पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के देवराडा गांम का जिकरा सै। घटना बेसक थोड़ी पुराणी सै, पर दांव साच्ची सै। यो गाम एक ईसी सड़क के बगल मैं बसरया सै जो नदी के कान्ठै जाकै खतम होज्या सै। इस नदी पै कोए पुल नहीं सै अर नदी के दोनूं कान्हीं के लोग पाछले कई सालां तैं नदी पै पुल बणावन की मांग नै लेकै आंदोलन करते रहे सैं। नदी पार के उन ग्रामीण लोगां की जिन्दगी और बी मुश्किल होज्या सै जिब उननै किसे बी सड़क पै पहोंचण की खातर मीलां चालणा पड़ै सै। इसके बादै कितै जाकै 150 किलोमीटर दूर गोरखपुर पहोंच पावैं सैं जो इस एरिया का मेन रेलवे जंक्शन सै। पाछले छह साल तै लाल जी मिश्र नामक ग्रामीण अर उसके साथी पुल की मांग तै जोर लारे सैं। हर मौके पै प्रशासन झूठे वायदे करकै दबाव बणाकै बाबा जी की भूख हड़ताल खतम करवान्ता रहया। बीते साल खासतौर पै ठाड्डी बरसात होवण के कारण ग्रामीणां की मुसीबत और घणी बधगी। इस करकै उननै 28 सितम्बर 2003 नै नदी के कान्ठे पै एक मंच बणाया अर हटकै भूख हड़ताल शुरू कर दी। मंच पै एक बैनर लाया था जिसपै लिख राख्या था - ‘जन सेवा समिति’।
च्यार अक्टूबर नै रात नै आठ बजे पाछै जिला मजिस्ट्रेट अर पुलिस अधीक्षक पुलिस बल की साथ उड़ै पहोंचगे अर फेर डोरे गेरे लालजी मिश्र भूख हड़ताल खतम कर दयो। जिब बाबाजी नहीं मान्ने तो प्रशासन अर पुलिस अपणे असली रंग मैं आ गए अर बल प्रयोग करणा शुरु कर दिया। इस क्षेत्र मैं बिजली नहीं पहोंचली ईब ताहिं। नदी के कान्ठे पै एक दुर्ग पंडाल बण्या औड़ सै जड़ै जेनरेटर तै रोशनी का इंतजाम कर राख्या था अर पंडाल धोरै आच्छी खासी भीड़ थी। पुलिस नै जेनरेटर बंद कर दिया अर अंधेरे मैं ऐ लाल जी मिश्र नै जोर जबरदस्ती उड़ै तै ठावण की हरकत करण लागे। उड़ै जो युवक हाजिर थे उननै इसका विरोध करया। पुलिस हरकत मैं आगी। लाट्ठी बरसण लाग्गी। इस भगदड़ मैं पुलिस नै एक दम नजदीक तै च्यार फायर करे। एक 12 साल का बालक जो उड़ै मूंगफली बेच्चण लागरया था कै गोली लाग्गी अर उसनै उड़ै ए दम तोड़ दिया। एक दूसरा युवक जो अपणी बाहण तै मिल्लण फेट्टण आया था, कै बी गोली लाग्गी। उस ताहिं घायल अवस्था मैं तड़फण की खातर सड़क पै छोड़ दिया गया। थोड़ी सी हाण तड़प कै उसनै बी दम तोड़ दिया उड़ैए। एक तीसरा युवक भी इसे ढालां मरग्या। चौथा माणस जिसकै गोली लाग्गी थी ओ लहूलुहान हालत मैं घर नै ठाकै लेगे फेर देर रात नै उसनै भी दम तोड़ दिया। पुराना राज गया था अर नया राज आया था। उड़े के सांसद जो बीजेपी का सै, नै इब संसद फंड तै पुल निर्माण का वायदा करया सै। सीएम नै बी सख्ती तै कार्रवाई करकै जिला मजिस्ट्रेट अर जिला पुलिस अधीक्षक सस्पैंड कर दिये अर गोली चलावण के जिम्मेदार कांस्टेबल की गिरफ्तारी करवाई सै।
रेशमा अपणे पति खजांची गेल्यां एक झोंपड़ी मैं रहवैं सैं। रेशमा की बीमारी की खबर सुणकै उसका भाई राम मिलन कुछ मिनट पहलम रेशमां के घरां आया था। रेशमा की विधवा मां उड़ैए थी। वे बहोत गरीब सैं अर डोम अनुसूचित जाति के सैं। उन धोरै कोए जमीन नहीं सै अर वे बांस की टोकरी बणा-बणा कै अपणा गुजारा करैं सैं। उन धोरै किसे का बी राशन कार्ड नहीं सै अर अपणे पीहर मैं ए सै। युवावस्था मैं पहोंचण तै पहलमै वा विधवा होगी। जो 12 साल का बालक नंदू गुप्ता मारया गया वोहे था। मूंगफली बेच्चण बरगे छोटे मोटे काम करकै घर के साहरा लारया था। और भी जितने लोग इस गोली कांड मैं मारे गए वे अर उनके परिवार का कोए बी दूसरा जन पढ़या लिख्या नहीं सै।
ईब सवाल यूं सै अक वे म्हारे सांसद जी अपणे सांसद फंड मां तै इस काण्ड तै पहलम ओ पुल नहीं बणवा सकैं थे के? मजिस्ट्रेट अर पुलिस अफसर नै उड़ै रात नै जावण की के एमरजैंसी आगी थी? के उन लोगां की पुल की मांग करणा गलत मांग थी? उनपै गोली क्यूं चलाई गई? फेर बी एक बात तो तय सै कि जो काम ये च्यारों माणस जिन्दा जी नहीं करवा पाये, अपणी शहादत दे कै जरूर करवा पावैंगे अर उस गुहांड की जनता इननै ताउमर याद राखैगी।