बुधवार, 7 दिसंबर 2016

वैश्वीकरण की माया

वैश्वीकरण की माया
     दुनिया मैं विकास की राही आन्धी सुरंग मैं जाली लागै सै। इसनै ठीक राही पै ल्यावण खात्तर चार बातां की राम बाण दवाई की खोज करी गई - वैश्वीकरण, उदारीकरण, निजीकरण अर बाजारीकरण। ईब कई माणस ईसे पावैंगे जिननै इनके मतलब का ए कोनी बेरा। कई तै इनका नाम सुणकै ए सिर पाकड़ कै बैठगे होंगे। चालो इनपै तो फेर कदे चर्चा कर ल्यांगे जिब थाम ठाली से होवोगे फेर ईब चर्चा इस बात पै सै अक इस राम बाण दवाई नै के असर दिखाया? तो थोड़ा सा जी करड़ा करकै सुनियो। म्हारे देश की खाद्य सुरक्षा तै कति मूंधी मारदी। विश्व वाणिज्य संस्था के दबाव मैं म्हारे देश नै कृषि पै अनुदानां (सबसिडी) पै कटौती कर दी अर जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) की घीस काढ़ कै गेर दी। अनाज अर दूसरे खाद्य सामग्रियां की खुले व्यापार की इजाजत दे कै मुनाफा खोरां ताहिं लाभ पहोंचावण आली नीति अपणा ली। इन सारी बातां नै मिलकै ईसी हालत पैदा कर दी जिसमैं जनता के विशाल हिस्से नै जिंदगी की मूलभूत सामग्रियां के लाले पड़ण लाग लिये सैं। जनता रम्भावण लागरी सै म्हंगाई की मार करकै।
     1995-98 मैं गिहूं की पैदावार मैं 50 लाख टन की गिरावट आई। चावल अर दाल पाछली जागां पै ए खड़े कदम ताल करें गये। इसतै गाम के माणसां नै दाल रोटी का और फालतू संकट होग्या। फेर गामोली बी बण बेरा ना कूणसी माट्टी के रहे सैं। भूखे मरै सैं पर कोए हाल बूझै तो बेरा सै के कहवैंगे? न्यों कहवैंगे अक तीजां बरगे कटरे सैं। हां तो रेपसीड अर सरसों के उत्पादन मैं भी 20 लाख टन घाट पैदावार हुई। तिलहन मैं 20 लाख टन की, गन्डे मैं 10 लाख टन की, आलू मैं 50 लाख टन की अर आदि वासी लोगों के मोटे खाद्यान्नों मैं भी 30 लाख टन की गिरावट आई। कई जिन्स दूसरे देसां तै मंगवानी पड़ी। फेर बी प्रति व्यक्ति खाद्यान्नां की उपलब्धता प्रति दिन 473.7 ग्राम तै घटकै 450.9 ग्राम रैहगी। दालां की 38.4 ग्राम तै घटकै 32.3 ग्राम पै आगी अर यू सारा काम एकै साल मैं हो लिया।
     इस बात का म्हारे साइन्स दानां नै बेरा पाड़ लिया अक प्रत्येक व्यक्ति नै रोज कम तै कम बीस 40 ग्राम दालां की अर 478 ग्राम नाज की जरूरत हो सै। फेर इस बखत ये हालात इस सच्चाई नै ए आगै ल्यावैं सैं अक गामां की जनता भुखमरी के दरवाजे पै खड़ी ल्या करी। एक चाला और देखो देश मैं तो लोग भूख तैं मरण लागरे सैं अर हम गिहूं का निर्यात करण लागरे सां (दूसरे देसां नै भेजा सां)। गिहूं 120 डालर प्रति टन के हिसाब तै बाहर भेजण का फैसला कर लिया जबकि गिहूं की पैदावार अर उसकी आपूर्ति पै 190 डालर प्रति टन का खर्चा आवै सै। मेरै तो समझ नहीं आया यो हिसाब किताब अर जै थारै समझ आया हो तै बीरा एक पोस्ट कारड पै लिख कै जरूर भेजियो दखे भूल मतना जाइयो। रामधन सिंह किलोई आला ईब याद आवै सै। देश के प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक डा. एम.एस. स्वामी नै हिम्मत करकै इसी देश विरोधी अर जनता विरोधी नीतियां कै खिलाफ आवाज ठाई सै अर चेतावनी भी दी सै। वाह डाक्टर साहब जुग जुग जियो। मेरै बड़ा घी सा घल्या जिब थारे बारे मैं बेरा लाग्या।
     यू तो ट्रेलर सै जिब पूरी फिल्म आवैगी तो देखियो के बणैगी? ईबै मेरी बात घाट जचै सै फेर आन्धी सुरंग का विकास तावला ए जंचा देगा। हमनै भी खाली नहीं बैठना चाहिये अखाड़ बाढ़े तै हटकै अपणी समझ पैणी करके सिर कै मंडासा मारकै मैदान मैं उतरना पड़ैगा। मित्तर की प्यारे की अर असली बैरी की पिछान करणी पड़ैगी, निशान देही करनी होगी। पाले बन्दी करकै वार करने पड़ैंगे।

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