मंगलवार, 18 जुलाई 2017

योह के बणी मेरे राम !

योह के बणी मेरे राम !
आदरयोग वेंकैया जी! सादर संवेदना। न अत्र कुशलम् न तत्रास्तु। इन लैक्शनां मैं म्हारी जो गत बणी सै उसनै थाम नहीं जाणोगे तो कौन जाणैगा। जोर का झटका लाग्या अर ओ बी सहज दे सी। फेर बी अभूतपूर्व तै भूतपूर्व बणण के बख्त मैं, म्हारे प्यारे अटल जी नै बहोत पते की बात कही सै कि हार जीत तो होन्ती ए रहवै सै। ऊपर आले नै बी कहवैं सैं हरेक बीज की जोड़ी बनाई सै ज्यूकर दिन की गेल्यां रात सै, खुशी की गेल्यां गम सै, अंधेरे की साथ रोशनी सै। हार की गेल्यां जीत सै। सही बात सै, उदय की अस्त बी सै। फेर इंडिया शाइनिंग की गेल्यां के सै? अर फील गुड का जोड़ीदार के होगा? खैर फीलगुड बेशक फेल होग्या हो फेर हम फेल थोड़े ना हुये सां। थामनै टायर्ड कै रिटायर्ड होवण की कोए जरूरत नहीं सै। ढाल ढाल की बात करैंगे लोग। अपणी पार्टी आले बी बेरा ना के-के कहवैंगे पर काल्ली माणण की कोए जरूरत नहीं सै।
हम गाम मैं हुक्के पै बैट्ठे बतलावां थे अक एक बात म्हारी समझ मैं कोण्या आई। आखिर यो जहाज क्यूं डूब्या? के कसर कड़ै सी रैहगी थी? आपां नै तो जुगाड़ करण मैं कोए कसर नहीं छोड्डी थी। इकलौते नेता का जुगाड़ बनाया, चुनाव तै पहलम का अर चुनाव तै बाद के गठबंधन का जुगाड़ था, मीडिया का जुगाड़ था, सर्वेक्षणां का जुगाड़ बठाया, साड़ियां का जुगाड़ अर गाड़ियां का जुगाड़ था, नेतावां अर अभिनेतावां का जुगाड़ करया, सास का जुगाड़ था बहु का जुगाड़ था। हैलीकाप्टरां, हवाई जहाजां, रेलगाड़ियां, कंप्यूटर, टेलीफोन, वीडियो सब क्याहें का कसूता नेगजोग बठाया था। असली अर नकली नामां तै विज्ञापनां का जुगाड़ बी था। विदेशी मूल के मुद्दे का पूरा का पूरा जुगाड़ भिड़ाया था। देश मैं स्थिरता चाहिए इस बात का पूरा प्रबंध करया। विकास की गेल्या मोदीत्व के योग का, त्रिशूल की गेल्यां तुर्की टोपी का, मंदिर की गेल्यां शाही इमाम के फतवे का जुगाड़ करया। बुश बरगे खिलाड़ियां गेल्यां बी जुगाड़ बिठाया था, महाजन बरगे महारथी म्हारी साथ थे।
इसी के कसर रहगी कि खड़े-खड़े कुर्सी खाली करणी पड़गी? किसे दावे, मुकदमें, शिकायत कै बहस की बी नौबत कोण्या आई। मनै इसा लागै सै अक म्हारे आंडी खिलाड़ी म्हारी पब्लिक गेल्यां जुगाड़ बिठाणा भूलगे। कमाल की बात सै म्हारे देश के ठेठ देशी नेता म्हारे देश की जनता गेल्यां जुगाड़ नहीं बिठा पाये अर गच्या खागे। या बात तो जग जाहिर सै अक या भोली सूरत आली पब्लिक घणा सा भरोसा करण लायक कोण्या। या शक्ल तै भोली दीखै सै पर सै परले दरजे की घाघ।
जितना कहणा होगा उड़ै हां कहवैगी अर हां कहणा होगा उड़ै ना कहवैगी। चुपचाप आंख मूंद कै दड़ मारकै पड़ी रहवैगी जणू तो कसूती नींद मैं सै। कार मैं किसे की मैं बैठेगी, दोफारे का भोजन किसे और के भंडारे मैं करैगी अर आखिर मैं वोट किसे और कै गेर देगी। बड़ी धोखेबाज जनता सै। म्हारी रैलियां मैं खूब आई, नाड़ हिला हिला कै हां भरी, म्हारे नारे लाये। फेर म्हारी खातर एक छोटी सी वोट देवण नै सिर कट्या उसका। एक वोट देवण मैं इतने नखरे दिखाये कि बूझो मतना। सरकार नै हरावण के खेल मैं बेरा ना इसनै के मजा आवै सै। आगली बरिया इन धोखेबाज जनता की खातर बी जुगाड़ बिठाणा पड़ैगा ज्यूकर एक बै अयोध्या का जुगाड़ बिठाया था अर दूसरी बरियां कारगिल का जुगाड़ बिठाया था। बिना कुर्सी रहया कोण्या जावै ईब। तावले से किमै जुगाड़ करो कि यूपीए मैं लठ बाज ज्यां अर म्हारे सूत आज्या। थोड़े लिखेनै ज्यादा समझियो। बाकी थाम खुद बहोत समझदार सो। कांग्रेस की गेल्यां यू लेफ्ट बी आग्या इसका खास जुगाड़ करणा पड़ैगा।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें