इस बेवफा सिस्टम से वफ़ा मांग रहे हैं हमें क्या मालूम है हम खता मांग रहे हैं ये किस्मत का खेल रचाया है इसी ने तो इसी से हम किस्मत की दुआ मांग रहे हैं सच को छिपाता आधा सच बताता हमें जहर घोला उससे साफ हवा मांग रहे हैं रोजाना जो खेले हमारे जज्बात के साथ सुख की राही का उससे पता मांग रहे हैं सुरग की कामना में छिपी है जो रणबीर अपने खुद की ही हम चिता मांग रहे हैं 13/9/09