सोमवार, 17 अक्टूबर 2016

खुड्डै लाइन


जिब बी किसे प्रदेश मैं राजपाट बदलै सै तो इस खुड्डै लाइन शब्द का बहोत इस्तेमाल होवण लागज्या सै। ऊं तो इस शब्द का इस्तेमाल सारे सरकारी महकम्यां मैं होवे सै चाहे ओ स्वास्थ्य का हो चाहे शिक्षा का हो चाहे रोडवेज का हो चाहे नगर पालिका का हो। फेर हरियाणा मैं एक खास बात और देखण मैं आवे सै अक म्हारे समाज का एक हिस्सा-प्रोपर्टी डीर (भूमाफिया), शराब के ठेकेदार (दारू माफिया), भट्ठे आले, कुछ पहलवान, कुछ सूदखोर अर और भी कुछ हिस्से इसी ए नस्लां के - इसा सैं जो बिना राजपाट की छत्रछाया के जी कोन्या सकदा। ढाई दिन राज बदले नै होए नहीं अर इस हिस्से कै ढीड आज्यां सैं, एक हाथ लाम्बी जीभ बाहर आज्या सै। रम्भावण लागज्या सैं। फेर यू अपने सढ़े बदले औड़ राज मैं टोहवण लागज्या सैं अर दो च्यार म्हिने मैं पटरी बिठा ए लेवैं सैं। उसनै या पटरी बिठावण में रत्ती भर भी शर्म महसूस नहीं होत्ती अर होवै बी क्यों? जिब हरियाणा मैं एमएल अर एमएलए तै मंत्री मंत्री तै मुख्यमंत्री बणण का कामयाब नुस्खा यो हो - चोर बजारी दस तोले शुद्ध बीज, पांच तोले खुदगर्जी की जड़, छह तोले रिश्वतखोरी के पत्ते हों, बीस तोले कोरी गपशप हों। इन सबनै मोमजस्ते में गेर कै खूब बारीक करके अर इसमैं पांच तोले दगा की भस्म मिलाई जा सै। इस ढालां यो कुल छप्पण तोले माल बणज्या सै। फेर पांच तोले बुजदिली, चार तोले फूल खुशामद, तीन तोले मक्कारी, दो तोले बेकफी के पत्ते कूट कै कपड़छाण कर जां, पन्दरा तोले अंधेरगर्दी की खाल हो पर हो निखालिस हिन्दुस्तानी। ये सारी चीज पार्टीबाजी के पाणी में तीन म्हिने भिगोई जा अर फेर 56 तोले पहलम आले चूर्ण मैं मिलाकै इनकी दो-दो तोले की गोली तैयार करी जावैं सैं। इन गोलियों का इस्तेमाल छब्बीस जनवरी, पन्दरा अगस्त नै तो करया ए करया जा सै। जन्म दिन पै भी करया जावै। यह सारी चीज हरियाणा मैं थोक में मिलैं सैं। रोला सै बस इनके सही-सही अनुपात का अर सेवन करण के बख्त का। कई बै इसके सेवण खातर जागां का भी ध्यान राखणा पड़ सकै सै ज्यूकर राजघाट पै जाके माथा टेकदे बरियां दो गोली सटक जाणा। यो नुस्खा बहोत कारगर सिद्ध होवै सै हरियाणा की राजनीति मैं। इब ताहिं तो इसे माहौल मैं हरियाणा का खाता पीता तबका बी जै ठाण बदलज्या सै तो उसकी के गलती सै?
हां तो बात शुरू हुई थी खुड्डै लाइन तै अर या बात आगी अक राजनीति मैं हरियाणा का हिस्सा पिस्से आल्यां का खुड्डै लाइन कोन्या लाग सकदा वो आपणा राह गोन्डा टोह लेवै सै नये राज मैं। असली खुड्डै लाइन का मामला आवै सै हरियाणा की ब्यूरोक्रेसी अर पुलिस के मामले मैं। मिस्टर एम अर मिस्टर एस दो आईएएस अफसर घणे दिनां मैं फेटे थे। दोनूआं नै देहरादून एकेडमी मैं कट्ठी ट्रेनिंग ली थी। ट्रेनिंग लेत्ते-लेत्ते दोनूं पक्के ढब्बी बणगे। ये दोनूं उस बैच मैं सबतै कुब्बधी थे। रोज किसे ना किसे