सत्ते, फत्ते, कविता, सविता, कमला, भरपाई, नफे सिंह आज भरपाई की बैठक में शनिवार को इकट्ठे हो गये। सविता ने पूछा - सत्ते कई दिन से दिखाई नहीं दिये थे। कहीं गये थे क्या? कमला - हां, सत्ते रामदेव जी के यहां देहरादून एक हफ्ता लगाकर आये सैं। फत्ते - हां रामदेव जी का चारों कान्ही कसूता रूक्का पड़र्या सै। ईब तो जो लोग राम अर अयोध्या नै कान्धै धरकै हांड्या करते वे रामदेव जी नै कान्धै धरै हांडते दीखैं सैं। कमला - मनै पूरे गाम मैं नज़र मारकै देखी थी। गिनती के सात-आठ लोग-लुगाई योग करते पाये। सत्ते - म्हारे गाम की कुल आबादी कितनी सै? फत्ते - होगी साढ़े छह हजार तो। नफे सिंह - तीन हजार छह सौ वोट तो पाछली बरियां पड़ी थी गाम मैं। पाच हजार तो होगी आबादी जरूर। सबनै अपना-अपना अंदाजा बताया फेर सही-सही आंकड़ा किसै धोरै भी कोनी पाया। मान लिया कम तै कम आबादी पांच हजार बी सै तो सात-आठ लोगां ताहिं यो योग पहोंच्या सै। कमला - टीवी पै तो इसा लागै सै अक जणो सारा भारत देश रामदेव जी का भगत होर्या सै। म्हारे हरियाणा मैं सात हजार के लगभग गाम बताये। तो हरियाणा के गामां के 56000 लोग तो रामदेव जी का योग उपयोग मैं ल्यावणै लागरे सैं। सविता - गामां मैं कम असर सै ये तो शहरां आले घणे बावले हुये हाण्डैं सैं इसकै पीछे। ब्लॅड प्रेसर, शूगर, मानसिक तनाव, पेट फूलने की बीमारी ये सब शहर मैं रहने वालों को ज्यादा हावैं सैं। हां तो बात तो उड़ै तै चाली थी अक सत्ते रामदेव के गढ़ मैं रैहकै आया सै किमै विस्तार मैं बतावै म्हारे ताहिं। सत्ते बोल्या - मैं तो देख के हैरान रैहग्या बाबा जी अर उनका अरबां का दिव्य योग ट्रस्ट साम्राज्य।
कविता बोली - यू रामदेव तो म्हारले आचार्य बलदेव का चेला बताया। फेर मेरै कम जंचै सै या बात। सविता - क्यूं घाट क्यूं? कविता - और के आचार्य बलदेव तो योग कोनी सिखात्ता। हो सकै सै उसनै आत्ते ए ना हों योग करने तो फेर वो रामदेव का गुरु क्यूकर होग्या। फत्ते - या कविता एक और राग लेकै बैठगी। कई बर चेले गुरु के सिर पर कै हाथ फेरनियां होज्या सैं। हां भाई सत्ते। तूं किमै बतावै था। सत्ते बतावण लाग्या - उड़ै चर्चा थी अक साल भर पहलम आचार्य कर्मबीर ने 6 दिन ताहिं अन्न-जल त्याग दिया था। उसकी शिकायत थी अक रामदेव नै अपने भाई रामभरत ताहिं भैरों मंदिर कालोनी कनखल मैं 25 लाख रुपइये की जायदाद खरीद कै दी सै। इस ट्रस्ट के पीस्से का इस्तेमाल निजी काम की खातर कर्या गया। कविता बोली - या बी किमै बात सै। गैहटे का बुलध तो गैहटे मैं ए खावैगा। न्यों बताओ ओ बुलध कित जावैगा? ट्रस्ट रामदेव का, कमाई रामदेव की। ओ जिसनै चाहवै उसनै देवै। थारै क्यूं पेट मैं दरद होर्या सै।
