सोमवार, 5 दिसंबर 2016

स्वराज सूली तोड़या

स्वराज सूली तोड़या 
स्वदेसी का नारा लावणिये आज बदेशियां की झोली मैं जा बैठे। जिस बखत तिलक नै मांग करी थी अक स्वराज म्हारा जन्म सिद्ध अधिकार सै, उस बखत उसनै सुपने मैं भी नहीं सोच्चा होगा अक उनके सपन्यां के भारत पै बहुराष्ट्रीय कम्पनियां की फौज का कब्जा हो ज्यागा। कद सोची थी अक दिल्ली मैं राज करनिये ये म्हारे राष्ट्रभक्त अपने भाग्य विधाता मुद्रा कोष - विश्व बैंक के शर्तनामे के आगै गोड्डे टेक देंगे। महात्मा गांधी जिसनै जनता की गरीबी की चीत्कार सुणी थी, जनता ताहिं लड़ण खातर प्रेरित करया था, आज म्हारे काले शासक वर्ग की करतूत देख कै हटकै मरण बरत पै बैठ जान्ते या न्यारी बात सै अक आज ये राज करणिया उसनै स्वदेशी मौत मरण खातर एकला छोड़ देन्ते।
जै जवाहर लाल नेहरू हटकै जनम ले ले तै औ आज के भारत नै देख कै छाती पीट ले। इसा भारत जो निजीकरण, बाजार संस्कृति, उदारीकरण, वैश्वीकरण अर और बेरा ना किसी किसी दोमुही अर दो अर्थी बातां का इस्तेमाल करकै आत्मनिर्भरता की जड़ खोदण लागरया सै। जो मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र की नींव की विकास की रणनीति नै त्याग कै निजीकरण की कोली भरण लागरया सै। बेरा ना म्हारी जनता की आंख्यां की पट्टी कद खुलैगी? बड़ी चालाकी तै भारत की मजबूत परम्परा साम्राज्यावाद विरोध की राही छोड्डी जावण लागरी सै। भारत का गुट निरपेक्षता के बारे मैं सारी दुनिया में नाम था। पर आज काल का नया निजाम अपणे डालर महाप्रभु अर व्हाइट हाउस के महंतां के आगै घणे भक्ति भाव तै सिर झुकावण नै त्यार सैं।
इसमैं शक की कोए गुंजाइस नहीं सै अक जिननै देस की आजादी खातर संघर्ष अर नये आत्म निर्भर, ताकतवर भारत के विकास में अपणी भूमिका निभाई, वे जै हटकै आज्यां तै ‘वेस्ट इज बैस्ट’ के संस्कारों से ग्रस्त मुट्ठीभर लोगों नै राज पै काबीज पावैंगे। बहु राष्ट्रीय निगमां नै इस मुट्ठीभर भारत के लोगों की मुंह मांगी कीमत लाकै ये खरीद लिये अर पूरे भारत देस पै कब्जा जमावण की त्यारी सै। इन मुट्ठीभर लोगों ताहिं पीस्से की कोई कमी नहीं राखी अर ऐस करवादी। ईब ये उनकी किसे बी बात नै पत्थर की लकीर मानकै चालै सैं। ये ऐय्यासी के नसे में असली भारत जड़ै पेट मैं एक मारी दी जाण आली बच्ची के पैदा होन्ते की साथ गल घोटण आली बच्ची, साप्ताहिक हाट बाजार मैं बिकण आली आदिवासी औरत, विकास के नाम पै डूबण कै बैहवण आले आदिवासी, उपेक्षा के शिकार देहाती लोगों अर शहर की झुग्गी झोंपड़ी मैं रहवण आल्यां की इन मक्कारां नै रत्तीभर भी परवाह कोण्या। म्हारे महान पूर्वजां नै फांसी खान्ती बरियां सुपणे मैं भी नहीं सोच्चा होगा अक उनके दम्भी अर नकचढ़े उत्तराधिकारी जो आज राज मैं काबिज सैं, भ्रष्टाचार अर चुनावी तिकड़म को राजनीतिक उद्योग बणा कै अपणी झोली भरैंगे। कसूता चाला तो यो सै अक म्हारे संविधान की धज्जियां इसे की कसम खा कै उड़ाई जावण लागरी सैं। समाजवाद, विदेशी गुट निरपेक्ष नीति, राष्ट्रीयकरण, आत्मनिर्भरता अर गरीबी हटावण के सारे संविधान के जुझारू सिद्धान्त ताक पै धर दिये अर समता मूलक समाज व्यवस्था का नामो निशान मिटा कै धर दिया। अर ये हे फेर अपणे आप नै सबतै बड्डे देस भक्त कहवैं सैं। इनका राष्ट्र प्रेम रोज टी.वी. अर अखबारां मैं आंसू बहान्ता हांडै सै। लागै सै इन खातर राष्ट्र ये मुट्ठीभर लोग सैं देस की 95 करोड़ जनता इनके राष्ट्र के खाते मैं नहीं आन्ती ज्याहें तै इनका राष्ट्र प्रेम इन खातर कदे नहीं आंसूं बहान्ता। म्हारे सिर पै बदेसी करजा 95 अरब 70 करोड़ डालर तै फालतू हो लिया अर हमनै बेरा सै कर्जा देवणियां की दाब किस किस ढाल की हुया करै। ओ बेगार भी करवावैगा, ओ म्हारे घर मैं तांक झांक भी करैगा अर और बेरा ना के के। भोपाल त्रासदी अर एंडरसन कै खिलाफ बारंट की इब ताहिं उपेक्षा पाछै या बात तै कति ए साफ होली अक ये बदेसी कम्पनी भारत की न्याय व्यवस्था के घेरे तैं बाहर सैं अर ये गरीबां की जिन्दगी गेल्यां ज्यूकर चाहवैं न्यों खिलवाड़ कर सकैं सैं।
फेर जिननै यो स्वराज सूली तोड़या सै जनता उनने पिछाणण लागरी सै अर जनता उननै जरूर सूली तोड़ कै ए दम लेवैगी। इतिहास इस बात की गवाही देवण लागरया सै। मेरा पूरा विश्वास सै अक जनता जागैगी जरूर।

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