मंगलवार, 18 जुलाई 2017

थम कदसिक सोच्चोगे मेरे बीरा!


विश्व व्यापार संगठन की दाब मैं म्हारे देश मैं लागू करी गई कृषि नीतियां के कारण हरियाणा के किसान बर्बाद होवण लागरे सैं। फांसी खाकै, सल्फास की गोली खाकै, भूख अर बीमारी करकै ज्याण खपावण लागरे सैं। जिब कर्जा उल्टा नहीं हुया तो बैंकां नै किसानां की जमीन की खुली नीलामी का एलान कर दिया। पाकिस्तान तै 12 लाख टन का आयात करया गया जिस करकै भारत का चीनी उद्योग चरमरा गया अर सरकार का ब्यौंत गण्डे की कीमत का भुगतान करण का बी कोण्या रहया।
खेती जगत मैं सार्वजनिक निवेश पाछले एक दशक मैं 33 प्रतिशत घट कै 23 प्रतिशत रैहग्या अर पहली पंच वर्षीय योजना मैं कृषि क्षेत्र का 34.5 प्रतिशत अलाटमैंट का हिसाब ईब बस 18 प्रतिशत रहग्या। डंकल प्रस्ताव पाछै अमीर देशां की दाब मैं भारत मैं सब्सिडियां मैं भारी कमी कर दी गई। सरकार किसानां नैं न्यूनतम समर्थन मूल्य देवण तै अर इस कीमत पै सरकारी खरीद करण तै भी मोक मारगी। इसकी साथ-साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली का भी भट्ठा बिठा दिया। साल 2000 मैं जड़ै जापान मैं 72.5 प्रतिशत, कोलम्बिया मैं 54 प्रतिशत, दक्षिणी कोरिया मैं 61 प्रतिशत, यूरोप मैं 37 प्रतिशत, चीन मैं 34 प्रतिशत, अमरीका मैं 29 प्रतिशत, पाकिस्तान मैं 26 प्रतिशत कृषि क्षेत्र ताहिं सब्सिडियां दी गई उड़ै भारत मैं सबतै कम 3 प्रतिशत सब्सिडी दी गई। म्हारी किसानां की हितैषी सरकार। कृषि उत्पादन पै इस असमान लागत के चालते दुनियां के बाजार मैं भारत का निर्यात 1996 मैं 6.83 अरब डालर प्रति वर्ष तै घटकै 1999 मैं 5.97 अरब डालर रैहग्या। 64 प्रतिशत लोगां नै रोजगार देवण आले कृषि क्षेत्र का देश के सकल घरेलू उत्पाद का हिस्सा 34.5 प्रतिशत तै घटकै 18 प्रतिशत रैहग्या। सौका जोड़ यो सै कि आयात करकै फसलां के भाव गिरगे, कृषि मैं उत्पादन लागत बधगी, कृषि मैं बचत घटगी अर इस करकै किसानां पै करज का बोझ बढ़ता जावण लागरया सै। खाद, डीजल, कीड़े मार दवाई, बीज, बिजली अर सिंचाई के रेटां मैं बिना लगाम की बढ़ोतरी अर प्राकृतिक आपदावां के कारण किसानां की आर्थिक हालत तेजी तै बिगड़ती जावण लागरी सै। वी.पी. सिंह की सरकार के बख्त का डी.ए.पी. का कट्टा 180 रुपइये की जागां 450 रुपइये, यूरिया का भा 117 रुपइये की जागा 250 रुपइये अर 5 रुपइये प्रति लीटर आला डीजल 20 रुपइये लीटर हो लिया। दूसरे कान्हीं कपास, गण्डा, बाजरा, ग्वार अर सरसों के भा पाछले के मुकाबले मैं कम होगे। 1990 मैं 10 हजार रुपइये ताहिं के कर्जदार किसानां ताहिं 13 हजार करोड़ रुपइये के कर्ज का अन्दाजा लाया गया। ये कर्जे माफ कोण्या करे। दूजे कान्ही पाछले साल यू.टी.आई. घोटाले मैं लूट्या गया 11,500 करोड़ रुपइया म्हारे प्यारे बाजपेई जी की सरकार नै ओट लिया। गन्डे का बकाया देवण मैं भी हांगा लागै सै। सरकारी अर सहकारी बैंकां की किसानां ताहिं कर्ज देवण तै इन्कारी के चालते मझोला अर गरीब किसान, खेत मजदूर अर ग्रामीण कारीगर सूदखोरां ताहिं 24 रु. तै 60 प्रतिशत तक का वार्षिक ब्याज पै कर्जा लेवण नै मजबूर सैं। इननै उल्टा करण का ब्यौंत किसका सै? जमीन नीलाम करण के फैसले होगे थे पाछै सी। वारंट तो बहोतै किसानां के कट लिए। सिरसा मैं 400 किसान गिरफ्तार करे गये थे कर्जा उल्टा ना करण के कारण अर फूलका गाम का 72 साल का किसान बीरबल 31 दिन जेल मैं रैहकै दम तोड़ग्या बताया। सिरसा जिले के तखतमल गाम के 25 बरस के नौजवान किसान जसपाल सिंह नै इसे कर्जे करकै आत्महत्या करनी पड़ी बताई। हरियाणा को-आप्रेटिव सोसायटीज एक्ट की धारा 184 मैं सै यो प्रावधान कि जो कर्जा वापसी नहीं करै, उसनै ठाकै जेल भेज द्यो। टाटा बिड़ला बरगे अमीरां नै बैंका धोरै 65000 करोड़ रुपइये का कर्ज लिया अर ईब देन्ते ना। उनके खिलाफ तो कदे वारन्ट जारी नहीं करे गये। क्यूं? इस क्यूं का जवाब टोहवण खातर थोड़ा सोचना पड़ैगा। सोचण मैं थामने परहेज सै मेरे बीरा।
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