सोमवार, 17 अक्टूबर 2016

बदलता हरियाणा

बदलता हरियाणा
म्हारे बड्डे-बडेरे बतागे अक बाजे भगत तै सांग करया करता गामां मैं अर साथ मैं भगत फूल सिंह गुरुकुल खानपुर खातर चन्दा मांग्या करता, जिब जाकै यू गुरुकुल परवान चढ्या था। बाकी के स्कूल बी लोगां के चन्दे तै बनाए गए बताए। बाजे भगत नै हरिजनां की कई चौपाड़ सांग करकै पीस्सा कट्ठा करकै बनवाई बताई। जड़ या बात सै अक हारी-बीमारी मैं, ब्याह-शादी मैं लोग एक-दूसरे की मदद पै आ जाया करदे। माणस नै माणस की लिहाज-शरम हुया करती। बुलध के पां मैं फाली लाग जात्ती तो हाली नै इसा महसूस हुया करदा जणों तै उसके अपने खुद के पां कै लागगी फाली। कोए उल्टी-सीधी बात करदा तो च्यार माणस उसनै टोकणिया पा जाया करदे।
हरियाणा मैं कुछ साल पहलम ताहिं खेतां के डोल्यां पै शीशम खड़ी पा ज्याया करती। इनकी छां बी बढ़िया अर खेती मैं बी नुकसान ना। हलाई काढ़ कै हाली शीशम की छां मैं बैठ के जोटा लाया करता। इसकी लाकड़ी बी काम्मल बताई। शीशम के इतने फायदे अर फेर बी शीशम खत्म होत्ती जावण लागरी? हरियाणा विज्ञान मंच हर साल बाल विज्ञान कांग्रेस करदा बताया। कैथल के बाल वैज्ञानिकां नै एक सर्वे करया था कुछ साल पहलम जिसमै उननै इन शीशमां के खतम होवण के कारणां की तह मैं जावण की कोशिश करी थी। इसे ढाल बालकां नै एक सर्वे मैं देख्या अक गिद्धां की संख्या तेजी से घटदी जावण लागरी सै। इसके कारण बी टोहे। मरे औड़ गिद्ध कोन्या पाये उननै। अन्दाजा यू लाया अक खेती मैं जो कीटनाशक इस्तेमाल करे जावैं सैं वे पशुआं की मांसपेशियां मैं (पुठ्यां) मैं जमा होत्ते रहवैं सैं। पशु नै तो जो नुकसान हौवे सो होवै। इनका मांस जिब गिद्ध खावैं तो उनकै भी प्रजनन शक्ति पै उल्टा असर पड़ै सै अर इस कारण गिद्ध नपुंसक होगे अर उनकी संख्या घटगी। पाछै सी खबर थी अक कई जगां पै मोर मरे पाये गये। इसका कारण भी कीटनाशक दवाइयों के नेड़े-धोरै बताया वैज्ञानिकां नै।
भैंसा कै टीका लाकै दूध काढणा आम बात होगी। फेर इस टीके मैं जो दवाई सै ऑक्सीटोसिन उसके दुष्प्रभावां तै बेखबर सैं हरियाणा के लोग। सुण्या सै पेट की खराबी अर जवान गाभरूआं मैं नपुंसकता इन्हें कारणां तै बढ़त पै सै। पाणी मैं भी रमगे ये कीटनाशक, धरती मैं रमगे अर रमगे माणसां मैं भी। हरित क्रान्ति आई गेल्यां बीमारी नै बी ल्याई, पाणी धरती-माणस की इनै रेल बनाई। एक खास बात और सै ऊं तो कहवै अक म्हारे बेदां मैं महिला ताहिं ‘देवी’ का स्थान दिया गया सै। फेर इस ‘देवी’ नै एक कान्ही तो पेट मैं ए निबटा देवैं सैं अर दूजे कान्हीं पांच-पांच हजार मैं खरीद कै ल्यावैं सै कदे आसाम तैं, कदे बिहार तैं, कदे बंगाल तै। ज्यूंकर बाकी कामां की खातिर ‘बिचौलिये’ सैं म्हारे गामां मैं न्योंए इस काम की खातिर बी बिचौलिये पैदा होगे। अस्पतालां मैं कै तो दवाई नहीं अर दवाई सै तो डाक्टर नहीं, डाक्टर बी सै तो कम्पाउण्डर नहीं। स्कूलां का हालै मतना बूझो। जो स्कूल चन्दे गेल्यां बनाये थे वे ढहो चाहे रहो किसे नै कोए चिन्ता कोन्या। अैहदी पणे की हद होगी। नहरी पाणी गांम की खेती खातर ‘लाइफ लाईन’ बताया। रजबाहे तै जो नाला इन खेतां मैं पाणी ल्यावै सै उसकी खुदाई बी तीन-तीन च्यार-च्यार साल कोन्या करदे हाम।
