा था तीस रुपइये मण ये बात सन छप्पण की सैं। आज गोहाणे तै रोहतक का बस का भाड़ा कितना सै? आज गिहूं का के भा सै? सिर क्यूं खुजावण लागगे लाओ किमै अन्दाजा। अर भाड़ा कै गुणा बधग्या अर गिहूं का भा कितने गुणा बध्या। अर यो फरक क्यों सै? मनै बेरा सै थाम हिसाब कोनी लाकै देखो। सोचणा थारे बसका कड़ै सै?
अर इस सारे चक्कर नै समझे बिना हम अपणी बदहाली का कारण अपणी किस्मत नैं मान बैठां सां। कै दुखी हो कै फांसी खाल्यां सां अर कै निराश हो कै तड़के तै सांझ ताहिं तास खेलते रहवां सां अर कै नेता जी के बस्ते ठावण लागे रहवां सां। अर कै आपस मैं जात पै, गोत पै अर ठोले पान्ने पै लट्ठ बजाये जावां सां। अर इबके लैक्सनां मैं तै बात गोत पै कसूती आण टिकी। सारा हरियाणा गोतां मैं बंटकै खड़या होग्या - मलिक, दहिया, हुड्डा, नैन, सांगवान अर और बेरा ना के के। कोए किसानै कोण्या रहया। तो किसानां का भला कूण करैगा? ये गोतां के चौधरी जो एम.एल.ए. बणन की खातर मूछां कै ता दे कै अर गोत की झण्डी ठाकै रिफले हांडैं सैं, ये बतावैं तो सही अक हरियाणा के किसान नै बिजली सस्ती क्यूकर दिलवावैंगे।
सांच्ची बात या सै अक किसान नै तै अपणा किसानीपना छोड़कै जात का, गोत का, न्यारी-न्यारी सभावां का चस्मा चढ़ा लिया कै इन नेतावां नै चढ़ा दिया अपणी रोटी सेंकण खातर। महेन्द्र सिंह टिकेत बरगे मोटी समझ कै कारण पिछड़ लिये। उनकै बातै काबू कोण्या आई तो के बणैगा इन किसानां का अर इस देश का। म्हारी सरकारां नै अर म्हारे नेतावां नै इन जी-सात के ठग देशां के साहमी कति गोड्डे क्यों टेक दिये? इस लैक्सन मैं चाहे किसे नै बणा लियो, छह म्हिने पाछे लैक्सन तो फेर आलेगा। केन्द्र सरकार इबके बजट मैं कसूते ताकू चभोवैगी, जनता कुकावैगी, नेतावां की शामत आवैगी, उनमैं अपणी पार्टी मैं (जिसकी टिकट पै जीत के गये सैं) घुटन महसूस होवैगी। इनेलो (जनतान्त्रिक) बनैगी कै और किमै नाम होगा, कांग्रेस मैं फूट पड़ैगी, दो चार म्हिने यो सांग भरया जागा अर आखिर मैं फेर लैक्सन। अर यू सिलसिला बेरा ना कद जाकै खतम होगा। हरियाणे नै इसै मैं मजा आरया सै तो खूंटा ठोक के कर सकै सै? रै इबी बखत सै ले ल्यो सम्भाला अर काढ़ ल्यो नई राही।

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