पक्का गधा - पी.जी.
तड़के तै सांझ ताहिं कुम्हार के डंडे खायें जा, बोझ तै लद्या हांडे जा उसनै ए गधा कहवैं सैं। खावण पीवण का बख्त आवै तो कुम्हार उसनै खोल कै कुरड़िया कान्ही करदे अक जा मौज कर। दिन रात भूखा प्यासा रैहकै काम करै, डण्डे खावै अर फेर गधा कुहावै। योहे तै सै कलयुग। घनीए किस्म सैं म्हारे देश मैं गध्यां की - मजदूर गधा, किसान गधा, कर्मचारी गधा वगैरह-वगैरह। फेर कुछ दिन पहलम मनै मैडिकल जाणा पड़ग्या पेट के दर्द के कारण। उड़ै एक पढ़या-लिखा अमिताभ बच्चन जितना लाम्बा, खूबसूरत गधा देख्या। इसे गध्यां की मैडीकल मैं गलेट लागैं सैं। 150 सौतै ऊपर बताये। तड़के तै सांझ ताहिं अर सारी रात मरीजां के इलाज मैं लागे रहवैंगे। राउण्ड पै सीनियर डाक्टरां की डाट खावैंगे, कान ताहिं हिलावैं ना। मरीज के रिश्तेदार दुखी करें जावैं, नर्स कहया मानकै देवैं ना, क्लास फोर एकाधा गडरा कै बोलै। छोटे तै छोटे काम तै लेकै मुश्किल तै मुश्किल काम ताहिं इस पी.जी. नै करने पड़ैं सैं। बेराना क्यूकर करैं सैं? म्हारले गाम आले कुम्हार के गधे मैं अर इस पी.जी. मैं थोड़ा ए सा फर्क लाग्या। कुम्हार फेर भी डण्डयां तै पीट कै सांझ नै उसनै थोड़ा पुचकारदे सै, एकाध बै खरैरा करदे सै। फेर इन पी.जी. भाइयां नै पुचकारनिया कोए नहीं। इस पी.जी. धोरै बेगार भी घणिए करवाई जा सै। एक ढाल की बेगार हो तै जिकरा करया जा। उड़ै एक पी.जी. तै रात नै बात करण का मौका मिलग्या। मनै थोड़ी सी हमदर्दी जताई तो भाई तो अपणी दास्तान सुणावन्ता सुणावन्ता रो पड़या। न्यूं बोल्या - म्हारे बरगा दुखिया इस संसार मैं कोए नहीं। हम अपणा दुखड़ा किसे आगै रो बी नहीं सकदे। दिल्ली तै रेल की टिकट बुक करवा कै हम ल्यावां चाहे च्यार बर जाणा हो चाहे पांच बर जाणा हो। रिजरवेशन के पीस्से बोस कदे नहीं देवै। टाइप, कम्प्यूटर, स्लाइड का सारा काम बोस का हम अपणे पीस्यां तै करवावां, दिल्ली शोपिंग करण जाणा हो तै ओ म्हारी कार नै तोड़ै अर जिस धोरै कार कान्या ओ मारूति वैन का इन्तजाम करकै देओ। बोस की तै बाहर बाल बच्यां नै ले कै चाल्या जातै रातनै उसके घर की रूखाल करनी पड़ै। बोस जै मकान बणावै तो उसके इतनै लैंटर नहीं आले इतनै तो उसके पी.जी. भाइयां की नींद गायब। मरीज धोरै दस हजार की घूस तै ले बोस अर मरीज की देखभाल उसका पी.जी. करै, उस मरीज के नखरे ओ पी.जी. ओटै।
इन बोसां नै कदे क्लास मैं आकै नहीं झांकना। पढ़ाई का भट्ठा बिठा दिया। इननै अपने प्राइवेट मरीजां तै ए फुरसत नहीं लाग कै देती। जिस मरीज नै चढ़ावा चढ़ा दिया हो उसतै तो बोस हंस कै बात करैगा। पांच मिनट उसके बिस्तर पै भी लावैगा। दिखावे खातर पी.जी. भाइयां पै डाट भी मारकै दिखावैगा। पी.जी. नाड़ तले नै करकै सब सुणता रहवैगा। जिब इम्तिहान होवैंगे तो इम्तिहान मैं पास फेल का ड्रामा रच्या जावै सै। कोए सोने की चैन देकै आवै सै तो कोए हाथ का सोने का कंगना। पीस्यां की जागां सोने तै अर चीजां तै फालतू प्रेम सै आजकाल के बोसां नै।
पीस्से लेन्ता तो बोस पकड़या बी जा सकै सै फेर सोने का कड़ा लिया सै इसपै उसने कूणसा वीजीलैन्स विभाग पकड़ैगा? कई बोस तै उस पीजी नै इसे बताए जो लंगोटी के बी साच्चे कोन्या। कई पी.जी. छोरियां नै देख कै उनकी लार पड़ें जावैं सैं। पास फेल की तलवार लटका कै वे उनतै बहोत कुछ चाहवैं सैं। सोने पै सुहागा यो सै अक ये इतने नीच गिरे औड़, पापी बोस हमनै गधा बतावैं। ये अपनी कान्ही कदे नहीं लखावैं। सबतै ईमानदार होवण का फेर पाठ पढ़ावैं।
पी.जी. की इस ढाल की बात सुणकै मेरै कसूता सदमा सा होग्या। कई बड्डे डाक्टरां की तसबीर बहोतै बढ़िया थी मेरे दिमाग मैं फेर वातै जमा चूर-चूर होगी। पी.जी. नै बताया अक अपणे बालकां नै पास करावण ताहिं, उनके नम्बर बधवावण ताहिं ये किते ताहिं भी झुक सकैं सैं। साचें ए कलयुग आग्या पूरे मैडीकल के मरीजां का जिनके कान्ध्यां पै बोझ सै आज के दिन वे सैं पी.जी. (पक्के गधे) अर जो हर तरां उस पी.जी. का शोषण करैं, मरीज नै बख्सैं ना वे बोस डाक्टर समाज के सबतै बड्डे सफेद पोश माने जावैं। अर उड़ै चर्चा या बी थी अक यो जो मेज कै नीचै-नीचै सारा लेण-देण हो सै इसमैं सरकार प्राइवेट प्रैक्टिस की छूट डाक्टरां नै दे कै अपनी मोहर लावणी चाहवै सै। ये इब्बै इन छोटे डाक्टरां नै पक्के गधे बनालंे सैं फेर तो इन बिचारे पी.जीयां का के होगा बेरा ना? इनकी हालत ब्यां करण नै फेर खूंटा ठोक की कलम मैं तो ज्याण बचै नहीं अर और कोए लिखै नहींगा इनके बारे मैं तो ये पी.जी. अर मैडीकल के मरीज जमा राम्भज्यांगे।
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