ये सारी बात गहराई तै सोच्यण की सैं। बेरा ना गामां म्हं इन बातां कान्ही ध्यान गया सै कि नहीं गया सै। जिन गामां का मनै बेरा सै उड़ै तो इन बातां की कोए चर्चा नहीं। फेर इसी बातां कान्हीं उनका ध्यान क्यूंकर जावै? गाम आल्यां नै ताश खेलण तै फुरसतै कोन्या। कोए कट्ठे करण ताहिं बुलावै बी तो न्यों कहवैंगे - गेर रै गेर पत्ता गेर। आवां थोड़ी सी वार मैं। थाम शुरू करल्यो। फेर मजाल सै जै ताशां नै छोड कै दो बात किसे की सुणलें।
गाम म्हं छोरियां गेल्यां छेड़खानी की वारदात बधण लागरी सैं इनका किसे कै कोए खाता नहीं। जड़ बात या सै अक गाम काल उजड़ता आज उजड़ जाओ फेर किसे नै चिन्ता नहीं दीखती। सांझ नै दो घूंट लाकै इसनै गाल दे उसनै गाल दे। घरआली कै ऊपर छोह तार लें अर फेर बिना खायें पड़कै सोज्यां। दारू की मार तै कोए घर तो बच नहीं रहया माणस बेशक बचरया हो। पहलम तो आदमी ए हुक्का पीया करदे ईब तो कुछ औरत बी हुक्टी पीवण लागगी कै बीड़ी फूंकती पा ज्यांगी। कुछ गामां की तो रिपोर्ट या बी बताई अक दो-दो च्यार-च्यार औरत बी दारू का सेवन करण लाग्गी सैं। खांसी के शिकार लोग-लुगाई अस्पतालां मैं लुटते हांडै सैं। टीबी अर दमे की बीमारी बधती जावैं सैं ऊपर तै एडज और आण मरी। चमड़ी की खारिश रात नै सोवण नहीं देत्ती। चिन्ता करकै ब्लॅड प्रैशर बधगे, दिल का धड़का बधग्या। नशाखोरी के साथ-साथ सैक्स के अंगां की बीमारी बधती आवैं सैं। दूध ढोल म्हं घलग्या। पहलम कहया करदे - दूध बेच दिया इसा पूत बेच दिया। ईब सारे इस दूध रूपी पूत नै बेचण लागरे सैं। रोजगार खत्म होगे। प्राईवेट पाणी के नलके आगे। पीस्से आल्यां नै सुख होग्या, बिना पीस्से आल्यां की मर आगी। बुलध किते-कितै टोहे पावैं सैं। गाल भीड़ी होत्ती होत्ती इतनी भीड़ी होगी अक मोटा सा माणस तो लिकड़ै कोनी सकै। पाणी घर-घर मैं नलक्यां तै लियाये फेर इसकी निकासी का कोए इन्तजाम नहीं। कुछ घरां मैं तो भैंस बी नलके के पाणी तै नुहाई जावैं सैं।
परिवार नाम की कोए चीज नहीं बचरी। मकानां मैं रहवैं सैं लोग फेर वे घर नहीं सैं। बूढ़े बालकां नै देख कै राज्जी ना अर बालक बुढयां के मरण की बाट देखे जावैं सैं। सास बहू की कटती करती पावैं सैं, बहू सास नै बुरी बतावैं सैं। करियाणे की दुकान एक गाल मैं दो-दो तीन-तीन खुलगी। इन दुकानां मैं दारू के पाउच आगे। टीवी पै नशा, हिंसा, सैक्स का नंगा नाच क्यों होवै सै इसपै कोए सवाल ना। खेती की तबाही के के कारण सैं इसपै चरचा ना। ये ब्यूटी कम्पीटीशन कस्बयां ताहिं पहोंचगे इसपै चुप्पी क्यों सैं? इसमैं किसकी साजिश सै? कई बात लिखण की ना होत्ती। थोड़ी लिखी नै ज्यादा समझियो अर बिचार करियो। बिचार करांगे तो राह भी पावैगा। विचार तै परहेज करना छोड़ना पड़ैगा।
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