सोमवार, 17 जुलाई 2017

के बला सै यू ढांचागत समायोजन ?

के बला सै यू ढांचागत समायोजन ?
सांझ कैसी सत्ते, फत्ते, सविता, कविता अर सरिता बैठकै बतलावण लागगे। सरिता बोली - आज दैनिक ट्रिब्यून मैं मैंने एक खबर पढ़ी उसमैं ढांचागत समायोजन का जिकरा था। मनै तो खूबे सिर खपाया फेर इसका मतलब कोण्या समझ मैं आया। आज इसपै चर्चा होणी चाहिये। सत्ते बोल्या - सुण्या तो मनै बी सै फेर इसका असली मतलब तो कोण्या बेरा। समझ मैं कोण्या आया यू ढांचागत समायोजन का मतलब। सविता बोली - इसतै फालतू तो मनै बी कोण्या बेरा। सारे गाम मैं नजर घुमा कै देखी। सारी पार्टियां के नेतावां पै नजर मारी फेर नहीं बात समझ मैं आई। एक सर्व कर्मचारी संघ का नेता था मास्टर जी सै उसकै धोरे पहोंचगे। ओ इन सारयां नै देख कै एक बै तो भोंदल सा हो गया फेर सम्भल कै बोल्या - आओ क्यूंकर आये। सविता बोली - इस ढांचागत समायोजन पै चर्चा थी इसके बारे मैं विस्तार तै जानणा चाहवां थे। मास्टर जी बोले - ज्ञान तो मनै बी इसा ए सै फेर बातचीत तो करी ए जा सकै सै। ये जो अमीर देश सैं ये अपणे आर्थिक संकटां का बोझ गरीब विकासशील देसां कै थौपणा चाहवैं थे अर ये इस चाल मैं कामयाब बी हुए। या कहानी आड़ैए खत्म नहीं होन्ती। इस ऋण के संकट के साहमी बैंक अर दूसरी वित्तीय संस्था अपणे हितां की सुरक्षा की जरूरत महसूस कररे सैं। मतलब यू सै अक गरीब देसां ताहिं जो कर्जा इननै दे राख्या सै उसकी वापसी की गारण्टी चाहवैं सैं ये देस। ज्यूकर गाम मैं कर्ज देवण आला उसकी वापसी का इन्तजाम राखै सै न्योंए ये देस भी तीसरी दुनिया ताहिं दिये जावण आले कर्जे पै वे घणी करड़ी सर्त थोंपदें सैं इस बात की गारन्टी होज्या अक उनका कर्जा मारया ना जावै। उस कर्जे की वापसी पक्की होज्या। पहलम आले करज्यां पै सर्त थोंपी अर ईब आले करज्यां पै तो और बी करड़ी सर्त थोंपैं सैं।
यूनिसेफ का आकलन सै अक ऋण प्रेरित कटौतियां के कारण सन् 1998 मैं 5 लाख बच्यां की मौत होगी। कर्जदार देसां मैं ढांचागत समायोजन कार्यक्रम का प्रयोग अमीर देसां की खातर विश्व बैंक अर मुद्रा कोष करैं सैं। सविता बोली - जो देस इन की बात ना मानैं उसका के कर सकैं सैं? मास्टर जी बोले - जो देस इनकी बात नहीं मानते उन देसां ताहिं काली सूची मैं गेर दें सैं। तकनीकां का हस्तांतरण बी रोक दिया जावै सै। गैल्यां आयात निर्यात के करज्यां मैं अड़चन डालैं सैं। इस तरियां जो एक देस का दूसरे देसां गैल्यां ब्यौपार सै उसमैं रोड़ा अटका दे सैं। फत्ते बोल्या - कुछ कुछ बात तो समझ आगी फेर यू ढांचागत समायोजन के सै इसपै बताओ। मास्टर जी बोले - इसका दूसरा मकसद सै निजीकरण का। इसमैं सरकार के स्वामित्व आले कारखान्यां अर सेवावां नै अनिवार्य रूप तै निजी निगमां के हाथां बेच दिया जा सै। इनकी खरीददार बदेसी कम्पनी हों सैं। सरकारी कारखाने बन्द होवण कै कारण बहुत से मजदूरां की नौकरी चाली जावै सै। बिजली, परिवहन, शिक्षा स्वास्थ्य सेवाएं म्हंगी होज्यां सैं। ईबकै सत्ते बोल्या - तो म्हारे हरियाणा मैं यू सारा सांग इस ढांचागत समायोजन की नीति नै खेल राख्या सै? मास्टर जी बोले - इसका तीसरा मतलब सै स्थानीय मुद्रा का अवमूल्यन। कविता बोली - इसका के असर होसै मास्टर जी? मास्टर जी बोले - विश्व बैंक चाहवै सै अक अमेरिकी डालर के मुकाबले भारत के रूपइये की कीमत मिलै सै अर जो चीज आयात होंसैं उनकी कीमत बाधू होज्या सै। इसका एक मतलब और बी सै अक आयातां पर सीमा शुलक कम करे जावैं अर करां पै कटौती करी जावै।
इसतै बदेशी कम्पनियां नै खुला चरण की छूट मिल ज्या सै। सत्ते बोल्या - यो ढांचागत समायोजन तो बहोत भुण्डा। कविता बोली - इसा कामल होन्ता तो अमेरीका अर जापान आले अपणे धोरै ए ना राखैं हे इसनै क्यांनै भारत मैं भेजैं थे।
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