झोटा फ्लाईंग
एक दिन मैं दिल्ली तै आऊं था। टेम 8.30 बजे सी का था। सापले तै घणे एक पढ़णिये बालक चढ़गे। मजबूरी थी ड्राइवर नै बस रोकणी पड़ी। उसका बस चालता तो ओ बिना रोकें उनके ऊपर कै तार ले जान्ता। बस मैं बैठी सवारी ढाल-ढाल की बात करण लागगी। इननै ऊधम मचा राख्या सै। इननै जीना हराम कर दिया। न्यों कोए सोच्चण नै तैयार नहीं अक ये आड़ै दो घण्टे तै खड़े सैं अर बस आले बस ना रोकते। कालेज मैं वार होवण लागरी। तो ये गाभरू छोरे करैं तो के करैं? आगै सी ईस्मायला आग्या उड़े तै बी बीसियां छोरी अर तीसीयां छोरे और चढ़गे उसमैं। कितै पां टेकण नै जगां कोण्या रही। ईस्मायला के पुल तै ऊतरेए थे अक रोहतक कान्ही तै एक मिनी बस आकै रूकी अर उसनै म्हारे आली बस बी रूकवा ली। मिनी बस मां तै 8-10 पहलवान से दिखण आले लोग उतरे अर म्हारी बस घेर ली। म्हारी बस मां तै बी कई गाभरू उतर-उतर कै अर खेतां मां कै भाज लिये। कई तै खिड़कियां के मां कै कूदगे। कोए बोल्या - झोटा फ्लाईंग आगी। ईब इनमैं तै एक दो उन छोर्यां कै पाछै भाज लिये। छोर्यां की रेस भी देखण जोगी थी। जै कोए टेम देखणिया हो तै सौ मीटर दौड़ के टेम के रिकार्ड टूटे पावैं। उनमैं तै एक छोरा थ्याग्या। बस फेर के था। लात घूंसे बरसण लागगे उसपै। ओ छोरा पड़ग्या। एक पहलवान नै तो चाला ए कर दिया उस छोरे के कोहनियां ते पिटाई शुरू कर दी। पन्दरा बीस मिनट का न्यारा ए नजारा था। एक सवारी न्यों बोली - ये छोरे भी इस झोटा फ्लाईंग कै ए काबू आवैं सैं। दूसरी सवारी बोली - जिब इन ताहिं पास की छूट तो देदी पर बस पहलम तै थोड़ी करदी। अर जो सै वे बी लाम्बे रूट का नाम लेकै इन खात्तर बस ना रोकैं तो ये करैं तो के करैं? पहली सवारी बोली - जिब ये इतने होगे सरकार बी कितनी एक बस चला सकै सै? बस इसे ढाल की बात होन्दी रही रोहतक ताहिं।
फेर मेरा ख्याल इन झोटा फ्लाईंग आल्यां कान्ही गया। नाम तै इनका सही धर राख्या सै। झोटे की एक खास बात बताई अक ओ गस्सीला बहोत हो सै अर गश खान्ता वार नहीं लावै। ताकत तै होए सै उसमैं। फेर दिमाग नाम की चीज इनकै धोरै छटांक बी नहीं होन्ती। मनमानी उसके सुभा का हिस्सा सै, जी चाहवै उसके खेत मैं मुंह मार्यावै। तो कमोबेश इन झोटा फ्लाईंग आल्यां की शकल अर हाव भाव अर डील डोल झोट्यां के हिसाब मैं फिट बैठदा लाग्या। जिसनै बी इस फ्लाईंग का यो नाम काढ्या उसका धन्यवाद। कोए अपणे आप नै झोटा कहवाकै क्यूकर राज्जी हो सकै सै? फेर गजब यू था अक मनै झोटा कहवा कै राज्जी होन्ते माणस आज अपणी आंख्यां देख लिये।
रोहतक नजदीक लाग लिया था। कुछ सवारी आड़ै उतरी। बस चाल पड़ी अर मेरे दिमाग मैं बी हटकै विचारां की होल उठण लागगी। मनै ख्याल आया अक झोटा फ्लाईंग नै उस छोरे के मारे क्यूं? भाई झोटा फ्लाईंग आल्यों थारे धोरै इस तरां का हरियाणा सरकार का कोए हुकमनामा हो तै हरिभूमि के माध्यम तै मेरै ताहिं पहोंचाइयो। जै नहीं सै यू गादड़ पर्चा तो थारा न्यों बालकां की पिटाई करणा गैर कानूनी सै अर ये नौजवान थारे पै मुकदमा कर सकैं सैं। कानून कहवै सै अक बिना टिकट आल्यां पै दस गुणा किराया लिया जा ओ तम ले सको सो। मान लिया उस धोरै किराया नहीं सै तो जज के साहमी पेश करकै उसकी जेल का कानून सै। पर पिटाई करण की बात कहवण आला कानून कितै नहीं सै।
झोटा फ्लाईंग नै अपणी झोटे की समझ तै बाहर आकै इन्सानी समझ तै काम लेणा शुरू करणा चाहिए नहीं तै किसे दिन गस्सीले झोटे के पाछै ज्यूकर गाम पड़कै उसकी गत बणाया करै न्यों थारी गत बी बण सकै सै।
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