जनता नै मेरी राम राम। कई दिन मैं क्यों सोचदी रही अक मैं अपनी अरदास किसपै करूं, बहोत सोच्या फेर न्यूं समझ मैं आया अक जनता जनार्दन तै फालतू कूण हो सकैं सैं तो दो-च्यार बात करना चाहूं सूं। ध्यान तै गऊ माता की बात या जनता सुनैगी इसी मनै उम्मीद सै। मैं श्री गोशाला ट्रस्ट भिवानी की गोशाला मैं अपना जीवन बसर करण लागरी सूं। मेरे बरगी 1200 कै लगभग गां सैं। हम सारी मिलकै 8 क्विंटल दूध रोज पैदा करां सां जो बाजार कै भा तै लगभग 30 लाख रुपइये का एक म्हिने का बणै सै। इस म्हारी गोशाला मैं ऊंची नस्ल के सांड सैं अर शंकर, थापर अर साहीवाल नस्ल की 20-20 लीटर दूध देवण आली गऊ सैं जो प्रदर्शनियां मैं पहले के दूजे स्थान का इनाम ले कै आवें सैं। म्हारी गोशाला मैं गऊआं के भी नाम धर राखै सैं। एफ-12, रेशमा, बिमला, साधना, रामकुमारी, रेखा, हसीना जो 24-25 कि. दूध रोज देवैं सैं इनाम मिले सैं। जिब म्हारी ये बाहण इनाम ले कै आवैं सैं तो म्हारी सारी गऊआं की छाती फूल कै कुप्पा सी होज्या सै अर म्हारी रोज देखभाल करणिया 150 मजदूरां कान्हीं देख कै म्हारी आंख्यां मैं आंसू आज्यां सैं। दिन-रात एक करकै ये गोशाला मैं अर म्हारी देखभाल मैं, सान्नी सघानी मैं लाग्गे रहवैं सैं। इस म्हारी गोशाला कै धोरै 800 एकड़ जमीन बी सै अर या बहोते घणी उपजाऊ सै। इस धरती मैं जिब खेती लहलावै सै तो म्हारी बी खुशी का ठिकाना कोन्या रैहन्ता। गेहूं, चना, सरसों, अरहर, ज्वार अर बाजरा पैदा करैं सैं ये मजदूर अर बाजार मैं हर साल इसकी 23 लाख के लगभग की बिक्री होज्या सै। इसमां तै कुछ जीवन ठेके पै बी दई जावै सैं। इसतै बी घणी ए आमदनी होवै सै कितनी इसका मनै सही-सही बेरा कोन्या। इस बात का जनता गोशाला के खाते देख कै बेरा ला सकैं सैं। म्हारी ताहिं तो मालिक कदे खाता नहीं दिखान्ते। फेर ईब तो न्यू सुन्या सै अब जनता धोरै सूचना का अधिकार बी दे दिया सरकार नै तो उसके तहत बेरा लिया जा सकै सै खात्यां का। हां तो बात गोशाला की आमदनी पै चाल रही थी।
इस गोशाला धोरै 138 के लगभग व्यापारिक दुकान सैं जिनतै 20 तै लेकै 25 लाख रुपइये की आमदनी होन्ती बतायी। ऊपर तै बढ़िया नस्ल के बाछड़े अर गऊ बेच कै भी घणी ए आमदनी होज्या सै। बस न्यू मानले जनता अक दोनूं हाथां अर दोनू पाह्यां म्हारी गोशाला पीस्से दिन रात कमावण लागरी सै। अर कमावै बी क्यूं ना? बिना पीस्से आज कोए नहीं बूझता। बाजार व्यवस्था आग्गी जिसमें पीस्से का ए बोलबाला सै। बिना पीस्से आल्यां की कोए जात नहीं बूझता। ज्यूकर म्हारे मैं तै बी जो 23 किलो के 24 किलो दूध देवै सैं उनकी तो मालिक खूब खल अर दाणे तै खातिरदारी करै सै अर म्हारी बरगी जो दो-च्यार किलो दूध देवैं सैं उनकी खातर तो खल बी कदे-कदे देखण नै मिलै सै। वे बीमार होज्यां तो मालिक सैड़ फैड़ दे सी डाक्टर ने बुलाकै टीका लुआदें अर दवाई दिवा देवैं अर म्हारे बरगी बीमार होज्या तो पड़ी-पड़ी रम्भायें जावां सां दर्द मैं फेर कोए बूझ नहीं सै म्हारी।
पशुधन तै बी खूब कमाई करै सै म्हारी गोशाला। ज्यूकर गोबर की खाद बेचकै, माट्टी की खुदाई की बिक्री तै, नाज अर हरया चारा बेच कै। एकाध बर मैं बैठी-बैठी सोचूं सूं अक कोए बख्त था जिब या गोशाला म्हारे बरगी लावारिस, बेसहारा, बीमार, बूढ़ी, लंगड़ी गऊआं की सेवा करण खातर बनायी गयी थी। हरियाणा के समाज मैं खेती के काम मैं बुलध का बहोत काम था उन बख्तां मैं। हल की खेती थी। गऊं बिना बुलध नहीं थे तो हमनै समाज मैं गऊ माता का दर्जा मिलग्या।
असल मैं धर्म खूब भुनाया जावण लागरया सै पीस्सा कमाई खातर ईसपै फेर कदे चर्चा करूंगी। हां तै यू बहोत बड्डा कारखाना बणग्या। इस गोशाला धोरै 5 ट्रेक्टर सैं (बुलधां की खेती ये बी छोडगे), आधुनिक मशीन सैं, कृषि यंत्र, ट्राली, गऊआं का दूध काढण की मशीन, बायो गैस संयंत्र जो 25 किलो वाट का बतावै सैं जो सारी गोशाला नै एक साथ बिजली तै जगमगा दे सै, चैप कट्टर, ग्राइंडर अर मिक्सचर, मार्शल गाड्डी सैं। के कहने मालिकां के। उनके तो तीजां के से कटरे सैं। इस संस्था मैं जो 150 मजदूर काम करैं सैं उनकी हालत म्हारे बरगी गायां बरगी सै अर मालिकां की हालत 24 किलो दूध आली गायां बरगी सै। 16-16 घंटे काम अर 30 तै ले के 50 रुपये की मजदूरी। ना कोए छुट्टी, ना कोए बोनस, ईएसआई की कोई सुविधा ना। जनता नै मेरी अपील सै अक जिब थारे हलके मैं ये गोशाला आले आवैं तो म्हारी हालत का अर इन मजदूरां की हालत का जिकरा तो करियो। अर म्हारे नेता आवैं तो उनतै बी बूझियो तो सही अक एक गऊ माता की पुकार थी उसके बारे मैं उनका के कैहणा सै? 29 सितम्बर 1998 नै मंत्री मेनका गांधी बी आई थी उसनै बूझया अक बूढ़ी अर बीमार गऊएं कित सैं? इस गौशाला मैं बूढ़ी अर बीमार गाऊ एक बी ना देख कै मेनका कै बी आंसू आगे। अर वा फेर बोली - मैं आड़े दूध की डेयरी कोन्या देक्खण आई बल्कि सकारात्मक पशु सेवा देक्खण आई सूं। मेरी बिनती सै जनता तै अक यो डेयरी उद्योग तो बना दिया मालिकां नै फेर इसमैं श्रम कानून तो ईब ताहिं लाग्गू कोनी होए। करियो ताश खेलने बंद करकै म्हारी बरगी गऊ माता की अपील पै बी थोड़ा-सा ध्यान।
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