तीजां केसे कट-रे सैं
देस पै 95 अरब 70 करोड़ डालर का बदेशी कर्जा चढ़रया सै जिसका ब्याज पाड़ण खातर भी म्हारे देश नै और कर्जा लेणा पड़ै सै, मूल तो न्यों का न्यों खड़या रैहज्या सै। यो कर्ज क्यों चढ़रया सै म्हारे देश पै? हमने कदे नहीं बूझ्या। सरकारी दफ्तरां की, सरकारी स्कूलां की, सरकारी अस्पतालां की माट्टी पलीद तो करैं देशी अर बदेशी कम्पनी, विश्व बैंक अर मुद्रा कोष मिलकै, अर इन सबके पताल मैं ले ज्यावण की जिम्मेदारी का घंटाला बांध्या जा सै इनमैं काम करणियां की कामचोरी कै, अर कै उनके निकम्मेपन कै, अर कै भ्रष्टाचार कै। अर जनता बी ईसी आडू. सै अक उसनै बी यो झूठा प्रचार साचा लागण लागज्या सै। देश मैं भ्रष्टाचार, कामचोरी अर निकम्मेपण की एकै राम बाण दवाई बताई जा सै - ‘निजीकरण’। अर म्हारे बरगे आडू. भी सैड दे सी, हां मैं हां मिला द्यां सां अक निजीकरण तै होणा ए चाहिये। देश मैं आज कै दिन बीस हजार तै बी फालतू बदेशी कम्पनी सैं, जिनै अपणा मकड़ जाल फैला दिया। अर हमैं इननै न्योतण आले सां। देश का धन लूट-लूट कै ये बदेशां मैं ले जावण लागरी सैं अर हमनै कोए एतराज नहीं इनके बारे मैं, म्हारा राष्ट्र प्रेम बेरा ना कित पड़कै सोज्या सै?
आज देश मैं 52 करोड़ तैं फालतू लोग बीस रुपइये रोज मैं दिनां कै धक्के देवण लागरे सैं। इनका हाल देख कै म्हारा सिर बेरा ना शर्म तै क्यों ना झुकता? बेरा ना किस मुंह तै आपां कहवां सां मेरा ‘भारत देश महान’।
लैक्शनां मैं कह्या जा सै अक यू जनता द्वारा जनता ताहिं चुण्या गया जनता का राज सै। फेर या बात जचण की तो कोण्या। यू राज जनता का सै के? अक यू राज बदेशी कम्पनियां का सै? अक बड्डी-बड्डी देशी कम्पनियां का सै? माफिया का राज सै के? बची खुची खुरचन मैं मुंह मारणिये बस्ता-ठाऊआं का सै? सवाल टेढ़ा सै। एक बात तै जमा नंगी होकै साहमी आली अक यू रोज रोज के बीस रुपइये कमावणिया अर इसतै कम आले 91 करोड़ लोगां का कोन्या। और चाहे किसे का बी हो।
तो फेर किसका सै यो देश? जिसकै बी इस देश की कमाई का चौखा हिस्सा हाथ लागरया सै, यू देश तो उसे का मान्या जाणा चाहिये। तो इस हिसाब तै सबतै फालतू लेगी बदेशी, कम्पनी अर उनकै लागता सा मिल्या बड्डी देशी कम्पनियां नै उस पाछे नम्बर लाग्या जमींदारां का अर घणी धरती आले अमीर किसानां का। भ्रष्ट अफसर, भ्रष्ट नेता, माफिया, चन्द्रा स्वामी बरगे जीमगे एक हिस्से नै। बासी कुशी तले की तिलच्छट हाथ आवै सै मध्यम वर्ग कै, अर टटपूंजिये कर्मचारियां कै। ईबतै समझ आगी होगी अक यो देश किसका सै? अक और बी खोल कै बतावणी पड़ैगी?
सवा सौ करोड़ तै फालतू की आबादी आले देश मैं तीन करोड़ लोग तै तीजां केसे दिन काटण लागरे सैं, अर बाकी के 97 करोड़ क्यूकरै घिसटन लागरे सैं, इस बाट मैं अक कदे तो थारे बी दिन बाहवड़ैंगे। ये तीन करोड़ कैहन्ते हांडैं सैं अक ‘हमाम मैं सब नंगे सैं’ तो हम भी कैहण लागज्यां सां ‘हां हमाम मैं सब नंगे सैं’। इसतै इन लुटेरयां का नंगापन ढंक ज्या सै, अर हमनै बेरा ए नहीं पाटता। न्योंए ये तीन करोड़ कहवैं सैं अक म्हारे ता तीजां बरगे दिन कटरे सैं, तो हम भी कहवां सां अक म्हारे तो तीजां केसे कटरे सैं। जिसनै बीस रुपये रोज मिलैं, जिसनै दस रुपइये रोज मिलैं, ओ तीजा बरगे दिन क्यूकर काटण लागरया सै, मेरी तो समझ तै बाहर सै, अर जै थारी समझ आरी हो तै मनै भी बताइयो मेरे बीरा!
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