आपाधापी घणी मचाई देस के ठेकेदारां नै
सारी दुनिया नै जो विकास की राही पकड़ी उस करकै अमीर तै और घणा अमीर होग्या अर गरीब और घणा गरीब होन्ता आवै सै। सारे न्यों कहवैंगे अक यो तै किस्मत का खेल सै ऊपर आला किसे नै राजा तै रंक बणा दे अर रंक नै राजा। हर बात की किस्मत कै गांडली बांध कै सोवण के आदि होगे हम भी अर अपणे दिमाग पै तो माड़ा सा भी जोर देकै राज्जी कोन्या अक यो इस दुनिया मैं होवण के लागरया सै? शहीदां के बालक तै खस्ता हाल सरकारी स्कूलां मैं धक्के खावैं सैं अर मुखबिरां के बालक एयरकंडीशंड घर मैं रहवैं, एयर कंडीशंड बस मैं एयर कंडीशंड स्कूल में पढ़ण जावैं। अर इस सारे घालमेल नै फेर किस्मत का खेल बतावैं अर हम बी उनकी गेल्यां मिलकै हां मैं हां मिलावैं तो म्हारे तै निरभाग कौण होगा? काले बाजारियां की किस्मत मेहनतकश किसान तै बढ़िया लिखण आले भगवान की बी नीयत पै सवाल तो उठै ए सैं फेर हम सवाल ठाणा तो भूले गए। विकास की खामियां नै किस्मत के जिम्मै छोड्डें काम कोणी चालै। सच ही कहा है किसी कवि ने -
आपाधापी घणी मचाई देस के ठेकेदारां नै,
सारे रिकार्ड तोड़ धरे धन के भूखे साहूकारां नै।
विकास राही माणस खाणी इनै रोजगार घटाया सै,
महिला जमा बाहर राखी ईसा महाघोर मचाया सै,
बाबू बेटा ज्यानी दुश्मन बहू सास मैं जंग कराया सै,
बूढ्यां की तै कदर कड़ै जिब जवानां का मोर नचाया सै,
माणस तै हैवान बणा दिये सभ्यता के थाणेदारां नै।
ईसा विकास म्हारा नाश करैगा या बात क्यों जरती ना,
गरीब अमीर की या खाई आज क्यों दुनियां मैं भरती ना,
चारों कान्हीं माफिया बधगे या बुराई आज डरती ना,
अच्छाई पै हमला कसूता फेर बी कदे या मरती ना,
बदेशी कम्पनी छागी छूट दे राखी राज दरबारां नै।
यो कौण दादा पाक गया सारे कै आतंक मचाया सै,
थोड़ा सा साहमी बोल्या इराक पढ़ण बिठाया सै,
यूगोस्लोविया पै बम्ब गेरे यो कति नहीं शरमाया सै,
तीसरी दुनिया चूस लई भारत मैं जाल बिछाया सै,
बदेशी अर देशी डाकू सिर चढ़ा दिये सरकारां नै।
उल्टी राही चला दई म्हारे देश की जनता किसनै रै,
सोच समझ कै बेरा पाड़ां देश तै भजावां उसनै रै,
इस विकास राही नै बदलां मोर बनाया जिसनै रै,
म्हारा ईसा विकास हो जो मेटै सबकी तिसनै रै,
दीन जहान तै खो देगी या जनता इसे बदकारां नै।
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