सोमवार, 17 अक्टूबर 2016

म्हारी स्वयंभू पंचायत

म्हारी स्वयंभू पंचायत
जागां-जागां बिना चुन कै आई पंचायतां की पूरे हरियाणा मैं लहर-सी आरी सै। जिब मुद्दा महिला विरोधी हो, दलित विरोधी हो, अंतर्जातीय हो अर कै सवर्ण जात की ज्यादती के खिलाफ करी कारवाई का हो तो इन पंचायतां की घणी कसूती बांह फड़कैं सैं अर म्हारे नेता बी चुप, म्हारी होनहार ब्यूरोक्रेसी भी कांपै अर म्हारी न्यायपालिका के बी क्या कहने। इसे ढाल का किस्सा एक झज्जर के गाम मैं हुया। गाम की दो जात्यां के युवक अर युवती नै ब्याह रचा लिया अर वे गाम तै भाजगे इन पंचातियां तैं डरते आज ताहिं नहीं बेरा वे कित सैं। पर उन दोनूआं के घरक्यां गेल्यां इन पंचातियां नै जो करी उसपै आज चर्चा कोन्या। हां उस गाम के लोगों नै उस पंचायत के पंचातियां का जो नक्शा खींच्या वो साझा करण नै जी करै सै। पंचायत का अध्यक्ष था मीना सिंह जिसकी उम्र 80 साल की होगी। चौदवीं शताब्दी के विचारां का धनी। अपने चाचा की जमीन उसनै 20 साल ताहिं दाब कै राखी। चाचा का छोरा एक था कर्मबीर। उसने ब्याह हुयां पाछै अपनी घरआली तै मिलकै वा जमीन हांगा लाकै छडवाई। मीना सिंह का सगा भाई था। धरती के लालच मैं वो साझै राख्या। उसकी पत्नी नै पीहर मैं जीवन बिताया। मीना सिंह की पत्नी बहोत दुःखी थी। उसकै बेल मारकै राख्या करते। ईब तै वा मर ली। भाई की पत्नी अपनी बेटियां की ससुराल मैं रहवै सै। मीना सिंह के कहे मैं उसके भाई का छोरा ना अपनी मां नै ना ल्यान्ता अर ना बाहनां नै घर मैं बड़ण देन्ता। इस पंचायत के प्रधान कै खिलाफ सै किसे का पंचायत करण का ब्यौंत? एक दूसरा मैम्बर सै पुराना सरपंच - अनूप। बिघन की जड़ योहे सै। सारी उल्टी-सीधी स्कीम गुप्त ढंग तै योहे बनावै सै। इस ब्याह आले मामले मैं उसका पूरा हाथ बताया। 10 साल ताहिं सरपंच रह्या। खूब पीस्सा खाया। उसतै बाद जो बी सरपंच बन्या उसने उसकी छत्रछाया मै काम करना पड़या। खुद कदे साहमी नहीं आवै। अनूप सरपंच गाम का शकुनि मान्या जावै सै। सबनै ठेंगे पै राखे सै। करल्यो कोए के करैगा उसका?
तीसरा सदस्य सै श्याम चंद्र। पुराने सरपंच नरेंद्र का छोटा भाई। इसका एक भतीजा ट्रक ड्राइवर यूपी मैं डाका मार्या करदा। उड़ै ए उसका मर्डर होग्या। दूसरा भतीजा बी पुलिस नै एक डाके मैं पकड़या था। श्यामू के एक भाई नै कई साल अपनी पत्नी छोडें राखी। इसकी बुआ धान्धलान मैं ब्याही थी। उड़ै उसकी कोन्या बनी तो गाम के एक पुजारी की गेल्यां बिना तलाक लिए रहवण लागगी। अपने भाई भतीज्यां नै मंदिर का खूब पीस्सा दिया करदी। मंदिर की 35 एकड़ ज़मीन की सारी आमदनी ढो गिरी उननै। चौथा पंचाती सै राजकुमार। यू नम्बरदार का बेटा सै। उम्र 37 साल सै। अनपढ़ सै फेर बी तेज बहोत सै। इसका बाबू कमलू नम्बरदार बी इस केस मैं शामिल था। गाम मैं पूरी चर्चा चाली बताई अक नम्बरदार नै अपनी सागी बाहण गेल्यां बलात्कार कर्या था। ईब नम्बरदार की उम्र 80-82 बरस की सै; पहली पत्नी तै एक बेटी होई। फिर इस पहली पत्नी के जीवन्ते जी पुत्र की खातर दोबारा ब्याह रचाया। दूसरी पत्नी के घर आल्या नै 10 एकड़ ज़मीन अपनी बाहण के नाम करवा ली थी। फेर उस धरती की आमदनी नम्बरदार धोरै ए रह्या करदी। उस धोरै 35 एकड़ जमीन सै फेर बी उसकी पहली पत्नी सारी उम्र अपने पीहर मैं पड़ी रही।
एक बार भकाभकु कै ल्याये थे उसनै नम्बरदार हर। एक लड़का गोद दिवा दिया अर सारी धरती उसकै नाम करवा दी। फेर उस छोरे नै वा कदे नहीं सम्भाली। बुढ़ापे मैं वा अपनी बेटी गेल्यां रही अर उड़ैए डीघल मैं उसनै आखरी सांस ली। नम्बरदार नै सारी ज़मीन तीनों बेट्यां के नाम करवा दी अर पहली पत्नी की बेटी नै कदे बी नहीं बुलान्ता। राजकुमार नै इसे गम मैं एक बनिया की छोरी गेल्यां बलात्कार कर्या बताया। उसका बड्डा भाई श्रीभगवान भी छोरियां के मामले मैं खूब बदनाम सै। राजकुमार उस छोरी के बारे मैं बोल्या - ईब तो वाह म्हारे गाम की छोरी तो रही नहीं जै कितै पाज्यागी तो चार-पांच दिन बरत कै देवांगे पुलिस मैं उसनै। ये तो एक पंचायत के कुछ लोगां की हिस्ट्री सीट सै। इसमैं जो कुछ साच्ची बात थी उनके बारे मैं वेहे बताई गई सैं बस नामां मैं थोड़ा अदल-बदल जरूर करी सै। ईब जनता नै हिसाब ला लेना चाहिये अक ये किसे पंचाती सैं अर गाम की ईज्जत की इसे लोगां नै असल मैं कितनी परवाह सै। कोए फांचर ठोक, कोए लिकड़ा तोड़, कोए कढ़ी बिगाड़, कोए माणस मार, कोए चोर अर जार, कोए दारू बाज, कोए धोखेबाज अर सट्टेबाज, ईब कितनी अक योग्यता बताई जावैं इन पंचातियां की। कई बर तो इसा लागै सै अक या जनता बी कतिए डूब ली जो इसे पंचातियां के फतवे सिर झुका के कबूल करले सै। इन पंचायतां की संविधान के हिसाब तै के हैसियत सै? संविधान बड्डा अक ये स्वयंभू पंचायत बड्डी? सैड देसी कहवांगे हमनै संविधान तै के लेना? म्हारी खातर तो ये पंचायत फालतू। बस आड़ैए तो रोल सै समझण मैं। संविधान तै ऊपर क्यूकर हो सकैं सैं ये पंचायत। कानून नै अपने हाथ मैं क्यूकर ले सकैं सैं?
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