पीसा बड़ा या भगवान बड़ा ?
डाक्टर सैनी आज मजबूरी मैं खरखोदे शहर मैं रोंग साइड जावण लागरया था। यातायात पुलिस के माणस नै डाक्टर साहब पाकड़ लिये। बोल्या - रोंग साइड क्यों ? थाम तो पढ़े-लिखे लोग सो। डाक्टर सैनी नै अपणे बारे बताया। पुलिसिया नै सैलूट ठोक्या अर बोल्या - डॉक्टर तो भगवान का दूसरा रूप हो सै। आप गलत काम क्यूंकर कर सको सो। जल्दी जाओ साहब। डाक्टर सैनी नै खिसिया-सी कै उसका धन्यवाद करया। पुलिसिया सहज सी बोल्या - मेरे छोरे का इलाज आपकी देख-रेख मैं सै जनाब। थोड़ा-सा ख्याल राखियो।
डाक्टर बोल्या - जरूर-जरूर। नाम क्या है? पुलिसिया बोल्या सतबीर। आठ दस दिन पाछै फेर ओहे चेटक होग्या। डाक्टर सैनी फेर रोंग साइड जावण लागरे थे। यातायात पुलिस आले नै (कुदरतन ओहे पुलिसिया था) फेर टोक दिया। फेर ईबकै उसनै छोड्या नहीं। डाक्टर सैनी का चालान काट दिया। डाक्टर सैनी हैरान-सा उसके मुंह कान्हीं लखावै। ओ पुलिसिया बोल्या - उस दिन की बात न्यारी थी। मेरा लड़का थारी देख रेख मैं था आज की बात न्यारी सै। मेरा लड़का ईब दूसरे डाक्टर की देख रेख मैं सै। मैं ईब थारी सेवा किस बात खातर करूं?
फत्ते बोल्या - एक बात मनै सुणादी ईब एक बात सरिता नै सुणाणी चाहिए। सरिता सुणावण लागी - आजकाल एक जबरदस्त तकिया कलाम सै कि ‘बस पांच मिनट।’ कोए भी बात हो, कोए भी बख्त हो, यो मुहावरा आम सुणण मैं मिलज्या सै कि बस पांच मिनट रूको फेर फुरसत ए फुरसत सै। डाक्टर सैनी की बी याहे आदत थी। सारी हाण मरीजां तै घिरया रहण करकै वे हरेक माणस ताहिं न्योंए कैह दिया करते - ‘बस पांच मिनट रूको फेर आपका नंबर सै।’ एक दिन की बात सै कि डाक्टर साहब के केबिन मैं एक बूढ़े व्यक्ति नै झांक कै देख्या अर भीतर आग्या। ओ बहोत घबरारया था। आवन्ते की साथ बोल्या - थामनै लेवण आया सूं डाक्टर साहब। मेरी बिटिया सख्त बीमार सै। थाम तो भगवान सो। चाल कै बचाल्यो उसने। डाक्टर सैनी ने आदतन कैह दिया - बस, थारी गेल्यां पांच मिनट मैं चालांगे।
बीस मिनट पाछै बूढ़ा बाबा फेर बोल्या हाथ जोड़ कै - डाक्टर साहब वार होवण लागरी सै। डाक्टर सैनी फेर बोले - बस पांच मिनट मैं चालां सां। 25 मिनट पाछै जिब डाक्टर सैनी नै कहया - हां तो बाबा चालो चालां बेटी नै देखण। तो बूढ़ा बाबा कातर नजरां तै देखता हुआ फफक पड़या अर बोल्या - ईब जावण का के फायदा डाक्टर साहब! पड़ौसी इबै-इब खबर दे कै गया सै कि पांच मिनट पहलम बिटिया का स्वर्गवास हो लिया।
फेर कविता का नंबर आया तो उसनै एक बात बताई। एक बै एक बुढ़िया भिखारिन थी। भीख मांग कै उसनै पांच सात रुपइये कट्ठे कर लिए अर वा एक फलां की दुकान पै जाकै भीख मांगण लागगी - तेरा भगवान भला करैगा। बुढ़िया दो दिन तै भूखी सै। दुकानदार नै उस कान्हीं कोए ध्यान नहीं दिया। एक गावड़ी आगी। उसनै फलां कै मुंह मारणा चाहया तो दुकानदार नै एक लाठी जड़ दी उसकै। अर ग्राहकां नै चीज बेचण लागग्या। बुढ़िया नै आगै सी हो कै फेर कहया उसतै - भगवान भली करैंगे। दो फली ही दे दे। बुढ़िया दुआएं देगी। दुकानदार ने इस डर से कि कहीं ग्राहक बिदक ना जावैं एक बुस्या सा केला उस बुढ़िया के हाथ पै धर दिया। बोल्या - चाल ईब आगै चाल। बुढ़िया नै अपणे कमंडल मां तै एक रुपइये का सिक्का काढया अर बोली - ले एक केला दे दे। दुकानदार नै तो सैड़ दे सी एक बढ़िया लाम्बा, मोटा-सा केला बुढ़िया के हाथ मैं पकड़ा दिया। उसनै ऊपर नै ठाकै आसमान कान्हीं करकै बुढ़िया बोली - तेरे नाम पै तो यू केला अर एक रुपइये का यू केला। ईब तूं ही बता तनै बड्डा मानूं अक पीस्से नै बड्डा मानूं? तो आई किमै समझ मैं अक नहीं? क्यूंकर पीस्सा खून के रिश्ते भी बदल दे सै। एक हद तै ज्यादा पीस्से का लालच माणस की इन्सानियत बी खो दे सै।
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