का बेकूफ बना दिया करदे। एक का कांटा तै उड़ै ए फिट होग्या अर दूसरा सूटेबल मैच के चक्कर ओवरएज हुया हांडै सै। सुण्या सै अक देहरादून मैं ट्रेनिंग बड़ी फन्ने खां दी जा सै। इस देश के विकास के क्यूकर धक्का मारना सै यो सिखाया जा सै। लोग सीधे करके अर नकेल घाल कै क्यूकर राखने सैं यो सही-सही पढ़ाया जा सै। चाहे सेहत का मामला हो, चाहे शिक्षा का मामला हो, जड़ सारे महकम्यां का धर्राटा क्यूकर ठाया जा सकै सै। एकले माणस तै या ट्रेनिंग दी जा सकै सै। बेरा ना उड़ै और किमै सीखै सै अक नहीं फेर एक चीज तो सारे पूरी ढालां सीख ज्यां सै अक जनता नै कमरै तै बाहर बाट क्यूकर दिखवाया करैं। भोग क्यूकर लाया अर लवाया जाया करै। अपने तै तरले अफसर नै खुड्डै लाइन राक्खो अर अपने तै सीनियर अफसर के तलवे चाटो।
सीनियर अफसर के साहमी जूनियर अफसर का इसा हाल होज्या सै जिसा शेर अर बकरी का। सर सर तै न्यारा कोए हरफै मुंह तै नहीं लिकड़ कै देत्ता जूनियर अफसर कै। मंत्री के साहमी तो बड़ला अफसर बी गोड्डी घाल दै सै। हां तो मिस्टर एम अर एस देहरादून की बात करदे-करदे आजकाल की बातां पै आगे। एम नै बूझया - आजकाल त्तो यार की चांदी होरी दीखै सै। एस झट बोल्या - बस मेहरबानी सै मुख्यमंत्री जी की। किमै ऊपर आले की कृपा सै। एस नै एम तै बूझया - सुणा तेरा के हाल चाल सै। एम नै जवाब दिया - आप्पां नै पहलम आले मुख्यमंत्री के बख्तां मैं खूब काच्चे काटे। जितने दिन मैं डीसी रहया उस बीच तीन एकड़ जमीन ऊपरल्यां के रिस्तेदारां के नाम करवाई। कई मन्दिरां खातर धरती दिवाई ‘दान’ मैं। कई मर्डरां मैं असली नाम बाहर करवाये। फेर म्हारे बी ठाठ पूरे करवाये। आप्पां बी गंगा जी से नहा लिये। एस बोल्या - तो ओ पीस्सा किसे होटल मैं ला दिया अक धरती खरीद ली। एम बोल्या - मैंने तो अपनी खून-पसीने की कमाई बदेश मैं भेज दी। छोटी छोरी बदेश पढ़ण जारी सै ना। एस ने फेर बूझ लिया - आज काल कौन से महकमे मैं सै? एम बोल्या - आजकाल तो आपां खुड्डै लाइन सै। एस एम की बात सुणकै बहोत हंस्या। एम भी हंसके बूझण लाग्या - इसमैं इतना हंसण की के बात सै? एस बोल्या - जिन दिनां मैं तेरी चांदी होरी थी उन दिनां में मैं खुड्डे लाइन लागरया था। ईब मेरी चांदी होरी सै अर तों खुड्डै लाइन लागरया सै। फेर बख्त तो बदलै सै। सबर का फल मीठा होवे सै। या पोजीशन बदलते के वार लागै सै। एम बोल्या - बात तो सही सै। फेर खुड्डै लाइन होकै आराम तै रैहना आसान काम थोड़े ए सै। एस बोल्या - या तो नियति बणगी म्हारी। एक राज मैं खुड्डै लाइन अर दूसरे राज मैं वीआईपी ड्यूटी। एम बोल्या - कुछ भी हो बात ठीक कोन्या। खुड्डै लाइन तै टपकै के डर तै भी फालतू डर लागे सै। एस ने मजाक करया - मनै इसा लाग्गै सै अक जै न्योंए चालें गये तो कदे ये बदेशी कम्पनी हमनै सारयां ए नै खुड्डै लाइन ना लादें?

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