सोमवार, 5 दिसंबर 2016

रोहतक डूब लिया

रोहतक डूब लिया
रोहतक जिले का सत्यानाश जावण मैं बस माड़ी सी कसर रैहरी सै। रोहतक जिले की पागड़ी सबतै भार्या। रोहतक जिले की नाक सबतै लाम्बी। रोहतक जिला हरियाणा की इज्जत मान्या जावै। हरियाणा मैं राजनीति का गढ़ रोहतक मान्या जा सै। इसा कामल इतिहास रहया सै म्हारे रोहतक जिले का फेर बेरा ना ईब के होग्या इसकै। ईब तै रोहतक जिले के खाते मैं पूरे हिन्दुस्तान मैं महिलावां की सबतै कम संख्या होवण का तमगा आवै सै। एक हजार माणसां पै रोहतक जिले मैं 796 महिला बताई। अर ईस 2000-2001 के साल मैं ये और भी नै जाली होंगी।
बेरा ना के चाला सै छोरे की भूख बधती ए जावै सै रोहतक आल्यां की। सुरते हर तीन भाई थे। ईब सुरते के तीन छोरी अर चौथा छोरा आगै सैं। पांचमा बालक सुरते की बहू कै होवण आला सै। किसे नै टोक लिया सुरते अक रै ईब तो बस कर खसम, ईब तो छोरा भी सै तो सुरता बोल्या एक का बी होना ना होना बराबर सै, दो तै होणे ए चाहिए। छोरा होगा तो बुढ़ापे की लाठी बणैगा। छोरियां का के सै ये तो पराया धन सैं। जिस माणस नै सुरते टोक्या था ओ बोल्या अक सुरते थाम कितने भाई सो? सुरते बोल्या अक हम तीन भाई सां। टोकणिया माणस बोल्या अक थारे मां बाबू कूणसे मैं रहवैं सैं वे? सुरता बोल्या - वे तै न्यारे ए रहवै सैं। हम तीनू भाई न्यारे-न्यारे सां। ओ माणस बोल्या - थाम तो इनके बुढ़ापे की लाठी कोन्या बणे तो वे थारे बुढ़ापे की लाठी क्यूकर बणज्यांगे? आज काल छोरी ए तो थोड़ी घणी सम्हाल बेशक करले मां बाप की बाकी छोर्या कै बिसर तो रहियो ना। पर छोरियां के घर का तो हमनै म्हारी परम्परा मैं मनाही सै। जै छोरी के घर का पाणी बी पी लिया तो चौबीसी आली पंचायत जात बाहर कर देगी। अर महापंचायत बुला लेगी अक सुरते के बाबू नै अपनी बेटियां कै घर का पाणी क्यूं पी लिया?
सुरते बोल्या - थाम्बू तूं भी बेरा ना कित की बात नै कित लेग्या। मेरा मतलब था अक छोरा तो वंश चलावण आला हो सै। बिना छोरे के वंश क्यूकर चालै माणस का? थाम्बू बोल्या - जवाहर लाल का वंश कोनी चाल्या के? जवाहर लाल की बेटी थी ना इंदिरा गांधी। जिब उसके नाम तै नेहरू परिवार आवण लागर्या तो म्हारी छोरियां के नाम तै म्हारे परिवार क्यूं ना चालैंगे? थाम्बू बोल्या - फेर क्यूं कोली भर्या सै इस वंश की? ये बालक तनै सूंघैं ना अर छोरियां कै तूं जावै ना, उनके घर का पाणी पीवै ना। थारी परम्परा, थारे रिवाज, थारी मूंछ का बाल बणज्यां सैं। तो फेर मैं के करूं थाम्बू? सुरते दुखी हो कै बोल्या। थाम्बू बोलया - इन अपणे रिवाजां नै चूंघै जा अर दिन तोड़े जा। थाम्बू बोल्या अक तूं इस जमीन मां तै छोरियां का हिस्सा छोरियां नै दे दे। आड़ै दो किले बाटैं आवैं सैं उसकै, उसनै बुला ले अर आड़ै बसा ले। सुरते का पीला मुंह होग्या अर बोल्या - इसतै आच्छा तो मैं फांसी खाल्यूंगा। थाम्बू नै कम तै कम दस गामां के नाम गिणवा दिये जित छ-छ सात-सात छोरी अपने गामां मैं आकै बसरी थी। सुरता फेर बोल्या - न्यो तै म्हारे गाम मैं कई गोत होज्यांगे। फेर उनके ब्याहवां मैं रोला माचैगा। थाम्बू बोल्या - कितै कुछ ना होवै चौटाला गाम मैं तीन चार गौत सैं उनके गाम की गाम की आपस मैं ब्याह होवण लागरे तो म्हारे गाम मैं के डूबा पड़ै थी। दो-तीन दिन पहलम खबर थी अखबार मैं अक एक छोरा था उसनै ना रूजगार मिल्या कितै अर ब्याह बी कोण्या हुया। उसका तो बेटे नै मां अर बाबू दोनूआं का कत्ल कर दिया अक या प्रोपर्टी तावली हाथ लागज्या अर ब्याह होज्या। इसतै बड्डा जुलम और के हो सकै था? एक खबर या भी थी एक बिहार के किसे गाम तै 15 जवान छोरी लापता सैं। शक था अक छोरी बेचण आले गिरोह आले उननै ठा लेगे। सुरता बोल्या - म्हारे घरां तै बालक की मां न्यूं कहवै थी अक छोरी कम होगी तो आच्छा ए सै अक इनकी कीमत बधज्यागी। इबतै जला दें सैं दहेज के लोभी फेर हथेलियां पै राख्या करैंगे छोरी नै। थाम्बू नै माथे मैं हाथ मार लिया अर बोल्या - रै सुरते ये माणस सैं माणस, डांगर कोण्या, कै प्याज कोण्या अक इनकी कीमत बधज्यागी। इनपै अत्याचार बधैंगे। समाज मैं असुरक्षा का माहौल बधैगा। सुरता दुखी सा होकै बोल्या - रै जिब इसका इलाज बी बतावैगा किमै? थाम्बू बोल्या - मनै बीमारी खोल कै बता दी ईब इलाज तो गाम राम टोहवैं!

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