बुधवार, 7 दिसंबर 2016

म्हारी कमाई कित जा सै

म्हारी कमाई कित जा सै
जिब न्यों जिकरा चालै अक हम इतनी मेहनत करां पर फेर बी हम भूखे क्यूं? तो बेरा सै म्हारे दिमाग मैं के जवाब आवै सै अक म्हारी किस्मत मैं ए पीस्सा कोण्या। जो जिसे करम लिखवा कै ल्याया सै ओ उसे ए फल पावैगा। उसकी इच्छा कै आगै माणस का के बस चालै सै? अर और बी घणे एक जुमले सैं जो सुणण मैं आवैं सैं। पर ये बात वैज्ञानिक सोच की ताकड़ी मैं धरकै तोली जावै तो सही नहीं तुलती। इनमैं किमै ना किमै रोल दीखै सै। वा क्यूकर? एक कहाणी सै जिसके नाम बदले औड़ सैं पर सै साच्ची। एक डाक्टर सै। उसनै रोहतक मैडिकल कालेज तै एम.बी.बी.एस. करी अर एम.एस. (सर्जन बणण की ट्रेनिंग) बी आड़ै ए तै करी। अर हरियाणा के एक जिले मैं जाकै उसनै प्रैक्टिस शुरू कर दी। जिब मैडिकल मैं पढ्या करदा तो बहोत शरीफ मान्या जाया करदा। घर तै बी घणा रहीश नहीं था। नर्सिंग होम चाल पड्या। अखबारां मैं रोज जिकरा रैहन्ता - आज इतने किलो की रस्सोली काढ़ दी अर आज न्यों कर दिया। रूक्का पड़ग्या। जिसतै बूझो ओए न्यों कहवै अक बहोत आच्छी किस्मत लिखा कै ल्यार्या सै। सब क्याहें की मौज सै किस्मत हो तै फलाणे डाक्टर बरगी हो। एक दिन बेरा लाग्या अक उसके घर पै अर नर्सिंग होम पै छापा पड़ग्या इन्कम टैक्स आल्यां का। फेर जितणे मुंह उतणी ए बात। कोए कहवै राजनीति सै इसमैं। इतना काम्मल डाक्टर था इसकै बी छापा गेर दिया। कोए कहवै अक इन्कम टैक्स आल्यां का भोभा नहीं भर्या होगा उसनै ज्यां करकै छापा गेर दिया। ईब झूठे केस बना देंगे इन्कम टैक्स आले। छापे मैं उस डाक्टर धोरै पांच करोड़ के एफ.डी. पाए (कोए बूझै इन्कम टैक्स आले ये एफ.डी. किततै बणवा ल्याये?)। एक मशीन (लेजर सर्जरी करण की) उसके नर्सिंग होम मैं लागी औड़ सील करी सै इन्कम टैक्स आल्यां नै। इस मशीन की कीमत साठ लाख रुपइये बताइये सै। कमाल की बात या सै अक इसके कोए कागज नहीं। या मशीन बाहर के किसे देश तै आई सै। ईब या क्यूकर आई? इसमैं किस-किस नै कितने पीस्से खाये? ये सारी बात इन्कम टैक्स आले बेरा पाड़ सकैं सैं। फेर जिकरा उस शहर मैं न्यों बी था अक इस डाक्टर का ना बिगड़ै कुछ। यो ले दे कै इन्कम टैक्स आल्यां नै अर साफ बच ज्यागा। बात या थी अक म्हारी मेहनत की कमाई कित जा सै? तो ये पांच करोड़ रुपइये उस डाक्टर नै म्हारै तैं ए म्हारा इलाज करण के नाम के कमाये होंगे अर क्यूकर कमाये (घणी फीस ली अक थोड़ी या तो जनता जाणै) फेर उसनै कमाये अर इन्कम टैक्स आल्यां ताहिं अपणी कमाई का बड्डा हिस्सा दिखाया कोण्या। तो उसके अमीर होवण कै पाछै उसकी किस्मत नहीं उसका काला धन सै। ईबी जै म्हारै यकीन नहीं होया अक म्हारी कमाई कित जा सै तो मेरे धोरै इसतै फालतू बात नहीं। हां म्हारे देश के हरियाणा अर पंजाब के कई आंकड़े बतावैं सैं अक दो किल्ले आले कै चार किल्ले आले किसानां की धरती बिकण लागरी सैं अर एक साल मैं जितणी धरती वे बेचैं सैं उसका दस तै बीस प्रतिशत वे घर के सदस्यां का इलाज करवावण खात्तर बेचैं सैं। तो म्हारी कमाई म्हारे धोरै तै कित जा सै उसका एक उदाहरण तो यू सै अर इसे-इसे उदाहरण हर गाम अर हर शहर मैं पाज्यांगे। म्हारी कमाई और बी कई जगां जावै सै उसका जिकरा फेर कदे करांगे। कई बै मरीज घणा बीमार होज्या तो मैडिकल मैं लेज्यां। उड़ै उसका परेशन होकै ओ ठीक होज्या तो विज्ञान का, मैडिकल साइन्स का, डाक्टरां का धन्यवाद नहीं करते। उसकी जगां कहवांगे अक इसकी किस्मत मैं लिख राख्या था ज्यां तै बचग्या। कई बै मैडिकल आले हाथ खड़े करदें अर ओ मरीज अपोलो मैं कै जयपुर गोल्डन मैं ले जाणा पड़ज्या अर दस पन्दरा दिन उड़ै रैहणा पड़ज्या तो पांच सात लाख बिना पैन्डा नहीं छूटता। तो गरीब माणस तो अपोलो कान्ही मुंह करे नहीं सकदा अर जो मुंह कर बी ले सै तो उसनै कै तो धरती बेचणी पड़ै सै, कै मकान बेचणा पड़ै सै अर कै घर आल्यां के सारे जेवर बेचने पड़ैं सैं। अर फेर जै मरीज गेल्यां ऊंच-नीच होज्या तो बी आपां न्यों ए कहवा सां अक के करां उसकी किस्मत मैं न्यों ए लिख राखी थी। अर जै ओ बच ज्यावै तो बी आपां न्यों ए कहवां सां अक उसकी किस्मत मैं न्यों ए लिख राखी थी। एक बात तै मेरै पक्की जरगी अक या किस्मत हमनै सही ढंग तै सोच विचार करकै बीमारी के कारणां ताहिं नहीं जाण देन्ती अर ना इस बात का बेरा लागण देन्ती अक म्हारी कमाई कित जा सै?

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