हरियाणा म्हं कुछ साल पहलम ताहिं खेतां के डोल्यां पै शीशम खड़ी पा ज्याया करती। इनकी छां भी बढ़िया अर खेती म्हं भी नुकसान ना। हलाई काढ़ कै हाली शीशम की छां म्हं बैठ कै जोटा लाया करता। इसकी लाकड़ी भी काम्मल बताई। शीशम के इतने फायदे अर फेर बी शीशम खत्म होन्ती जावण लागरी? या बात सो सोचण की सै। बेरा ना गामां म्हं इस बात कान्हीं ध्यान गया सै कि नहीं गया सै। उनका ध्यान क्यूकर जावै इसी बातां कान्हीं? गाम आल्यां नै तै ताश खेलण तै फुरसतै कोण्या। कै एक दूसरे की टांग खींचे जावैंगे। ज्यूकर पहलम बैठ कै दुख-सुख की अर ऊंच-नीच की बतला लिया करते वा बात तै ईब रही कोण्या। कौणसी बात गाम के हक म्हं सै अर कुणसी खिलाफ सै इसपै कदे कदाऊ जिकरा हो जान्ता हो तै बेरा कोण्या। गाम के स्कूल म्हं के होरया सै इननै कोए वास्ता नहीं, गाम के अस्पताल म्हं इलाज का के हाल सै इनकी चिंता ना, गाम म्हं पाणी की डिग्गी की सफाई हुई सै कि नहीं इननै कोए लेना देना नहीं। गाम म्हं छोरियां गेल्यां छेड़खानी की वारदात बधण लागरी सैं इनपै इसका कोए खाता नहीं। जड़ बात या सै कि गाम काल उजड़ता आज उजड़ जाओ फेर किसे नै चिंता नहीं दीखती। सांझ नै दो घूंट लाकै इसनै गाल दे उसने गाल दे, घरआली कै ऊपर छोह तार लें, अर फेर खायें बिना पड़कै सो जाणा। दारू की मार तै कोए घर तो बच नहीं रहया माणस बेशक बचरया हो। पहलम हुक्का आदमी ए पीया करते, ईब घणखरी लुगाई भी हुक्टी पीवण लागगी कै बीड़ी फूंकती पा ज्यांगी। कई गामां म्हं तो थोड़ी घणी बीरबानी बी दारू का सेवन करण लागली सैं। खांसी के शिकार लोग लुगाई अस्पतालां म्हं लुटते हांडैं सैं। दमे की बीमारी बधती जा सै। चमड़ी की खारिश रात नै सोवण नहीं देन्ती। चिंता करकै ब्लड प्रेसर बधगे। दिल का धड़का बधग्या। नशाखोरी की साथ-साथ सेक्स अंगां की बीमारी बधती जावैं सैं। जवानां म्हं नुपशंकता बढ़ती जा सै। दूध ढोल म्हं घलग्या। रोजगार खत्म होगे। छोरियां नै पेट म्हं खत्म करण लाग लिये। बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश की लुगाइयां नै पांच-पांच, सात-सात हजार म्हं खरीद कै ल्यावण के मामले बधगे। पहलम तै गाम म्हं एक दलाल हुया करता सरकारी महकम्यां का फेर ईब तै हरेक महकमे का एक एक दलाल होग्या। किसे का राज आल्यो इन दलालां की पांचों आंगली घी म्हं रैहणी ए रैहणी। प्राइवेट पाणी के नलके आगे। पीस्से आल्यां नै सुख होग्या बिना पीस्से आल्यां की मर आग्यी। बुलध टोहें पावैं सैं। गाल भीड़ी होन्ती होन्ती इतनी भीड़ी होगी कि मोटा-सा माणस तो लिकड़े कोनी सकै। पाणी घर-घर म्हं नलक्यां म्हं लियाए फेर इसकी निकासी का कोई इंतजाम नहीं कई घरां म्हं तो भैंस भी नलके के पाणी तै नुहाई जावैं सैं।
नहर के पाणी के धान्ने अटे पड़े सैं। कई कई साल होगे धाने खरीदें। नहर का पानी किमै तो आवैए कम अर जो आवै भी वो धान्ना अट्या पड़्या, वो खेत म्हं क्यूकर पहोंचै। धान्ना खोदण कूण जावै? बिना बात की बात पै रोज राड़ करैं असली बातां का जिकरा ना, परिवार नाम की चीज नहीं बचरी। बूढ़े बालकां नै देख कै राजी ना अर बालक बुढ़या के मरण की बाट देखैं सैं। सास बहू की कटती करती पावै तै बहू सास नै बुरी बतावै। करियाणे की दुकान एक गाल म्हं दो-दो तीन-तीन खुलगी। इन दुकानां म्हं दारू के पाउच आगे। लोगां का राजनीति पर तै विश्वास उठ लिया फेर माला फेर बी इक्कीश इक्कीश हजार की घालैंगे नेतावां कै। नया पेटेंट के सै इसका किसे नै बेरा पावै कोण्या। यो डब्ल्यू टी ओ के बला सै इसपै होक्के पै कदे चर्चा ना।
टी.वी. पै नशा हिंसा सैक्स का नंगा नाच क्यों होवै इसपै कोए सवाल ना। खेती की तबाही के कारण सैं इसपै जिकरा ना। ये ब्यूटी कम्पीटीशन एकदम क्यों छागे सारे भारत म्हं? इस म्हं किसकी साजिश सै? कई बात लिखण की ना होती। थोड़ी लिखी नै ज्यादा समझियो अर बिचार करियो। बिचार करांगे तो राह भी पावैगा। बिचार तै परहेज करना छोड़णा पड़ैगा।
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