सोमवार, 17 जुलाई 2017

ये सैं म्हारी पंचायतां


म्हारे देश की पंचायतें विकास का महत्वपूर्ण ढांचा होने के चलते सामाजिक-सांस्कृतिक, आर्थिक राजनीतिक तौर पर समस्या ग्रस्त हैं। गामां मैं सामाजिक, सांस्कृतिक अवरोधां की जकड़न इतनी कसूती सै कि पंचायतें आर्थिक विकास की जरूरत तै एक हद ताहिं पूरी करैं सैं फेर सामाजिक सांस्कृतिक विकास तै कति कोरी सैं, इसतै कति कटरी सैं।
म्हारे आड़ै संवैधानिक पंचायतां की साथ-साथ जात गोत आधारित सर्वखाप पंचायतें भी अस्तित्व मैं सैं। चुनी औड़ पंचायतां की कोए वैधता कायम नहीं हो सकी सै जबकि खाप पंचायतां ताहिं बहोत बड़ी सामाजिक मान्यता मिलरी सैं। ये परंपरागत पंचायत कै खापां की पंचायत नागरिक अधिकारों, महिलाओं अर दलितों के खिलाफ गैर कानूनी तरीके तै फैंसले करैं सैं। खाप पंचायत औरतां नै बदला लेवण का जरिया बी बणावैं सैं। जात-गोत के नाम पै कई अपराधिक कृत्यों को ढक दिया जावै सै अर बलात्कारी तक बचा लिये जावैं सैं। जोर जबरदस्ती अर ताकत के दम पै करे औड़ अपराधां ताहिं निभावण ताहिं आगै आवैं सैं तो पिछड़े रूढ़िवादी सामाजिक मूल्यों की वाहक ये पंचायतें अपणे तौर पै संबंध विच्छेद के अर कई बार तो हत्या ताहिं के फतवे जारी कर देवैं सैं।
पिछले दिनों इन्हीं पंचायतों ने कई ऐसे फैसले सुनाए हैं जिनमैं पति पत्नी ताहिं संबंध विच्छेद खातर विवश करया गया। अर भाई-बाहण बणण ताहिं कहया गया। ये पंचायतें सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अन्याय के खिलाफ कुछ नहीं बोलती उल्टा बाल विवाह, दहेज, घूंघट और जाति प्रथा जिसी पिछड़ी सोच की व्यवस्था ताहिं प्राश्रय देवैं सैं। म्हारे समाज मैं इसी पिछड़ी औड़ ताकत मौजूद सैं जो समाज मैं अपणा गलबा कायम करण की खातर इन पंचायतां का इस्तेमाल करैं सैं।
गामां मैं इसा ए माहौल राजनीति मैं भी मौजूद सै जड़ै कोए रचनात्मक काम नहीं हो सकदा। म्हारे गाम समस्या ग्रस्त गाम सैं जड़ै मुद्यां की राजनीति का तोड़ा सै पाने-ठोले की राजनीति सै। नशाखोरी, छेड़छाड़, लड़कियों की भ्रूण हत्या, मारपीट, पर्दा, दहेज, यौन उत्पीड़न जिसी कई सामाजिक समस्यां सैं जिनपै चुनी औड़ पंचायतां नै पहल कदमी करकै अगवाही करण की जरूरत सै। हमनै इस परिवेश मैं गाम नै समझण की जरूरत सै। हरियाणा आर्थिक रूप तै तो विकसित प्रदेश होग्या फेर आड़े के सामाजिक सूचकांक पिछड़े क्यों रहगे? सोच्चण की बात तो सै। 2001 की जनगणना के हिसाब तै स्त्री पुरुष अनुपात घटकै 861 पै आ लिया। महिलावां की खातर सामाजिक आचार-व्यवहार के नाम पर घूंघट जिसे बंधन सैं।
लड़कियां पै अत्याचार बढ़ते जावैं सैं। शादी के बाद महिलावां नै बड़े पैमाने पै मारपीट, दहेज की मांग, अर लड़का पैदा करण का दबाव झेलना पड़ै सै। पुत्र इच्छा के चलते भ्रूण हत्या का चलन आम होग्या। पंचायतां नै इसे सभ्य नागरिक समाज की स्थापना जिसमैं सबकी खातर समानता हो, सबनै अपनी बात कहवण का मौका मिले, सामाजिक कामां मैं सबकी भागीदारी हो अर सब सम्मान की जिंदगी बसर कर सकैं। ग्रामीण विकास नै एजेंडे पै ल्यावण खातर सबतै जरूरी काम सै चुनी औड़ पंचायतां की वैद्यता कायम करी जावै। परंपरागत पंचायतां कै खिलाफ माहौल तैयार करया जावै। महिलावां अर दलितां की हिस्सेदारी चुनी पंचायतां मैं बढ़ाई जावै। ग्रामसभा की मीटिंग ईमानदारी तै सारा गाम कट्ठा करकै करी जावै। अर उड़ै गाम के विकास के मुद्यां पै चरचा करकै गाम के विकास की योजना बनाई जावै। पंचायत के काम करण के तौर तरीक्यां मैं सुधार ल्याये बिना गामां का विकास करना आसान कोण्या। फेर पंचायतां नै सुधारण का काम कूण करैगा? सरकार करैगी? बीडीओ कै डीसी करैगा? यो तो जनता जनार्दन नै करणा पड़ैगा, जितना तावली जनता या बात समझ ले उतना ए आच्छा सै।





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