सोमवार, 17 अक्टूबर 2016

ग्लोबल वार्मिंग


सत्ते, फत्ते, नफे, सविता, सरिता अर भरपाई शनिवार नै फेर कट्ठे होगे। बात मौसम पै चाल पड़ी। सत्ते बोल्या - एक दिन मनै थोड़ा घणा इस ग्लोबल वार्मिंग के बारे मैं पढ़या था। इस करकै म्हारे मौसम पै कसूता असर पड़ण लागरया सै। नफे बोल्या - सत्ते सारी हाण कसूती बातां का जिकरा क्यूं करया करै। कदे सूत आवण आली बातां का जिकरा बी कर लिया करो। सविता बोली - ये पर्यावरण आले सैं ना ये बातां नै बढ़ा-चढ़ा कै कहवैं सै अक ग्रीन हाउस गैसां का कसूता असर होवण लागरया सै। हमनै ख्याल राखणा पड़ैगा। फते बोल्या - पहलम इस बात पै तो चर्चा करल्यो अक यू सारा मामला सै के। गलत-सही का बी तो जिबै बेरा लागैगा। सते बोल्या - म्हारी धरती पाछली दो शताब्दियों तै सहज-सहज गर्म होत्ती आवै सै इस करकै म्हारी धरती पै अर आसमान मैं इसके जो असर पड़े सैं उनतै मिला कै ग्लोबल वार्मिंग का नाम दिया गया सै। जिब सूरज की किरण पेड़-पोधां पैं, जमीन पै अर पानी पै पड़ैं सैं ये सोख ली जावैं सैं। गर्म हुए पौधे, धरती अर पानी गर्मी इन्फ्रारेड रेडियेशन के रूप मैं छोड़ दें सैं जिसनै कुछ गैस सोखलें सैं जिस करकै वातावरण मैं गर्मी पैदा होज्या सै। जै ये गैस नहीं होत्ती तो मौसम के तो घणा ठंडा होत्ता अर कै घणा गर्म हो जात्ता। म्हारे वातावरण मैं सोख की ताकत आली मेन गैस कार्बन डायआक्साइड सै। सविता बोली - ना ईसी गैस तो नाइट्रस ऑक्साइड, मिथेन, ओजोन आदि बी सैं। सते बोल्या - सविता तेरी बात सोलां आने सही सै फेर मुख्य गैस कार्बन डायआक्साइड सै। इस ढालां जै वातावरण मैं इन गैसां की मात्रा बढ़ जावै सै तो जमीन पै मौसम मैं गर्मी भी बढ़ ज्यावै सै। नफे बोल्या - या कार्बन डायआक्साइड आवै किततै सै।
सतै नै बताया - सारे जीव-जन्तु सांस मैं कार्बन डायआक्साइड बाहर काढ़ै सैं अर कार्बन आली चीज जब ईंधन के रूप में जलाई जावैं सैं तो भी या गैस लिकड़ै सै। दिन मैं सूरज की रोशनी में कार्बन डायआक्साइड गैस हरे पत्यां द्वारा फोटो सिन्थिसिज की प्रक्रिया मैं इस्तेमाल करी जा सै अपना भोजन बणावण मैं अर आक्सीजन वातावरण मैं छोड़ दी जावै सै। सरिता बोली - इसका मतलब जितना ज्यादा ईंधन जलैगा उतनी ज्यादा कार्बन डायआक्साइड बनैगी। सते बोल्या - हां सरिता। इतनी वार मैं कविता बोली - अर जै हरे पत्यां आले पेड़-पौधे कम होज्यांगे तो इस कार्बन डायआक्साइड नै सोख कै आक्सीजन बणावण काम काम कम हो ज्यागा तो वातावरण मैं गर्मी तो बधैएगी। सते बोल्या - देख्या बात सही-सही ढंग तै करण तै किसी तावली समझ मैं आगी म्हारे ग्लोबल वार्मिंग। सते बोल्या - हां जो यो इन गैसां के बैलेंस मैं फर्क आवै सै इसके कारण ग्रीन हाउस प्रभाव करकै मौसम गर्माज्या सै। नफे बोल्या - यू ग्रीन हाउस गैसां का के मामला सै यू भी तो समझा किमै। सत्ते बोल्या - कई गैस सैं जो प्राकृतिक अर अप्राकृतिक ढंग तै पैदा होवैं सैं जिनके करकै ग्रीन हाउस प्रभाव होवै सै अर गर्मी बढ़ै सै।
ज्यूकर पहलम बी बताया सै अक कार्बन डायआक्साइड मुख्य ग्रीन हाउस गैस सै। म्हारे वातावरण मैं लगभग 708.5 गिगा टन कार्बन हौ सै कार्बन डायआक्साइड के रूप मैं। नफे बोल्या - यू गिगा टन के बला सै। सते बोल्या - टन का बेरा सै ना। 1,000,000,000 टनां की बराबर एक गिगा टन हो सै। जब संसार मैं औद्योगिक क्रांति हुई अर मशीनां नै काम करना शुरू करया तो कोयले का, तेल का अर प्राकृतिक गैसां का इस्तेमाल बधता गया अर जब कार्बन जलैगा तो कार्बन डायआक्साइड तो पैदा होवै ए होवै। इस तरियां जै कार्बन डायआक्साइड पैदा तो फालतू होवै अर म्हारा ग्लोबल इकोलोजिकल सिस्टम इसनै पूरी नै सोख नहीं पावै अर या कुछ बच ज्या तो उस तै मौसम की गर्मी बधै सै। इसतै न्यारा क्लोरो फ्लोरो कार्बन की मात्रा बी बधी सै जिस करकै असंतुलन बन्या सै अर ओजोन गैस की पर्त पै बी उल्टा असर पड़या सै जिस करकै म्हारे वातावरण के बैलेंस नै और बी खतरा पैदा होज्या सै। नफे सिंह बोल्या - ग्लोबल वार्मिंग अर ग्रीन हाउस गैसां की बात तो समझ मैं आगी फेर न्यों तो कोन्या समझ मैं आया अक इसका के नुकसान होवैगा। सते बोल्या - इतनी बात समझ मैं आगी वा थोड़ी सै के। बाकी की फेर कदे सही। सविता बोली - ग्लोबल वार्मिंग के कई नुकसान सैं। मुंबई बी डूब सकै सै। गर्मी करकै समुद्र के पानी का लेवल बदल सकै सै अर बहोत नुकसान हो सकै सै। नफे बोल्या - फेर तो करो किमै। मुंबई डूबगी तो भारत धोरै के बचैगा?
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