बुधवार, 7 दिसंबर 2016

डिपरैसन

डिपरैसन
आजकाल जिस कान्ही नजर मारो उसे कान्ही डिपरैसन का माहौल नजर आवै सै। पड़ौसी नै बूझो अक के हाल सै तो जवाब मिलैगा - बस कटरै सैं दिन। घर मैं गाभरू छोरयां की हालत का तो बयान करना और बी मुश्किल। रोजगार ना कितै, ब्याह की बाट मैं सूक कै लीकड़ा हो लिया, और किमै साहरा ना जीवण का। डिपरैसन मैं पड़या सोयें जागा कै एकला बैठ्या बैठ्या सोचें जागा। जवान लड़कियां का हाल लिखण ताहिं तो और ढाल की कलम चाहिये। घर मैं खास तरां की दाब, छोरी नै न्यों नहीं करना चाहिए वो नहीं करना चाहिए। हंसना मना, बाहर जाना मना, अच्छा खाणा मना, किसे तै बोलना बतलाना मना। घर मैं उसनै इसा लागें जा ज्यूकर ईब बाज झपटैगा अर बाहर गिद्धां की ढाल नजर घूरती रहवै सै उसनै। ना भीतर ना बार किते बी बसेबा कोण्या उसका। डिपरैसन की शिकार वा करै सै अपणा खुद का बहिष्कार। नितांत एकली खड़ी पावै सै वा अपणे आप नै कईबै। खेती मैं डिपरैसन, कारखाने मैं डिपरैसन, खान मैं डिपरैसन। एटलस साइकिल मैं डिपरैसन, आयस्सर ट्रेक्टर मैं डिपरैसन, अम्बैसडर मैं डिपरैसन। सौ का जोड़ यो सै अक चौगिरदे नै डिपरैसन डिपरैसन छाग्या। बात झूठ बी लाग सकै सै कई माणसा नै। उन मुट्ठी भर लोगां नै जिनकै धोरै क्याहें की कमी नहीं, बेइन्तहा पीस्सा सै, इस बात की चिन्ता खाए जा अक कदे दिवालियां होज्यां। इस बात का डिपरैसन। डबल्यू एच ओ  नै लोगां ताहिं एक वारनिंग दी सै। इसका मानना सै अक दुनिया मैं 2010 ताहिं दिल की बीमारी नंबर एक पै होवैगी अर डिपरैसन की बीमारी नंबर दो पै आ ज्यागी। हाल साल मैं या डिपरैसन की बीमारी घनी ए तलै सै। डबल्यू एच ओ का यू भी ख्याल सै अक जै दुनिया की चाल इसे स्पीड पै रही तो हो सकै सै डिपरैसन की बीमारी 2020 ताहिं नंबर एक पै बी ना आज्या। डा. एच एल  कैला जो साइक्लोजी विभाग एस एन.डी.टी. युनिवर्सिटी मुंबई का अध्यक्ष सै नै चार सौ बालकां पै एक सर्वे करया। हर दूसरे बालक नै चिन्ता थी शिक्षा के बारे मैं खासकर इम्तिहान का बोझ था उनके दिमाग मैं अर दूसरी रोजगार की चिन्ता थी। किसी किशोर मैं जै ये लक्षण दीखें तो समझ लेना चाहिए अक यो डिपरैसन मैं सै कै जावण नै होरया सै। चिड़चिड़ा सुभा हो जाणा, नींद कम होणा, कम खाणा कै जरूरत तै फालतू खाणा, शरीर मैं आड़ै उड़ै दर्द की शिकायत होणा, खास ढंग का यौन व्यवहार। अर जै ये चीज दो हफ्ते तै फालतू चालती रहवै तो मान लेना चाहिए अक यू स्ट्रैस नहीं सै यू डिपरैसन सै। डिपरैसन का इलाज एक तो सै डाक्टरां धोरै जा कै दवाई गोली खावण का। दूसरा इलाज सै पहले इलाज की साथ-साथ जो इलाज करया जाणा चाहिये वो सै किशोर तै प्यार करां, स्नेह तै राखां, आराम करावां, आच्छा खावण नै देवां अर पूरी नींद लेवैं। दुनिया के पैमाने पै लोगां मैं डिपरैसन की बीमारी नंबर एक पै ना पहोंच ज्यावै इस खातर बी आपां नै, सबनै मिलकै किमै तो सोचणाए पड़ैगा। कई बार यू सोच्चण का काम आपां दूसरां पै छोड़दया सां। चाहे ओ राम जी ए क्यों ना हो, यू सोच्चण का काम आपां नै किसे पै नहीं छोड़ना चाहिये, खुद सोचना चाहिए। बख्त तै सोच ल्यो ना तो कदे डिपरैसन मैं आकै न्यों कहो - ओहले हमनै के बेरा था न्यों बणज्यागी?
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