आज काल विकास की बहोत चर्चा होरी सै। सारे पार्टियां आले विकास-विकास चिल्लाते हांडैं सैं। इस समाज मैं कसूती सड़ांध उठ ली ईब इसनै खुशबू तो कहवैं क्यूकर फेर क्यूं उठ ली इसमैं रोल मारज्यां सै। न्यों कोए नहीं बतांतां कि उनके हिसाब तै विकास का के मतलब सै? कोए कहवै सै मैं रेल चलाद्यूंगा फेर क्यां खातर? लोगां ने ज्याण खपावण का रेल कै तलै कट कै मरण का आसान तरीका पाज्या इस खातर रेल ल्यावांगे के आपां? दबी जबान मैं एस वाई एल का बी जिकरा होसै। फेर इस बात का कोए जिकरा नहीं करदा अक हरियाणा नै कुल कितना पानी चाहिए सै। कितना पानी आज हरियाणा धोरै सै अर कितना पानी एसवाईएल तै हमनै थ्यावैगा? एक अनदाजे के हिसाब तै हरियाणा में 400 मिलियन एकड़ फुट पानी की कुल जरूरत सै। हरियाणा धोरै लगभग 200 मिलियन एकड़ फुट पानी सै। एसवाईएल जै खुद बी जावै तो उसमैं 17 कै 23 मिलियन एकड़ फुट पानी और मिलज्यागा। बाकी चाहिए 177 मिलियन एकड़ फुट पानी। यू किततै आवैगा? इसपै म्हारे नेतावां का के कहना सै? म्हारे हरियाणा की सिरसा की स्पिनिंग मिल बंद, हांसी की मिल बंद, रोहतक की स्पिनिंग मिल बंद, सोनीपत की एटलस फैक्टरी खिंच-खिंच कै सांस लवण लागरी सै उड़ै 5000-6000 कर्मचारी थे ईब 700-800 रैहगे बताये। पानीपत का हथकरघा उद्योग तीन चौथाई तै बंद हो लिया अर बाकी बी बस। फरीदाबाद की आधे तैज्यादा फैक्टरी बंद होली कै बंद होवण आली सैं। असैम्बली मैं बजट पेश करतियां नै म्हारे पाछले वित्त मंत्री जी नै स्वीकार करया अक खेती की पैदावार मैं खड़ोत सैं। इस सबके चालते, बेरोजगारी कसूती ढाल बधण लागरी सै। जो हरियाणा नै चांद पै पहोंचाने की बात करैं सै, वे कोए हरियाणा का विश्वसनीय खाका तो बतावैं अक या बेरोजगारी की समस्या न्यों दूर होवैगी।
हम पढ़ लिखगे फेर बी हरियाणा मैं घणेए अनपढ़ लोग सैं। पढ़ लिख कै बी आपां पूरे नागरिक बने अक नहीं सिपै मनै तो कई बर अपने ऊप्पर शक होवण लागज्या सै अक आपां अधखबड़े माणस तो नहीं सां? इस पढ़ाई लिखाई नै म्हारे ताहिं चाहे और किमै सिखाया हो चाहे नहीं सिखाया हो कन्या की पेट मैं ए हत्या करना खूब आच्छी ढाल सिखा दिया। वा कहावत सै ना अक ‘हाथ कंगन नै आरसी के अर पढ़े लिखे नै फारसी के’ हरियाणा मैं पुरुष महिला लिंग अनुपात 865 सै 2001 की जनगणना के हिसाब तै अर 820 सै 0 तै 6 साल के बीच मैं। यो लिंग अनुपात पढ़े लिखे लोगां मैं और बी गड़बड़ बताया। इसतै साफ सै अक या म्हारी पढ़ाई लिखाई हमनै औरतां की दुश्मन बणावै सै अर हम उसनै गर्भ मैं ए खतम करद्यां सां। जै इसी पढ़ाई आग्गै बी पढ़ाई जागी तो कोन्या चाहन्ती हरियाणा के लोगां नै इसी पढ़ाई। क्यूं बताओ हरियाणा की बहादर वीरांगनाओं तम इसी पढ़ाई की तरफदारी करोगी? दलितां का हाल तो और बी माड़ा सै। आरक्षण के बावजूद पिछडे़ सैं वे। प्रथम श्रेणी के कुल कर्मचारी हैं 235 जो कि इस वर्ग के कुल कर्मचारियां का 0.40 प्रतिशत है। फेर जै इसा लूला लंगड़ा विकास करना सै जिसमैं सौ मां तै 15 तो बिना काम करें काच्चे काट्टें अर बाकी 85 काम करकै बी छिकलें फेर बी उनका पेट कोनी भरै रामजी तो इसा विकास भाई रणवीर नै तो चाहिए ना बाकी जनता जनार्दन जानै अक वा किसा विकास चाहवै सै जे और किमै घणा कैह दिया तो कदे या म्हारे ए पुतले फूंक्कण लागज्या। मनैं पूरा विश्वास सै अक जनता बावली नहीं सै या सारी बात समझै सै। जड़ बात या सै कि जनता स्यानी सै या न्यारी बात सै अक कदे-कदे वा बावली बात करदे सै अर फेर उसका हरजाना बी जनता खुद भुगतै सै ये म्हारे नेता नहीं भुगतते। तो बात विकास की थी।
हरियाणे का विकास ईब ताहिं किस दिशा मैं था या सोच्चण की बात सै। टीवी सैक्स, हिंसा अर नशे का प्रचार रोज करै म्हारे घरां बड़कै। हरित क्रांति नै फायदा 10-15 प्रतिशत का करया नुकस्यान फालतू कराया या बात थोड़ी-थोड़ी ईब समझ आवण लाग्गी सै म्हारै। धरती थोथी होगी, पानी कई सौ फुट नीचै चल्या गया अर कै चौआ आग्या, पैदावार मैं खड़ोत पर लागत कई गुना बधगी, फसल की कीमत ना मिलती ये सारे विकास के मुद्दे सैं। इनपै जिब ताहिं खुलकै चरचा गाम-गाम मैं नहीं होवैगी इतनै डबलयू टीओ के पकड़ाये औड़ फूल की खेती के टोट्क्यां तै काम कोनी चालै। हाल के विकास के नाम पै 2 एकड़ आले किसान की मर सै। नहीं सै तो कोए बतावै एक न्यों नहीं सै। जनता अर किसान नेतावां तै जात गोत भूलकै ये सवाल विकास के बारे मैं नहीं करना शुरू करैगी तो नेता विकास के नाम पै जनता नै भका-भका के अपना विकास करें जांगे अर बेरोजगार न्योंए धक्के खावैंगे अर सल्फास की गोली खाकै इस विकास के गुण गावैंगे, कर्मचारी की छंटनी बदस्तूर जारी रहैगी। जनता इस सबनै विकास कहवैगी अक विनाश कहवैगी या जनता जाणै।
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