ईब तो जाग जाओ मेरे भाण-भाइयो!
गाम में सत्ते, फत्ते, नफे, सविता, कविता अर धापां ताई। बीते लैक्शनां म्हं नेतावां की झूठी साच्ची बातां नै सुणकै बहोत दुखी हुए अर आपस मैं बतलाये कि एक बर सारी दुनिया के, शिक्षा के, म्हारी आर्थिक हालत के, इस वैश्वीकरण के बाद के म्हारे विकास के, विदेश ब्यौपार के, मानव विकास सूचकांक, महिलावां की हालत, स्वास्थ्य रोजगार, कीमतां की बढ़ोतरी, ग्रामीण विकास आदि पै आंकड़े कट्ठे करकै ल्यावैंगे अर ग्राम सभा करकै उनके साहमी धरैंगे? सबनै अपणी अपणी जिम्मेदारी ले ली। ग्रामसभा हुई। चौपाड़ न्यूं खचाखच भरी थी। सबतै पहलम सत्ते बोल्या - सारी दुनिया नै मिलाकै सालाना आय सै 5120 डालर अर भारत मैं प्रति व्यक्ति सालाना आय सै 560 डालर। दुनिया मैं भारत का स्थान 162वां (29 देश भारत तै तलै सैं)। सुरता बोल्या - तूं ये आंकड़े कड़ै तै ल्याया? ये तो कोरी बकवास सै। सत्ते बोल्या - ये आंकड़े वर्ल्ड डैवलपमैंट इंडीकेटर-2003 तै ल्याया सूं। अर और सुणले सुरते - सबतै गरीब 20 प्रतिशत का राष्ट्रीय आय मैं हिस्सा सिर्फ 8.1 फीसद सै अर सबतै अमीर 20 प्रतिशत का राष्ट्रीय आय मैं हिस्सा 46.1 फीसद सै अर ये आंकड़े मानव विकास रिपोर्ट 2003 के सैं। कहवै तो रिपोर्ट बी ल्या कै दिखाऊं।
सरिता नै अपणी बात शिक्षा पर कही अर वा न्यों बोली - भारत मैं दुनिया की आबादी का 16.8 फीसद रहता है पर दुनिया के वयस्क निरक्षरां मैं तै 34 फीसदी भारत मैं सैं। 94 विकासशील देशां के शिक्षा सूचकांक मैं भारत का स्थान 76वां सै। तृतीयक (टरसरी) स्तर की शिक्षा मैं प्रवेश का अनुपात दुनिया भर मैं 23 फीसद सै अर भारत मैं यो 10.5 फीसद सै। सुरते फेर बोल्या - तूं कित तै ल्याई सै ये आकड़े? सरिता बोली - यूनेस्को की रिपोर्ट, एजूकेशन फार आल 2003-2004 मैं तै ल्याई सूं मेहनत करकै नै। अर सुणल्यो भ्रष्टाचार सूचकांक के हिसाब तै दुनिया के 102 देशां मैं भारत 71वें स्थान पै सै। सिर्फ 31 देश सैं जो भ्रष्टाचार मैं भारत तै भी आगे सैं? यू आंकड़ा ट्रांस्पेरैंसी इन्टरनेशनल की रिपोर्ट 2003 तै लिया गया सै। ईबी कोए शक सै कि सूरत सिंह जी इन आंकड़यां के बारे मैं?
कविता की बारी आई अर वो बोली - विदेशी ऋण का बोझ भारत पै 1998-99 मैं 9823 करोड़ डालर था जो 2003 जून ताहिं बधकै 10,960 करोड़ डालर पै पहोंच लिया। 1998 मैं 31 मार्च ताहिं देश के धनवानां पै बकाया कर 47,444 करोड़ रुपये था जो 2002 के 21 मार्च ताहिं बधकै 86,342 करोड़ रुपइये होग्या। ये सारे आंकड़े मनै आािर्थक सर्वे 2002-03 तैं कट्ठे करे सैं। कम तै कम म्हारे नेता जिब गाम मैं आवैं तो इन बातां पै उनका के कैहणा सै, हमनै बूझणा तो चाहिए। फत्ते कई बार का मसकोड़े मारै था, उसका नम्बर आया तो उसनै बताणा सरू करया - म्हारे बरगे 62 देशां के सूचकांक के आधार पै विश्वीकरण की कटारी चाले पाछे के विकास का जिकरा सुणल्यो। इन देशां मैं दुनिया की 84 फीसदी आबादी रहवै सै। 2001 मैं भारत का स्थान 49वां था अर 2002 मैं यो 57वां होग्या अर 2003 मैं यो 61वां होग्या। सुरते कै बेरा ना आज के होर्या था फेर बोल्या - सारी काट करोगे अक किमै अच्छी बात बी बताओगे? फत्ते बोल्या - पहलम म्हारी सुणले अर फेर तूं अपणी काम्मल बात भी बता लिये। हां तो भारत का विदेश व्यापार घाटा - 1885 करोड़ डालर सै अर यू एशिया का सबतै फालतू घाटा सै। मानव विकास सूचकांक के हिसाब तै 2001 मैं भारत का स्थान 173 देशां मैं 115वां था, 2003 मैं यू 127वां होग्या। देख्या म्हारे भारत की तरक्की का दौर।
फेर सविता का नंबर आया तो वा बोली - हो तो तमनै बहोत वार हो गई ये बात सुणतें फेर दो च्यार बात मेरी बी सुण ल्यो। हर 54 मिनट मैं एक महिला की साथ बलात्कार होवै सै, हर 26 मिनट मैं एक महिला की गेल्या जोर जबरदस्ती करी जावै सैं। जचगी मैं महिलावां की मृत्यु दर हर एक लाख जिंदा प्रसवां पै दुनिया भर मैं 400 अर भारत मैं 540 सै। म्हारे कम वजन के बालक जनमैं सैं 26 प्रतिशत पर दुनिया मैं ये 14 फीसद सैं। अपणे गाम मैं बी देख सकां सां महिलावां की जो हालत सै। आई ग्राम सभा कै किमैं बात समझ मैं कि नहीं? जिब ताहिं हर बैठक मैं हर हुक्के पै, हर घर मैं, हर पनघट पै इन बातां पै चरचा नहीं होगी इतनै म्हारी न्योंए खाल तारी जागी। इन बातां नै सब ताहिं पढ़कै सुणाइयो मेरे भाण अर भाइयों।
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