सविता ने बीच में टोक दिया - ट्रस्ट के नाम पर पैसे इकट्ठे करके कोई अपने भाई को क्यूंकर दे सकै सै? सत्ते बोल्या - आचार्य कर्मबीर को मनै टोहण की कोशिश करी उड़ै अक उसे धोरै बूझल्यूं फेर वे उड़ै पाया ए कोनी। सविता बोली - सत्ते तूं न्यूं बता अक तूं रामदेव कान्हीं सै अक कर्मबीर कान्हीं? सत्ते बोल्या - दिल तो मेरा सै रामदेव कान्हीं फेर दिमाग कई बर कर्मबीर कान्हीं खड़या पावै सै। हां, एक बात का चरचा और था उड़ै। बाबा रामदेव का दूसरा सहयोगी सै ना ओ, के नाम सै उसका, हां ओ आचार्य बालकृष्ण पर नेपाल के विराट नगर मैं ढाई करोड़ की संपत्ति खरीदण अर अपने भाई ब्रह्मदत्त शास्त्री ताहिं मेरठ मैं लाखां रुपइये की संपत्ति खरीदवावन का आरोप सै। या बात न्यों कहवैं थे अक बालकृष्ण नै भी मानी सै अक नेपाल में उसका घर बन्या सै फेर ट्रस्ट के पीस्यां तै कोन्या बण्या। सविता बूझ बैठी - तो फेर या तो बात साफ होनी ए चाहिये अक वो किसके पीस्यां तै बण्या। फत्ते बोल्या - गोरखपुर मैं बाबा रामदेव का योग का 7 दिन का प्रोग्राम करवावनिया मेरा दोस्त सै। ओ बतावै अक 7 दिन का ठेका पच्चास लाख का था। एक करोड़ की टिकट बिकी थीं। दस लाख खरच होगे अर चालीस लाख का फायदा होग्या। सविता - सुण्या सै उस कैम्प मैं आम आदमी ताहिं जावण की इजाजत नहीं थी। ढाई सौ तै तले की टिकटै ना थी। फत्ते - हां सबतै फालतू टिकट उननै ढाई हजार की छपवाई थी। ढाई सौ आली तो 100-दो सो टिकट थी दिखावण ताहिं। सविता - या बात तो गल्त सै, स्वामी रामदेव नै योग बी बेचना शुरू कर दिया।म्हारे पूर्वज नै के योग की खोज इस खातर करी थी अक इस योग का कोए ब्यौपार करै। फत्ते बोल्या - स्वामी रामदेव नै योग फेर उभार दिया या के थोड़ी बात सै। सविता बोली - या बात तो सही सै पर यू बेचणा बी तो शुरू कर दिया, या बात तो गलत सै। ये कैम्प तो ‘आशा बाबू’ हर की ढालां कमाई का धन्धा होगे। फत्ते बोल्या - टीवी पै लाखां लोगों नै मुफ्त मैं दिखावण लागर्या। सविता बोली - चैनल मुफ्त मैं देवैं सै के रामदेव की ताहिं इतना बख्त। आस्था चैनल की विज्ञापनां की कमाई का हिसाब बूझ कै देख्या सै के कदे। चैनल तो मालामाल होग्या रामदेव करकै। फत्ते फेर बोल्या - फेर इसमैं रामदेव के कर सकै सै। कमला ईब ताहिं चुपचाप बैठी थी, वा बोली - मनै एक बात और सुनी सै अक रामदेव बदेशी कंपनियां पै बहोत छोह मैं आवै सै।
सत्ते बोल्या - कसूता देशभगत सै इस मामले मैं रामदेव। पूरा देशी सै देशी। सविता बोली - देशी तो सै फेर मोडरन देशी सै। पहलम आले देसी पीर-पैगम्बर तो मरीज का इलाज मुफ्त मैं कर्या करदे। पीस्से कोन्या लिया करदे इलाज के। म्हारे वैद जी के बारे मैं मशहूर था अक पीस्से नहीं लेत्ता। कमला बोली - आज तो चाट का जमाना है। बिना चाट सान्नी मैं मिलाये तो भैंस बी दूध कोन्या देती, तो इसमैं रामदेव जी का के कसूर?
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