सोमवार, 17 जुलाई 2017

एन्काउंटर अक दिन धौल़ी खून

एन्काउंटर अक दिन धौल़ी खून
आज की तारीख 28 जून 2004 ताहिं इशरत जहान की गेल्यां जो बणी उसके बारे मैं कुछ सवाल सैं जिनका ईब ताहिं कोए तसल्ली बख्स जवाब नहीं आ लिया। यो गुजरात के मुख्यमंत्री पर तीसरा जानलेवा हमला बताया गया। फेर असली कहानी के सै या एक पहेली बणगी जिसके जवाब टोहवणे बहोत मुश्किल सैं। सबतै पहलम तो गुजरात की पुलिस खातर कई सवाल सैं। पहलम सवाल सै अक जै चारों मुंबई तै आवण लागरे थे तो वे हाईवे पै ए क्यों ना दबोचे पुलिस नै? वे पोटारपुर हाईवे तै 20 किलो मीटर भीतर नै क्यूंकर पहोंचे? अर क्यों पहोंचे? दूसरा सवाल सै अक आईबी की देखरेख मैं काम करणिया एंटी टेरेरिस्ट स्कवैड नै इस एन्काउंटर ताहिं क्यों नहीं अंजाम दिया। इस एनकाउंटर नै करण आली पुलिस की क्राइम ब्रांच क्यूं थी जबकि इसकी पोस्टिंग राजनैतिक स्तर पै होवैं सैं। तीसरा सवाल यू सै अक जिब इशरत के आतंकवादी होवण पै सवाल ठाये गए तो एक दम चाणचक दे सी उसकी डायरी पुलिस धोरै किततै आगी? चौथा सवाल यू सै अक आतंकवादियां तै बहोत ऊंचे के दर्जे कै हथियार थे फेर बी एक बी पुलिसियां कै खरोंच तक न आई? न्यों कहवैं सैं आतंकवादियां नै 37 राउंड करे, फेर उनकी गोली हवा मैं क्यूंकर चाल्लें गई? आतंकवादियां की कार पै साहमी तै गोली चलावण के निशान कोण्या बल्कि कार पै पाछै तै गोली चलावण के निशान सैं। दूजी कान्हीं चारों आतंकवादियां कै साहमी तै गोली चलाए जावण के निशान सैं। मोदी साहब नै गुजरात मैं इसी गोली इजाद कर ली के जो चलाई तो पाछै तै जावै फेर लागै आगै जाकै।
इसतै आगै इशरत की मां की खातर कुछ सवाल सैं। इशरत की मां शमिना नै जून 15 नै तो यू ब्यान दिया कि इशरत किसे रिश्तेदार कै जारी सै पर पाछै उसनै अपणा ब्यान क्यूं बदल दिया अक इशरत तो नौकरी के इन्टरव्यू खातर मुम्बई जारी सै। जै इशरत भाज कै जारी थी कै बिना बताए जारी थी तो उसकी मां नै इस बाबत पुलिस मैं रिपोर्ट क्यूं ना दर्ज करवाई। इशरत की मां नै या झूठ क्यूं बोली अक वा जावेद नै कोण्या जानती जबकि जावेद कई साल मुम्बई मैं उनका पड़ौसी था।
फेर नंबर आवै सै इशरत का। इशरत बार-बार दो तीन दिन खातर अपणे घर अर अपणे कालेज तै क्यूं खिसक जाया करती? दूसरी बात इशरत अहमदाबाद क्यूं गई अर जावेद शेख की गेल्यां ही क्यूं गई? इस जावेद शेख का अपराधी चरित्र सै इसका बेरा था। इशरत बरगी निचले स्तर मध्यम वर्ग की छोरी-धोरै रोज की एसटीडी फोन काल करण खातर 400-500 रुपये किततै आया करदे? इशरत अर उसकी मां जावेद खान धोरे पुणे मैं के करण गई थी। न्यों कहया गया सै अक वे उड़ै उसके धोरै ठहरी बी थी। इशरत अर जावेद इन दो और आतंकवादियों की गेल्यां क्यूं जावण लागरे थे?
आखिर मैं बचग्या जावेद शेख। जावेद शेख के तीन नाम क्यूं थे। जावेद गुलामाली शेख, पनेश कुमार पिल्ला और सैय्यद अब्दुल वहीद? उसके धोरै बाहकुला के ह्यूम स्कूल का सर्टिफिकेट मुस्लिम नाम तै क्यूंकर आया जबकि जब ताहिं तो उसनै अपना मुस्लिम नाम धारणै कोन्या करया था। एक गरीब मध्यम वर्ग परिवार के बालक धोरै नब्बे हजार की मोटर साइकिल अर अपनी इंडिका कार कड़ै तै आई? उस धोरै दो पासपोर्ट क्यूंकर आये? एक पासपोर्ट कोचीन तै ईशू करया गया अर दूसरा मुंबई तै। जै जावेद नै इस्लाम धर्म धारण कर लिया था तो उसनै पुणे के आरटीओ ताहिं मार्च 2001 मैं अपणा ड्राइविंग लाइसैंस बणवावण खातर हिंदू नाम क्यूं दिया? अर उसनै अपना झूठा पता क्यूं दिया?
एक बात तो साफ उभर कै आवण लागरी सै अक हम जै लोगां नै इतना दुखी कर दयांगे अक वे सूसाइड स्कवैड बणज्यां तो इन कोए कितना ए बड्डा नेता हो उसकी हकीकत जनता कै साहमी तो आवणी चाहिए। आई किमे बात समझ मैं? न्यों कैह देंगे जिब हम के करां? कोए नेता गाम मैं आवै तो बूझां अक उसका इन सवालां पै के कहणा सै?

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