सोमवार, 5 दिसंबर 2016

अधखबड़ा माणस - म्हारा खरना

अधखबड़ा माणस - म्हारा खरना
कई बै जिब बात चालै तै बुद्धिमान माणस हरियाणे के बारे मैं न्यों कहवैं सैं अक आड़ै गिहूं की अर चावल की पैदावार तै बधगी अर लोगां धोरै रातू रात पीस्सा (काला धन घणा अर धोला धन थोड़ा) बी बधग्या पर सांस्कृतिक स्तर पै तो विकास कोण्या हुआ अर या बात सुणकै कई आडू न्यों कहवैंगे अक या झूठी बात सै। हरियाणा तै संस्कृति के मामले मैं पूरे भारत का पथ प्रदर्शक रह्या सै अर वे गिणवा देंगे कुरुक्षेत्र का कर्मक्षेत्र जड़ै महाभारत खेल्या गया अर गीता रची गई अर और बेरा ना के के। फेर झकोई आज के हिसाब मै कदे नहीं दिमाग पै जोर देकै सोच्चण की कोशिस करैं अक आज का हरियाणा के सै? न्यों तै कदे देश मैं नालन्दा अर तक्षिला मैं दूसरे देसां के लोग पढ़ण आया करदे फेर आज कड़ै सै ओ नालन्दा? आज का बिहार कित खड्या सै? हरियाणे मैं मनै दीखै सै अक आड़ै जुबान की भाषा का विकास तै होए नहीं लिया सै। आड़ै तै ईब ताहिं लठ की भाषा चालती आई सै, आज बी चालै सै अर बेरा ना और कितने दिन चालैगी? सुरड़ेपन तै, फुहड़पन तै जै कोए नेता कै अफसर रहवै तै न्यों कहवैंगे अक भाई कति ऑरिजनल सै। अपने पुराने रीति रिवाजां पै न्यों का न्यों टिकरया सै। हरियाणवी शिक्षा नै नौकरी तै दिवादी पर शिक्षित अर सभ्य माणस तै कोण्या पैदा करया। इसनै पैदा कर्या अधखबड़ा माणस। ये अधखबड़े माणस कई नेता होगे अर अफसर बणगे। काम चलाऊ, लंगड़ी लूली अर अधखबड़ी शिक्षा पनपी हरियाणा मैं। माणस नै माणस बणावण आली अर सूहर सिखावण आली, तर्क शक्ति बढ़ावण आली शिक्षा तै दूर-दूर ताहिं बी ना टोही पावन्ती आड़ै।
इसी कल्चरल बैकवर्डनैस का जीता जागता सबूत सै महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय। जिस दिन तै इसकी नींव धरी गई है उसे दिन तै यो पहलवानां का खाड़ा बणाकै छोड़ दिया। या लाइफ साइंसिज बणती बणती आज की बिचारी यूनिवर्सिटी बणा दी शेरां नै। आड़ै च्यार पांच पोस्ट सैं - पीएटू वायस चान्सलर, इस्टेबलिस्मैंट की शाखा का ए.आर., सीक्रेसी का ए.आर. अर दो एक और। इन पांच छै पोस्टां पै हर कौम के भाइयां नै कब्जा करकै अपनी अपनी कौम का अर यूनिवर्सिटी का सुधार करण के सपने देखे पर पूरे नहीं होए। फेर बी शेर जात्यां की कोली भरे बैठे सैं। आड़ै पहला वायस-चान्सलर आया बतरा साहब फेर सरकार नै उसकी टर्म पूरी नहीं होण दी। फेर डा. जे.डी. सिंह पी.वी.सी. बणकै आया। उसनै अपणा लठ पूरी यूनिवर्सिटी पै घुमाया अर बखत आवण तै पहलमै सरकार नै उसपै अपना लठ घुमा दिया। भाई नै बी टांडा टीरा ठाकै जाणा पड्या। फेर हरद्वारी लाल जी पधारे। उननै लोग खूब नचाये। सरकार नै ओ खूब नचाया अर सरकार अर हरद्वारी लाल दोनूं कचहरी नै नचाए। बीच मैं जे.डी. गुप्ता जी आये। उननै अपने करतब दिखाये। एस.एन. राव जी बी किमै सेवा कर पाये। हटकै हरद्वारी लाल जी नै फेर आकै पैर जमाये। राम गोपाल जी बी साल डेढ मैं तार बगाये। फेर कमान ले. जे.सी. अग्रवाल ताहिं दी अर अधम बिचालै खोस ली। फेर ब्रिगेडियर साहब का नम्बर आया इननै बी जमकै गुल खिलाया। एकाध टीचर इसा लाया जिसनै आज ताहिं नहीं पढ़ाया। तीसरे साल मैं बान्ध इनकै बी ला दिया था सरकार नै। फेर विवेक शर्मा जी आये। उस ताहिं ताहवण खातर छात्र बी भड़काये अर दूसरे तीर बी चलाये। कोर्ट कचहरी मैं जाकै पैंडा छुटवाया। फेर कौशिक साहब नै लगाम सम्भाली अर अपणा फौजी डण्डा घुमा दिया। अधम बिचालै सरकार नै फेर खूंटा गाड दिया अर खेमका साहब रजिस्ट्रार बणा दिये। जंग जारी सै।
सवाल यू सै अक चाहे कोए बी सरकार रही हो; सारी सरकारों का एकै सा ब्यौहार क्यों सै? चाहे किसा कसूता बुद्धिमान माणस इस वायस चान्सलर की कुर्सी पै आ बैठै उसका तौर तरीका एकै ढाल का क्यों रहया? उसनै अपणा लठ खूब घुमाया अर जिब सरकार नै लठ घुमाया तै चिल्लाया। दोनूआं की लठ की भाषा क्यों? आड़ै आकै जुड़ै सै ओ कल्चर अखरने का सवाल। हरियाणा नै तरक्की तै करली आर्थिक स्तर पै पर कल्चरल स्तर पै तै न्यों का न्यों पुराना खरना सै। अधखबड़े माणस, लठमार भाषा, झोटे आली गस, राज की ताकत का नसा ये सारी मिलकै आज का नजारा पेस करैं सैं। जै यूनिवर्सिटी मैं अर हरियाणा मैं बदलाव ल्याणा सै तै पहलम इस पुराने खरने नै बदल के आधुनिक, उदारवादी, प्रगतिशील खरने का विकास करना होगा। पर करैगा कूण?
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