बुधवार, 7 दिसंबर 2016

ज्याण पाणी मैं

ज्याण पाणी मैं
अपणै एक कहावत सै अक ‘जल जीवन सै’। फेर यो इबै बेरा पाट्या अक यू जल राजनीति बी सै। जल जीवन खातर जितना जरूरी सै, राजनीति खातर बी रोजाना उतना ए जरूरी होन्ता जावण लागर्या सै। दो पड़ौसी देसां मैं इतनी तकरार नहीं देखण मैं आन्ती जितनी आड़ै दो प्रदेशां बिचालै रोज देखण मैं आवै सै। कितै कर्नाटक अर तामिल नाडू मैं लाठा बाजरया सै, कितै पंजाब अर हरियाणा लठ ठायें हांडैं सैं। जिब इसे विवाद हो सैं तो राजनीति बी गर्मा ज्या सै अर जिब राजनीति गर्माज्या सै तो उसपै नेतावां के स्वार्थ की रोटी बी सही सिकैं सैं। नेता आपणी जनता का हितैषी दिखण का कोए मौका हाथ तै नहीं जावण देना चाहन्ते। दोनों कान्ही बंद करे जावैंगे, आन्दोलन चलाया जागा अर जनता नै अपणे पक्ष में खड़या करकै चुनाव जीत जावैंगे।
जै चुनाव तै पहलम कोए पानी का झगड़ा उठ ज्यावै तै यो बहोतै घणा फायदेमन्द हो सै ज्यूकर एक बख्त मैं ताऊ देबीलाल की खातर यू साबित हुया था। फेर ईबकै एक कमाल यू हुया अक कर्नाटक अर तामिल नाडू के बीच का पानी का झगड़ा ना तै चुनाव तै पहलम उठया अर ना चुनाव के बीच मैं किसे नै ठाया। ठीक उल्टा हुया। जिब इन दोनूआं के लैक्शन हो लिए, जिब जय ललिता नैं हाथ फैंक फैंक के गाने गा लिये, जिब जाकै यो विवाद हटकै खड़या हुया सै। सारे लक्शन हो लिए, जिब सुषमा स्वराज कन्नड़ बोल के उत्तर कान्ही कोए दूसरी भाषा बोलण नै आली अर जिब हेगड़े जी इसपै अपणा गुस्सा जाहिर कर चुके अक किसेनै उसका साथ नहीं दिया। जिब जाकै यो विवाद हटकै खड़या हुया सै। सारे लैक्सनां मैं या उपलब्धि दोहराई गई अक कावेरी विवाद सुलझा दिया फेर लागै सै यो और घणा उलझ ग्या सै।
न्योंए हरियाणा पंजाब का मसला सै। ईब तै पंजाब मैं बादल अर बी जे पी की सरकार, हरियाणा मैं चौटाला साहब अर बी जे पी की सरकार अर दिल्ली मैं भी बी जे पी की सरकार तो फेर यू पाणी का फैंसला अधर मैं क्यूं लटक्या आवै सै ईब ताहिं? कीड़ी का घाट कड़ै सी अक नीम तलै। या किसी दोस्ती बादल अर देबीलाल की जो जनता के हितां तै ऊपर अपणे हितां नै राखै। कई माणस गामां मैं पाज्यांगे न्यों कैहन्ते अक देवीलाल मरण तै पहलम जै पाणी और दिवा दे तै चौटाला नै सांस आज्यागा ना तै इस लैक्शन मैं चारों खाने चित्त जागा।
ईब लोगां नै कूण समझावै अक हाथी के दान्त खावण के और हों सैं अर दिखावण के और होंसै। बिना पाणी खेती सूनी अर बिना खेती किसान सूना अर किसान सूना तै जहान सूना अर जहान सूना तो दिल का अरमान सूना, फेर घर परिवार सूना अर सूने पन नै तोड़ण खात्तर फेर दारू का सहारा कै स्मैक का लारा। फांसी खा कै मरज्या तै कहवैं आत्महत्या करग्या बिचारा, किस्मत का मारया। जिब तांहि या सोच रहवैगी जिन्दगी के बारे मैं तो काम कोनी चालै। जिन्दगी नै देखण का नजरिया बदलना पड़ैगा। मिल बैठकै पाणी का लफड़ा सुलझाणा पड़ैगा। बड्डे भाइयां ताहिं समझाणा पड़ैगा अक छोटे भाई का हक नहीं मार्या करते। इतना लाम्बा लटक लिया यू पाणी का अर एस वाई एल के खोदण का मामला। माणसां नै आस छोड़ दी पर फेर बी मां बीच कै मसकोड़ा सा मारैं सैं वोट गेरदे सै, अर सोज्यां सैं। दूध की रूखाली बिलाई बिठा राखी अर फेर पाणी की बाट देखां तो म्हारे तै बड्डा आडू. कूण हो सकै सै?
एक बात जरूर सै अक ईसा निपटारा तो करवाइयो मतना जिसा कावेरी के पाणी का करवाया था। अक फैंसला हो भी गया, अर बात उड़ै। इसतै आच्छा तो फैसला नाए होवै। ईब न्यों तो तसल्ली सै अक फैंसला कोण्या हुया सै कदे तो फैंसला होवैएगा। अर एक दूसरी बात और बी सै अक या नहर खोदे पाछै बी म्हारी जरूरत पूरी कोण्या होन्ती। म्हारी जरूरत सै 400 यूनिट की अर नहर खोदे पाछे बी हमनै 200 यूनिट तै फालतू पाणी नहीं मिलता (कुल मिलाकै - एस वाई एल तै तो 200 यूनिट मिलैंगी) यो बाकी का पाणी 200 यूनिट बचग्या इसका जिकरा कोए नहीं करता। अर म्हारे बुद्धिजीवी भी बेरा ना के जमाल घोटा सा पीरे सैं अक उननै इसी बातां पै सोचण की फुरसतै कोण्या। आज सोचां अर कै काल सोचां इन बातां पै सोचना तो पडै़एगा।

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