ठाडा मारै रोवण दे ना
उन्नीस सौ तेईस म्हं मुंबई की विधान परिषद नै यो प्रस्ताव पास करया था अक अछूत वर्गों नै सारी सार्वजनिक सुविधावां ज्यूकर तालाब, कुआं, धर्मशाला आदि बरतन की छूट दी जा सै। इसका मतलब इसतै पहलम उड़ै या छूट नहीं थी। सरकार ने हुकम जारी कर दिया। यो सरकारी हुकम महाड़ नगरपालिका धोरै पहोंच्या। उसनै भी प्रस्ताव पास कर दिया 5 जनवरी 1924 नै। फेर हिंदुआं नै इसका पालन कोण्या करया। कोण्या माण्या यो कानून। पाड़ कै रद्दी की टोकरी म्हं फैंक दिया। इसके तीन बरस पाछै महाड़ म्हं कोलाबा जनपद के अछूतां का सम्मेलन 1927 म्हं 18 मार्च तै 20 मार्च ताहिं हुया। इस सम्मेलन में डॉ. अम्बेडकर भी शामिल थे। 20 मार्च नै पच्चीस सौ अछूतां नै कट्ठे होकै जोहड़ का पाणी पीया। शहर के हिन्दु लखान्ते रैहगे। फेर उन हिन्दुआं पै पागलपन सवार होग्या अर उननै अछूतां पै कसूते जुल्म ढाये। अछूतां का कसूर योहै था अक उननै जोहड़ का पाणी भ्रष्ट कर दिया था। बात आड़ै ए कोण्या थमी। हिन्दुआं नै ओ जोहड़ निजी संपत्ति बताकै 14 दिसम्बर 1927 नै पास करया था। इसके छह दिन पाछै महाड़ म्हं अछूतां नै फेर सम्मेलन करया अर इस म्हं दो जरूरी प्रस्ताव पास करे। एक म्हं मनुस्मृति के जलावण की घोषणा करी अर दूसरे म्हं हिंदू के अधिकारां की घोषणा पै बात करी। 20 दिसम्बर 1927 नै उस सम्मेलन म्हं मनुस्मृति जलाई गई। डॉ. अम्बेडकर नै इस घटना की तुलना फ्रांस की क्रांति गेल्यां करी थी। 2 मार्च 1930 नै काला राम मंदिर म्हं जावण खात्तर पांच हजार अछूतां नै कूच कर दिया था। उड़ै हिंदुआं अर अछूतां के बीच म्हं खुल्या संघर्ष हुया अर डॉ. अम्बेडकर के सिर म्हं चोट आई अर और बी सैकड़यां लोग जखमी हुए।
एक और घटना याद आगी। बात 1935 की सै। मुंबई सरकार नै आदेश जारी करया था अक सार्वजनिक स्कूलां म्हं अछूतां के बालकां ताहिं दाखला दिया जावै। बम्बई के अहमदाबाद जनपद के धोल्का तालुका म्हं कबीर नाम के गाम म्हं आठ अगस्त 1935 नै गाम के अछूत अपने 4 बालकां नै स्कूल म्हं दाखिल करवाण ताहिं लेगे। इननै देखण खात्तर सवर्ण हिंदू स्कूल के चारों कान्हीं कट्ठे होगे थे। दाखिला होग्या तो आगले दिन कुछ हिंदुओं नै अपणे बालक स्कूल म्हं कोण्या खंदाये। इसके कुछ दिन पाछै एक बाहमण नै गाम के एक अछूत पै हमला बोल दिया। 12 अगस्त नै लोग मजिस्ट्रेट की कचहरी म्हं अछूत केस दर्ज करावण पहोंचे तो हिंदुआं नै लाठी, भाले अर तलवारां गेल्यां अछूतां के घरां हमला बोल दिया। महिलावां, बूढ़यां अर बालकां की पीट-पीट के ज्यानै काढ़ण नै होगे। रात नै धोल्का आले अछूतां नै उल्टा आणा था तो हिंदुआं नै उनपै भी घात ला लिया। औ तै शुक्र था अक गाम के एक बुढ़िया नै बेरा दे दिया अर अछूत रात नै कोण्या आये ना तो उनकी भी दुर्गति करी जावै हे। अछूत गाम छोड़ कै अहमदाबाद गांधी जी की संस्था हरिजन सेवक संघ म्हं गये अर उसके मंत्री ताहिं सारी बात बताई फेर उस मंत्री नै कुछ नहीं करया। गाम म्हं हिंदुआं नै अछूतां का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। मजदूरी देनी बंद कर दी, खावण पीवण की चीज बेचण तै इन्कार कर दिया। अछूतां का घर तै पां काढ़णा मुश्किल कर दिया। उनके कुएं म्हं माटी का तेल गेर दिया गया। 17 अक्तूबर नै मजिस्ट्रेट कै मुकदमा करया। गांधी नै अर बल्लभ भाई पटेल नै अछूतां ताहिं सलाह दी अक वे गाम छोड़ दें। अम्बेडकर कै घणा धक्का लाग्या उनकी बात सुणकै अर उसै दिन उननै सोच लिया अक हिंदू धर्म म्हं नहीं रैहणा अर 1935 म्हं मेवला म्हं हिंदू धर्म म्हं ना रहवण की घोषणा कर दी थी। आज भी देखां तो हालत घणे से नहीं बदले सैं। हरियाणा के घणखरे गामां म्हं भी दलितां का अर सवर्णां का सांझे का कुआं नहीं पावैगा। दलितां के अर सवर्णां के होक्के न्यारे पावैंगे। जड़ बात उड़ै ए सी खड़ी सै। कितनी माड़ी बात सै। कदे हमनै बैठके सोच्या बी सै?
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