बुधवार, 7 दिसंबर 2016

छह महीने काढ़ देगा

छह महीने काढ़ देगा
लैक्शनां का गुब्बार कम हो लिया। 22 तारीख नै साफ होली थी अक सरकार तै चौटाला की ए बनैगी। बीजेपी की घिस लिकड़गी इन लैक्शनां मैं। बंसीलाल का भी सूपड़ा सा साफ होग्या। कांग्रेस थोड़ी घणी उल्टी बाहवड़गी। कांग्रेस के भीतर के झगड़े अर बीएसपी के उम्मीदवार इन दो चीजां नै कांग्रेस कै कई जागां चौखा झटका दिया। भाजपा गेल्यां तै वाहे बणगी अक खिसियाणी बिल्ली खम्भा नौचै। भाजपा का सूपड़ा क्यों साफ हुआ यो सबनै बेरा सै फेर हांडी का छोह बरोली पै तारया जावण लागरया सै। चौटाला ताहिं तो किमै कहवण का ब्योंत नहीं ग्रोवर जी का फेर सुन्दर लाल सेठी के पाछे जरूर पड़ लिया। ईबकै तो देबीलाल नै चौटाला की किश्ती किनारे पहोंचा दी फेर कै दिन ताहिं इसपै लोगां के न्यारे न्यारे बिचार सैं। बाजपेई नै किसानां की घिस काढ़ण का अमरीका धोरै ठेका छटवा लिया। न्योंन तै चौटाला साहब किसानां का मसीहा बतावै सै अपणे आप नै तै अर बाजपेई तै बढ़िया प्रधानमंत्री नहीं दीखदा। दो नावां पै सवाल होकै चौटाला साहब डूबण तै क्यूकर बचैंगे यो तै बख्त बतावैगा। कपास पिटगी थी, धान पिटग्या, आलू रुलता हांड्या डेढ़ रुपइये किलो, अर ईबकै गिहुं की बारी सै। यूरिया के भा बधा दिये, डीजल के भा बधा दिये, माट्टी का तेल म्हंगा कर दिया, सरचार्ज बढ़ा दिया, जड़ बात या सै अक इस बजट नै किसान रम्भा के मारण का जुगाड़ कर दिया। ईब किसानां के हितेषी किसानां के पाले मैं खड़े होवैंगे अक बाजपेई के पाले मैं? चर्चा तो इसी बी सुणण मैं आवै सै अक तलै ए तलै खिचड़ी रंधण लागरी सै अर बाजपेयी कै चन्द्रा बाबू नायडू कदे बी पटखणी दे सकै सै ओ भी बहोत दुखी हो लिया बताइयें सैं।
खैर बात हरियाणा की अर हरियाणा के किसानां की सै। किसान चौटाला के मुंह कान्हीं देखण लागरे सैं अक ओ के कहवैगा? म्हारी गिहुं पिटवावैगा अक बचावैगा? सस्ती बिजली दिवावैगा अक म्हंगी करवावैगा? पाणी जितणा चाहिये उतना किततै ल्यावैगा? यूरिया के दाम कम करावैगा अक नहीं? किसानां के बालक बिना दवाई बिन आई मौत मरण लागरे सैं उनका के राह करैगा? पढ़ाई लिखाई का भट्ठा बैठग्या, नौकरी कितै रही कोण्या, महिलावां की संख्या घाट होगी, छोरयां के ब्याह ना होन्ते। इन सारी बातां का के राह टोहवैगा? कई गामां मैं बात न्यों बी सुणण मैं आवै से अक बाजपेई का साथ कोण्या छोड्डे म्हारा साथ छोड़ सकै सै। पेंशन तीन म्हिने की तो दे दी फेर आगली कद मिलैगी इसका बुजुर्गां नै कोए भरोसा नहीं। एक ताऊ तै न्यों बोल्या - छह म्हिने काढ़ देगा चौटाला? ईब ताऊ के सवाल का जवाब तै चौटाला के आगे के कारनामे ए देवैंगे। जै जनता का साथ दिया तो पांच साल पूरे काढ़ ज्यागा अर जै बाजपेई का साथ दिया तो बेड़ा बीच मंझदार मैं डूबणा लाजमी सा दीखै सै अर छह म्हिने नहीं साल भीतर किमै न किमै हो लेगा। कुर्सी पै बैठें तो एक दिन हुया सै इसके जावण की बात भी चाल पड़ी या बात जंचण की तो सै ना फेर आण आला बख्त बतावैगा अक ऊंट किस करवट बैठैगा? कई न्यों बी कैहन्ते बताये अक ईब चौटाला स्याणा होरया सै, ईब मार कोण्या खावै। एक बात जरूरी अटकै सै अक बाजपेई की नाव मैं बैठ कै किसानां का भला क्यूकर कर्या जा सकै सै? काठ की हांडी कै बर चुल्हे पै चढ़ाई जा सकै सै? सवाल एक और बी सै अक ब्याह पाछै किसी बुढ़ार? जिब किसान का पितलिया ए लिकड़ लेगा तो फिर किसानां के पाले मैं आकै खड़े होण का के मतलब रैहज्यागा? फेर लागै सै गरीब का अर जरूरतमंदां का हिमायती छिदा ए बचरया सै। दुनिया के धनी देश जिनमैं दुनिया की 20 प्रतिशत जनसंख्या रहवै सै दुनिया के 86 प्रतिशत संसाधनां का इस्तेमाल करै सै। बाकी जो 14 प्रतिशत संसाधन बचगे वो बाकी के देशां की जनता (जिनमें 80 प्रतिशत दुनिया की जनसंख्या आवै सै) इस्तेमाल करै सै। अर इतनी ए मैं कोण्या सधरी। बात और बी ऊपर जाली। इस 80 प्रतिशत जनसंख्या का जो सबतै ऊपरी 5 प्रतिशत हिस्सा सै ओ इस 14 प्रतिशत मां तै 7 प्रतिशत संसाधन इस्तेमाल करण लागरया सै। मतलब यो हुआ अक दुनिया की 75 प्रतिशत आबादी के धोरै इस्तेमाल करण नै बस दुनिया के 7 प्रतिशत संसाधन सैं।
तो चौटाला साहब नै आज तय करणा पड़ैगा अक ये किसके पाले मैं खड़े सैं। दिखावा तै 75 प्रतिशत के पाले मैं खड़े होवण का सै फेर असल मैं ये खड़े 5 प्रतिशत के पाले मैं सैं अर 20 प्रतिशत धोरै जिब दाब लाकै किमै मांगण का बख्त आवै सै तो इस 75 प्रतिशत नै भी अपणी गेल्यां लालें सैं। फेर असल मैं जिब इस 75 प्रतिशत ताहिं किमै असल मैं देवण की बात आवै सै तो ये कोरे भाषण पियावण लागज्यां सैं। ईब भाषणां तै काम कोण्या चालै चौटाला साहब! पालेबन्दी खिंचती आवै सै। फैसला करणा ए पड़ैगा ईब, ना तै जनता कर देगी फैसला।
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