मंगलवार, 6 दिसंबर 2016

इस जात तै बच कै

इस जात तै बच कै
आजकाल पूरे रोहतक मं चर्चा सै महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय मैं सुहाग साहब की अर जे के शर्मा जी की। जितने मुंह उतनी बात। कोए कहवै सै अक यूनिवर्सिटी का नाम तो दयानन्द पै अर आड़ै काम इतने घटिया। आड़ै काम करणिये औधेदार बेरा ना कुणसी दुनियां मैं रहवैं सैं। धरती पै पां टेक कै ए ना चालते। दूसरा बोल्या अक यू राजनीति का खाड़ा बणा कै गेर दिया। राज मैं बैठे औड़ लोगां की वी.सी. इतनै गलत सही सारी बात माणता रहवै इतनै तो ओ वी सी बहोत काम्मल सै उन खात्तर अर जै माड़ा सा भी अहरा पहरा होज्या तै उसकी खाट खड़ी करण मैं चण्डीगढ़ मैं बैठे नेता माड़ी सी बी वार कोण्या लावैं। रिकाट सै इस यूनिवर्सिटी का अक जितने वी.सी. आये वे अधम बिचालै गए अर कै बस आखरी दिन क्यूकरै पूरे करकै गए। चाहे बतरा का मसला हो, चाहे जे डी सिंह का राज हो, चाहे हरद्वारी लाल की सल्तनत का बख्त हो, चाहे जे डी गुप्ता का बख्त हो, चाहे एस एन राव वी सी रहया हो, चाहे राम गोपाल की हकूमत रही हो, चाहे कैपरीहन धोरै चार्ज रहया हो, चाहे लेफ्टीनैंट जी सी अग्रवाल का जमाना हो, चाहे ब्रिगेडियर चौधरी की टरम की बात हो, चाहे विवेक शर्मा के दौर की चर्चा हो, अर चाहे ले.ज. कौशिक के मौसम का जिकरा हो, इस यूनिवर्सिटी नै अपणा जोबण कदे देख्या नहीं अक न्यों कैह सकै माणस अक ओ बख्त बहोत बढ़िया था।
आड़ै जात्यां कै ऊपर कुछ लोगां नै अपणी गोटी फिट करण की रिवायत घाल राखी सै। जो वी.सी. इस जात के शिकंजे तै थोड़ा बहोत बाहर रैहग्या ओ ओरां के मुकाबले ठीक बी कहवाग्या। आड़ै च्यार पांच पोस्ट सैं उन पोस्टां पै नया वी.सी. आन्ते ए की साथ उस जात के माणस आ बैठ्या करदे अर कैहन्दे अक ईब जाटां का राज सै यूनिवर्सिटी मैं, ईब बाह्मणां का राज सै, ईब पंजाबियां का राज सै, ईब बणिया का राज सै। इन जात्यां के कई-बई सौ कर्मचारी अपणी मांगां खात्तर धक्के खान्ते हांडैं जां सैं - उनकी इन राज आल्यां नै कदे परवाह नहीं करी। असल मैं ये इन जात्यां के वफादार बी कोण्या, ये मौका परस्त लोग सैं, अपणा काम काढू चाहे क्यूकरै बी लिकड़ो इन नै नहीं जात की इसी तिसी करी। पर हम भी इतने आडू सां अक जात कै पाछै इनकी आंख मींच कै जय बोलते वार नहीं लावन्ते। म्हारे आडूपन के कारण ये आज ताहिं काच्चे काटदे आये सैं।
हां तै जो भी वी.सी. आया उसनै यूनिवर्सिटी का भला करण की बहोत कोशिश करी पर यूनिवर्सिटी ऊपर नै उट्ठण की जागां तलै नै जान्ती गई। अर ईब तै लोगां की तनखा के बी लाले पड़रे सैं। इसे बख्तां मैं आये सैं म्हारे नये वी.सी. साहब। बख्त बहोत अष्टा सै। यूनिवर्सिटी की माली हालत खस्ता सै - सरकार नै मदद देवण के नाम पै हाथ खड़े कर दिये अर न्यों कहया बतावैं सैं अक यूनिवर्सिटी आले अपणा आप कमाओ अर खाओ।
पढ़ण लिखण का माहौल भी माड़ा ए सै। ना कोए पढ़ कै राज्जी अर ना कोए पढ़ाकै राज्जी। जो पढ़ाणा चाहवै भी उसनै और पढ़ावण नहीं देवैं जो पढ़णा चाहवै उसनै पढ़ण ना देवैं।
इसे माहौल मैं एक माणस जो वी.सी. साहब का फैन सै, उसनै बहोत उम्मीद सैं अक बहोत कुछ होवैगा ईब यूनिवर्सिटी मैं। उसकी भावना इस रागनी के मांह कै ओ पहोंचाणा चाहवै सै बेरा ना पहोंचैगी अक नहीं पहोंचैगी।
वायस चान्सलर बणग्या इस यूनिवर्सिटी का आज तूं,
तीन साल मैं म्हारे धोरै म्हारे पूरे कर दिये काज तूं।
यूनिवर्सिटी कालेज का प्रिंसीपल घणे दिन का खटकै सै,
डी एस डब्ल्यू की पोस्ट भी म्हारे रैह रैह कै नै अटकै सै,
म्हारा भाणजा नौकरी खात्तर यो घणे दिनां का भटकै सै,
कई डेलीवेज कुकावैं सैं उनका केस बी तो लटकै सै,
अपणी चालती मैं चलाकै मेट लिए ईब सारी खाज तूं।
कई कर्मचारी हिमाती धुरके आच्छी पोस्ट पै बदली करदे,
कई जो विरोधी म्हारे उनका आज सिर काट कै न धरदे,
राजा मिस्त्री आला राज तेरा कर म्हारा तूं ऊंचा सिरदे
ब्योहारी माणस दो दिन मैं घर अपणा खुशियां तै भरदे
आज तलक जो चाल्या कोण्या इस चला दिये रिवाज तूं।
नेता जी नै तूं राजी राखिये उनका पूरा कैहण पुगाइये,
गलत सही वे जो भी कैहदें बस हां में हां भरता जाइये,
दिन नै रात अर रात का दिन सुर मैं सुर मिलाइये,
बिल्ली के भागां छींका टूटया काच्चे काट कै खाइये,
तिकड़म लड़ाकै पहरें रहिये यो वी.सी. आला ताज तूं।
नियम कायदे अर नैतिकता ये सब बात कैहणे की सैं,
पाणी का बहाव देख कै रूत लहरां के बल बैहणे की सैं,
के बेरा कितणे दिन ये पावर थारे धोरै रैहणे की सैं,
हमनै अपणे हक की बात पूरी ढालां तै लैहणे की सैं,
खूंटा ठोक कै जूत मारिये मतना करिये लिहाज तूं।

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