तमनै बेरा सै के ?
एक दिन नत्थे सिंह कै घरां फत्ते अर सत्ते बैठे बात करैं थे। सरला नत्थे की पत्नी अर कमला नत्थे की बाहण भी बातचीत मैं शामिल थी। बात मुसलमानां पै चाल पड़ी। नत्थे सिंह बोल्या - आज हिंदू-मुसलमान मैं दूरी बहोत घणी बढ़गी। या आच्छी बात कोण्या। सत्ते बोल्या - इन मुसलमानां नै तो पाकिस्तान के बाडर तै परले कान्हीं छोड़ कै आवणा पड़ैगा। नत्थे सिंह बोल्या - सत्ते या तेरी बात ठीक कोण्या। जो म्हारे देश के दूसरे देशां मैं जाकै बसरे सैं जै उनकै कोए धक्का मारण लागै तो तनै किस्सा लागै? अर ये मुसलमान तो कई पीढ़ियां तै म्हारे देश मैं बसरे सैं। सरला बोली - सत्ते तूं तै मेहर सिंह फौजी का फैन सै फेर उसकी बी मुसलमानां मैं गहरी दोस्ती बताई अर उसनै एक सांग हिंदु मुसलमान छोरा छोरी के ब्याह पै भी लिख्या था जिसमैं उसनै दोनुआं के ब्याह की हिम्मात करी थी। सत्ते बिफर पड़या। ना या बात झूठी सै। सरला बी करड़ी होकै बोली - झूठी क्यूंकर सै? एक बर मेहर सिंह फौजी की भाभी फेटी थी मनै उसनै बताई थी ये बात अर फेर फौजी मेहर सिंह स्मारक समिति बरौना नै एक किताब मैं या बात छापी। सत्ते बोल्या - मेहर सिंह तो हिंदू बिचारां का माणस था। कमला बोली - फेर हिंदू अर मुसलमान मैं यारी दोस्ती नहीं हो सकदी के? उनमैं ब्याह शादी नहीं हो सकदे के? अर मेहर सिंह नै जो गीत रागनी इस किस्से के बणावण मैं लिखे वे भी झूठे सैं के?
सरला नै एक बै फेर चोंहटकी भरी सत्ते कै अर बोली - फौजी की भाभी तो न्यों भी बतावैं थी अक ओ कसूता होक्का बिगाड़ था। जिसकै जान्दा उसका ए हुक्का पी लिया करदा। सत्ते तै ईब नहीं रहया गया अर बोल्या - भाभी इतनी गलत बात फौजी के बारे मैं कहना बहोतै गलत बात सै। वो इसा कति नहीं था। वो तै ठेठ जाटराम था। वो हरिजनां का हुक्का क्यूंकर पी सकै था? नत्थे बोल्या - या सरला बेरा ना उल्टी-उल्टी बात कड़े तै टोह ल्यावै सै। सत्ते बोल्या - ये बात तो चाहे साच्ची भी हो तो भी जंचण की कोण्या। कमला बोली - ईब थारे बरगे आडु.आं का कोए के कर सकै सै जो साच्ची बात नै भी मानण नै त्यार कोण्या। फत्ते बोल्या - विश्वास भी तै कोए चीज हो सै। म्हारे या साच्ची बात बी गलै कोण्या उतरै अक मेहर सिंह छुआछूत मैं यकीन नहीं कर्या करदा। म्हारा विश्वास तै यो सै अक ओ पक्का जाट था। सरला - तो ओ छुआछात के खिलाफ कोण्या हो सकता? जित ताहिं मनै बेरा सै चौधरी देवीलाल नै तो मुजायरां के हक मैं पूरा आंदोलन लड़या था। अर चौधरी चरण सिंह जिसनै जाटां का मसीहा कहवैं सैं उसके बालकां के ब्याह दूसरी जात्यां मैं हुए थे। फत्ते बोल्या - क्यूं झूठ भकाओ सो म्हारा चौधरी इस ढाल के काम होवण दे था के? सरला बोली - हाथ कंगण नै आरसी के अर पढ़े लिखे नै फारसी के। चौधरी अजीत सिंह नै एक चिट्ठी लिख कै बूझ ले अक उसकी बाहणा के ब्याह कित कित हुए थे सारा बेरा लाग ज्यागा। फते बोल्या - चिट्ठी के परसों रोहतक आवैंगे जिब बूझूंगा। अर जै ये बात झूठ पाई तो थारा जलूस काढूँगा। सरला बोली - बात तो म्हारी साच्ची सै बाकी हरियाणे के चौधरी औरतां का जलूस तै बेरा ना कद अर किस बात पै काढ़ कै खड़े होज्यां या बात न्यारी सै। यो जलूस तो तम म्हारा ऊं भी काढण लागरे सो। फेर एक बै बेरा जरूर पाड़ लिए। फत्ते कै बड़ा झटका लाग्या। उसके दिमाग मैं मेहर सिंह फौजी की जो छवि थी निखालस जाट की वा खिंड-भिंड होगी अर एक छत्तीस जात का हिमायती साहसी आ खड्या हुया जो मजहब मैं भी विश्वास नहीं करै था। इसे ढाल उसके दिमाग मैं चौधरी चरण सिंह की छवि मैं भी हलचल होगी अक उनके बालकां के दूसरी जात्यां मैं ब्याह क्यूंकर होण दिये।
हो सकै सै म्हारे थारे मां तै भी कइयां कै झटका लाग्या हो इन बातां के बेरा लागे पाछै। पर इस बात पै विचार जरूर करियो अक फौजी की पहली छवि बढ़िया थी अक दूसरी छवि बढ़िया सै? अर चौधरी देवीलाल म्हारा ताऊ भी मुजारयां के हकां खात्तर खूब लड़या था इसमैं भी कति झूठ कोण्या। ये तीनों व्यक्तित्व फौजी, ताऊ अर चौधरी चरण सिंह ये जात तै ऊपर उठे औड़ व्यक्ति थे तम चाहे मानो अर चाहे मत मानो।
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