सते, फत्ते, नफे, कविता, सविता, सरिता शनिवार के दिन शाम छह बजे फेर कट्ठे होगे। नफे आज बहोत खुश था। उसकी छोरी नै पी.एम.टी. टेस्ट मैं हरियाणा मैं बाहरवां स्थान लिया था। नफे बोल्या - म्हारी मेहनत रंग ल्याई। सरिता नै बीच मैं टोक दिया - थारी मेहनत रंग ल्याई अक पीस्सा रंग ल्याया? नफे सिंह नै एक बै तो गुस्सा आया फेर माड़ा-सा सीला होकै बोल्या - सरिता तेरा के मतलब सै? पीस्से दे कै पी.एम.टी. पास कर्या सै के मेरी छोरी नै? अपनी मेहनत तै पी.एम.टी. पास कर्या सै मेरी बेटी नै। सरिता बोली - बाहरमी मैं पूरे साल फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बॉयलॉजी की ट्यूशन नहीं राखी तनै उसकी? कितने रुपइये म्हिना दिया करदा? जिब तो आकै रोया करदा अक 1200 रुपइये म्हिने के तो ट्यूशन मैं खर्च होज्यां सैं छोरी के। होस्टल के खर्चे नै रोया करदा। फेर दिल्ली तीन म्हिने की ट्रेनिंग लेकै आई चालीस हजार मैं। क्यूं मैं झूठ कैहरी सूं के? नफे धीमा-सा बोल्या - ना ये बात तो सारी ठीक सैं सरिता। मनै तो छोरी की पढ़ाई खातर एक लाख रुपइया दो रुपये सैकड़े के ब्याज पै ठाणा पड्या न्यादर क्यां कै तै। सरिता बोली - यू टैस्ट रोहतक मेडिकल का टैस्ट कोन्या। कविता बोली - हरियाणे मैं एकै तो मेडिकल सै फेर यो कूणसा टैस्ट था। सते बोल्या - यू प्राइवेट मेडिकल कालेजां का अर प्राइवेट डैंटल कालेजां का टैस्ट था। नफे सिंह बोल्या - ना भाई मैं तो मेडिकल रोहतक आला टैस्ट समझर्या था। सविता बोली - रोहतक का टैस्ट तो कई दिन पहलम हो लिया। मेरे मामा की छोरी नै दाखला मिल्या सै उसमैं। वे तो बहोत राज्जी होरे थे अक चौखा इस सरकारी मैं नंबर पड़ग्या प्राइवेट मैं भेज्जणा का तो म्हारा ब्योंत नहीं था।
फते नै बूझ लिया - क्यों प्राइवेट मैं भेज्जण मैं के दिक्कत मानै था तेरा मामा। सरिता बोली - रोहतक के सरकारी मेडिकल मैं तो एक साल की 18 हजार फीस सै। फते - प्राइवेट मैं कितनी सै? सरिता बोली - सही-सही तो मनै बेरा ना फेर इसतै कई गुणा फालतू बतावै सैं। कविता बोली - बालकां कै तो चूड़ी-चढ़ा राखी मैडिकल मैं दाखिले की खातर अर आपां नै न्यूं बी बेरा कोन्या अक उड़ै फीस कितनी लागै सै। सारे एक-दूसरे के मुंह कान्हीं देखैं अक मौलाना मैडिकल कालेज मैं फीस कितनी सै? दो-दो की टोली बनाकै चाल पड़े गाम मैं बेरा पाड़ण। जित-जित पढ़े-लिखे माणस थे सबतै बूझ कै देख्या। हैरानी की बात थी अक पूरे गाम मैं एक माणस नै बी बेरा कोन्या अक मौलाना मेडिकल मैं एमबीबीएस के बालकां की एक साल की कितनी फीस ली जावै सै। उल्टे आगे। नफे सिंह कै पस्सीने आगे अक बेटी नै मौलाना मैडिकल मैं दाखिला तो मिलग्या फेर उड़े की फीस बी पाटैगी अक नहीं? सते बोल्या - मेरे याड़ी का छोरा पढ़ै सै उड़ै उसतै बूझ कै देख ल्यां सां। नफे बोल्या - क्यूकर बूझैगा। सते नै टेलीफोन टोह्या अर मिलाया। धापां ताई के फोन पर तैं। बेरा लाग्या अक पहलम तो साल की फीस थी एक लाख बीस हजार फेर ईबकै होगी एक साल की तीन लाख एक छात्र की। नफे की आंख्यां आगै अंधेरा-सा छाग्या अर बोल्या - इसका मतलब 25000 रुपइये म्हिना तो फीस के सैं। बाकी खरचे रहेंगे वे न्यारे। सरिता बोली - एक साल के तीन लाख दो रुपइये सैकड़ा पै और उधार ले लेगा फेर छोरी डाक्टर बणाणी ए चाहिए। ऊठ लिये सारें। नफे नै सारी रात नींद नहीं आई। छोरी नै दाखला मिलग्या फेर फीस कोनी भरी। उल्टे आगे अर छोरी नै रोहतक मेडिकल मैं दाखिले खातर आगले साल की तैयारी ईबै तै करण का मन बनाया।
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