सोमवार, 17 जुलाई 2017

जनता कर के सकै सै


रमलू अर सरिता घरां बैठके बात करैं थे सांझ कै। सरिता बोली राजस्थान के बारां जिले म्हं सुण्या सै कई बालक अर कई लोग-लुगाई भूख के कारण मरगे। रमलू बोल्या - ये झूठी बात सै। भूख तै भी कोए मरया करै। बीमार होकै तै दुनिया मरती देखी। सरिता बोली - ज्ञान-विज्ञान आल्यां की मीटिंग म्हं जिकरा था इस बात का। रमलू बोल्या - ये ज्ञान-विज्ञान आले बेरा ना कित-कित तै खोद कै काढ़ ल्यावैं सैं बातां नै। सरिता बोली - सुप्रीम कोर्ट का आदेश सै कि गरीबी की रेखा तै नीचे जीवण आले घरां की पहचान करी जा अर उन ताहिं कार्ड अर नाज दिया जा। सिर्फ अच्छे गुणवत्ता आले अनाज का ए वितरण करया जाना चाहिए। राष्ट्रीय वृद्धा पेंशन तै लाभ ठावण आले लोग लुगाइयां की पहचान करी जा अर हर म्हिने की सात तारीख तक भुगतान कर दिया जाना चाहिए। अन्नपूर्णा योजना तै लाभ प्राप्त करण आले व्यक्तियां की पहचान करी जा अर उन म्हं अनाज बाट्या जावै। आंगनवाड़ी (आई सी डी एस) योजना, राष्ट्रीय मातृत्व लाभ योजना अर राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना अर राष्ट्रीय लाभ योजना पूरी ढालां लागू करी जावै। सुप्रीम कोर्ट के आदेश अर लाभ प्राप्त करण आल्यां की सूची का अनुवाद राज्यों की स्थानीय भाषावां म्हं किया जावै। अर उनको ग्राम पंचायतां, विद्यालयां अर राशन की दुकानां पै प्रदर्शित करया जावै (ताकि सारे लोग यो सुनिश्चित कर सकैं कि उनका नाम सूची म्हं सै अक कोण्या)।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश नै दूरदर्शन अर आल इंडिया रेडियो के जरिये प्रचारित करया जाना चाहिए। ग्राम पंचायत काम के बदले अनाज योजना बनावै अर मजदूरी का भुगतान हर हफ्ते करया जावै। खेतिहर मजदूर, छोटे किसान, अनुसूचित जाति-जनजाति के लोग लुगाइयां ताहिं प्राथमिकता दी जाणी चाहिए। रमलू बोल्या - भागवान थोड़ा-सा सांस तै ले ले। एकै सांस म्हं मंडरी सै इसी-इसी भारया अर काम्मल बात बतावण। ये बात म्हारे गाम आल्यां ताहिं तो आज ताहिं नहीं पहोंची अक सुप्रीम कोर्ट का कोए इसा बी आदेश सै। सरिता बोली याहे तै कमी सै म्हारे गाम म्हं। हम न्यों सोचां सां कि म्हारे बांटे के कामां नै भी कोए और आकै करज्या। दिमाग पै जोर दे कै तो कति राज्जी कोण्या हम। हां तै म्हं न्यों कहूं थी कि यो सारा अनाज के बदले काम का प्रोग्राम ठेकेदारां के मार्फत कति नहीं करवाना सै। ग्राम सभा योजनावां की निरीक्षण अर सामाजिक जांच करैं। ग्राम सभा रिकाट की जांच करै अर भ्रष्टाचार के मामले रिपोर्ट करैं। रमलू तै फेर नहीं डट्या गया अर बोल्या - पंचायत कै साहमी ग्राम सभा का कूण आदमी बोलैगा?
सरिता नै चुटकी ली अर बोली - गाम आल्यां नै क्यों कोसै सै। पहलम तो तू अपणा ब्योंत देखै नै। सरपंच का याड़ी सै तों तो फेर उसकी सारी भूंड पै तेरै लकवा सा क्यूं मारज्या सै। सरिता बोली - पहलम सारी बात तै आच्छे ढालां समझ ले। सारी बात नहीं समझ म्हं आई तेरै तो तेरा सरपंच फेर झूठ बोल कै तेरी बोलती बंद करवा देगा। रमलू बोल्या - आज तै तों अपणी पूरी कसर काढ़ ले। सरिता बोली - सरकार ताहिं स्पष्ट निर्देश दिया गया सै अक वा गरीबी की रेखा तै नीचै रैहवण आले परिवारां की पहचान करण के स्पष्ट दिशा निर्देश तैयार करै। डॉ. एन.सी. सक्सेना को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करया गया।
जै वे या रिपोर्ट देवैं सै अक भुखमरी हुई सै तो मुख्य सचिव प्रशासन नै जिम्मेदार ठहरा सकै सै। रमलू बोल्या - जै कोए पंचायत अर कै सरकार यू कानून लागू ना करै तो जनता के कर सकै सै? सरिता बोली - जनता बहोत कुछ कर सकै सै। जै जनता कट्ठी होकै आवाज़ ठावैगी तो सुणाई जरूरी होवैगी। रमलू बोल्या - या जनता कट्ठी होवै ना अर यू कानून भी धरया रैहज्यागा।
पहलमे तो यू कानून समझाणा कड़ै आसान सै मेरे जिसे कम पढ़े लिखां पै। समझ बी आज्या तो आगै के करणां सै इसका बेरा ना। तनै बेरा हो तै बता दे। सरिता बोली - यो गाम के लोगां का अैहदीपना जिब ताहिं नहीं जावैगा इतनै के ये कानून तोड़निये काबू आकै देवैं सैं। सरिता उठ कै काम करण लागगी अर रमलू उठकै ताश खेलण चाल पड़या।




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