सोमवार, 17 जुलाई 2017

खूब कमाया, फेर भी भूखे

खूब कमाया, फेर भी भूखे
दो हजार साल के बीच सी मैं दुनिया मैं दो खबर अखबारां की सुर्खियां म्हं रही थी। आपां अखबार पढ़दे कोण्या ज्यां करकै म्हारे लेखै किमै बी होएं जाओ दुनिया मैं म्हारी बला तै। अर जै अखबार पढ़ां सां तो अपणी राशि देख ली अर कै कोए बलात्कार की खबर पढ़ ली। ये दोनूं खबर फिलिपाइनज की सैं। जून दो हजार म्हं एक घटना की खबर छपी थी अक कम्प्यूटर वायरस (ज्यूकर म्हारी कपास की अमरीकन सुण्डी) जिसका नाम लव बग था, दुनिया के हर देश म्हं एक साथ छाग्या अर इस ‘लव बग’ वायरस नै बहुराष्ट्रीय कंपनियां के, कई देशां की सरकारां के दफ्तरां के सिस्टमां के म्हां बड़कै तहलका मचा दिया। पैंटागन अर ब्रिटिश सरकार ताहिं हिला कै धर दिये। इस वायरस नै इन कम्प्यूटरां मैं बड़कै दुनिया के दस बिलियन डालर का झटका दे दिया था अर ज्याहें करकै या खबर सुर्खियां म्हं थी। कम्प्यूटर सुरक्षा विशेषज्ञ अर एफबीआई के एजेंट नै इस वायरस की खोज करी अक या कित तै आई थी। इस वायरस की पैदाइश मनिला टैक्नीकल कॉलेज म्हं जाकै टोही अर बेरा लाया अक ओनेल डी गुंजमैन जो चौबीस साल का था उसनै या वायरस त्यार करी थी। इसतै एक बात तो साफ होगी अक इस इंटरनेट के इतने बड्डे गुब्बारे म्हं कोए भी इसमैं सुई की नोक कोड़ छेक करके इसकी हवा किसे बख्त भी काढ सकै सै। फेर दूसरा खतरनाक मसला यो था अक यू चौबीस साल का गाभरू फिलिपाइन्स मैं आण्डी माण्या गया और देश का गौरव होग्या। इस देश के लोगां नै खुशी मनाई अक म्हारे बरगे पिछडे़ देश के गाभरू नै विश्व की सूचना व्यवस्था ताहिं धूल चटवा दी एक बै तो।
मनिला के पड़ोसी कस्बे म्हं जिसका नाम प्रोमिज्ड लैंड बताया उसमैं इस ‘लव बग’ वायरस की खबर के एक म्हीने पाछै एक और खबर सुर्खियां म्हं आई। दो हजार तै फालतू माणस एक भूस्खलन की दुर्घटना अर इस दुर्घटना पाछै इसके कारण लागी आग तै मरगे। इस दुर्घटना तै पहलम तूफान भी आया बताया। उस बख्त अखबारां नै या एक प्राकृतिक आपदा बताकै इसतै पल्ला झाड़ लिया फेर बात तो किमै औरे थी। इस कस्बे मैं कचरा डम्प करया जाया करदा अर इसमैं पचास हजार लोग रहया करदे। ज्यूकर दिल्ली के पड़ोस मैं बहादरगढ़ हो। ये लोग मनिला के खाते पीते लोग जो कचरा उडै डम्प करया करते उसमैं तै टोह टोह के बच्या ओड़ खाणा खा कै पेट भरया करदे। मतलब यो सै अक ये लोग मनिला के कचरे मैं जीया करदे। दो दिन बहोतै तगड़ा मींह बरसया तो कचरे के जो पहाड़ के पहाड़ उड़ै कट्ठे होरे थे वे ढीले पड़गे अर अचानक भूस्खलन इसका नतीजा था इस कारण घणे मकान ढहगे अर कई माणस उनमैं दबकै मरगे। इन मकानां की खस्ता हाल बिजली की फिटिंग म्हं शार्ट सरकटिंग करकै आग लागगी अर रही सही कसर इसनै पूरी करदी। दो सौ तै फालतू लोग मारे गये अर घणे लोगां पै आग कारण लिकड़े जहरी पदार्थों का बुरा असर हुया। इसतै एक बात साफ सै अक आर्थिक जगत की सफलता अर सामाजिक जगत की असफलता एकै शरीर मैं देखी जा सकैं सैं। या आज के विकास के अमरीकी मॉडल की सबतै कसूती खासियत सै। फिलिपाइन्स का मनिला शहर अर प्रोमिज्ड लैंड इस विकास के जीते जागत नमूने सैं। अर इसे नमूने दुनिया के घणखरे देशां म्हं पाये जावैं सैं। म्हारे भारत देश म्हं भी इसे कई नमूने सैं। हरियाणा प्रदेश भी इस अधखबड़े उल्टे विकास मॉडल का एक जींवता उदाहरण सै। आर्थिक जगत मैं पूरे भारत मैं आगै फेर सामाजिक जगत मैं पूरे भारत मैं सबतै पाछै। महिला पुरुष अनुपात की गिरती संख्या सबकै साहमी सै। पूरी दुनिया की आर्थिक व्यवस्था सन् 1990 म्हं 31 ट्रिलियन डालर थी अर दो हजार म्हं या बधकै 42 ट्रिलियन डालर होगी। सन् 1950 म्हं पैदावार 6.3 ट्रिलियन डालर थी। इसतै टेलीफोन, कार, फ्रीज, टीवी की संख्या बधगी। इस सबके बावजूद अमीर गरीब के बीच के खाई बधण लागरी सै। क्यों? सोचां तो सही।
---



?







कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें