मंगलवार, 18 अक्टूबर 2016

कौन-सी परंपरा ?

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    कौन.सी परंपरा ?
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     या कहानी नहीं सै। या बनी बनाई बात नहीं सै। या असल मैं होए औड़ बात सै जो किसे बी प्रान्त हरियाणा, यूपी, बिहार, पंजाब मैं सकै सै। म्हारे गाम की बात हो सकै सै। थारे गाम की बात हो सकै सै। पड़ोस के गाम की बात हो सकै सै। या म्हारी गली की बात हो सकै सै। या थारी गली की बात हो सकै सै। या किसे बी गली की बात हो सकै सै। या म्हारे घर की बात हो सकै सै। या थारे घर की बात हो सकै सै। डटकै! घणी तावल करने की जरूरत नहीं सै। बातै इतनी गंभीर सै अक क्यूकर करी जा अर करी बी जा अक नहीं करी जा। तो बात या सै अक एक गरीब परिवार था। मां-बाप, एक बेटा दो बेटी। गाम मैं मजदूरी करकै, भैंस का दूध बेच कै अर छह बीघे धरती बाधे पै ले कै बहोत मुश्किल तै गुजारा करैं थे। छोरा ब्याहवण जोगा होग्या। फेर एक तो लड़की मिलना ए मुश्किल काम अर दूसरे ब्याह की खातर खर्चा पानी करने को पैसे नहीं। कई रिश्तेरियां की सिफारिश करकै छोरी पाई थी। कई जगां ब्याज पै 10,000 रुपइये लेवण गया फेर उसकी माड़ी माली हालत देख कै गाम मैं कोए भी तैयार नहीं हुया पीस्सा ब्याज पै देवण नै। एक बर तो ब्याह की तारीख बी आगे नै डिगावनी पड़ी भाई नै। मां न्यारी परेशान। बाबू न्यारा दुखी। करै तो के करै?
     एक गाम के बड्डे पंचायती नै हां भरी ब्याज पै पीस्से देवण की। बहोत खुश हुया सुरता अक ईब दोबारा ब्याह की तारीख नहीं आगै सरकानी पड़ैगी। मगर चौधरी नै एक मामूली सी शर्त लगा दी ब्याज पै पीस्से देवण की। सुणकै सुरते के पायां तले की धरती खिसकगी। करै तो के करै? इस शर्त नै मानै तो मुश्किल अर ना मानै तो ब्याह कोन्या होवै। घर क्यां तै सलाह करण की बात कही सुरते नै। चौधरी बोल्या - इसी बातां की सलाह नहीं करया करते ये तो गुप-चुप हो जाया करैं। दो दिन की मोहलत ले कै आग्या सुरता चौधरी पै। मां नै बी बेटे पै पूछनी चाही तो इशारे से मैं बताई सुरते नै बात। मां किमै समझी किमै नहीं समझी। खैर सुरता 10,000 रुपइये ले आया ब्याज पै। ब्याह होग्या। बहू आगी। घूंघट के म्हां कै अर फोटू मैं उसनै अपना घर आला देख लिया था। परिवार उनका भी गरीब था। पहली रात नै जो हुया उसनै देख कै तो रमलो हैरान रैहगी अर उसकै बहोत घणा गुस्सा आया। सुरते की जागां वो चौधरी आग्या उस कमरे मैं जिसनै ब्याज पै पीस्सा दिया था। उस औरत ने बहाना बना कै उस कमरे तै बाहर लिकड़ कै पैंडा छुटवाया। उसकी सासू ने बेरा लाग्या तो वा उल्टी बहू नै समझावण लागी - ए बहू इसपै 10,000 रुपइये उधार लिये सैं। क्यों घर की इज्जत खिंडावै सै। बहू बोली - 10,000 तमनै लिये सैं एक रात का मेरा सौदा करकै अर फेर मनैए उल्टा न्यों कहवो सो अक क्यों म्हारी इज्जत खिंडावै सै।
     इज्जत थामनै खिंडाई अपनी अर गैल मेरी बी। इज्जत पर तो हाथ गेरया उस बड्डे पंचायती नै जिसनै थारे तै ब्याज पै पीस्से दिये। खैर वा लड़की अगले दिन अपने पीहर चली गई और उसनै घर जा करकै सारी बात बता दी। छोरी के मां-बाप बहोत दुखी हुये। वे पांच-सात मौजिज आदमियां ने ले कै उस लड़की की ससुराल मैं पहोंचे। गाम के बुजुर्ग अर स्याणे माणस कट्ठे कर लिये। सारे लोगां का योहे था अक जो होगी उसपै माट्टी गेरो अर इनका घर बसण द्यो। जितने मुंह उतनी बात थी। फेर उस छोरी नै स्टैंड ले लिया अक वा उस घर मैं कोन्या रहवै। ईब तो दस हज़ार मैं एक रात का सौदा करया सै। कल को पता नहीं मेरे शरीर का कितने मैं सौदा कर लेंगे ये। सुरते के बाबू नै सुरते के ससुरे के पाहयां में अपनी पगड़ी टेक दी। वा लड़की बोली या पगड़ी जिब कित गई थी जिब मेरा सौदा करया था। कमाल की बात या थी अक सुरते के गाम की पूरे के पूरे की वा बहू इज्जत बनगी अर दूसरे कान्ही तै उसके अपने पीहर के गाम की बी वा इज्जत बनकै साहमी आई। अर दोनों गामां के लोग इज्जत बचावण मैं जुटगे।

     लड़की नै करड़ा स्टैंड लिया तो इन सबके तेवर बदलगे अर जितनी अपील थी इन पंचातियां की वे धमकियां मैं बदलगी। वे उस लड़की नै बतावण लाग्गे अक जै तनै यो रिश्ता तोड़ दिया तो तेरी गेल्यां के बण सकै सै। जिसनै ब्याज पै पीस्से दिये सैं इसकी गाम गुहांड में बहोज इज्जत सै अर ऊपर ताहिं पहोंच सै। जड़ उस छोरी नै कह दिया अक मनै मरना मंजूर सै फेर इसे कसाइयां के गाम मैं मनै कोन्या रहना। आगे की आगै देखी जागी। खैर उस छोरी नै उसके माता-पिता बी नाता तोड़ कै अपना घरां उल्टे लेगे। फेर इस सारे वाके नै कई सवाल समाज कै साहमी ल्या दिये। पहली बात तो याहे सै अक म्हारा समाज कित जा लिया? म्हारे समाज नै (दोनूं गामां की पंचायतां नै) उस छोरी को ही समझाने पर जोर क्यों दिया? क्या उस लड़की का तथाकथित पति और उसका परिवार किसी कानून के तहत सजा का दोषी नहीं? और सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि उस ब्याज पर पैसे देने वाले चौधरी की पहली रात उस लड़की के साथ बिताने की मांग को समाज ने किस ढंग से देखा? इस पूरी बात में उसे किसी ने नहीं धिक्कारा। किसी ने उसकी इस घिनौनी हरकत की भर्त्सना नहीं की। आखिर ऐसा क्यों? सोचना चाहिए। कुछ करना चाहिए? समाज का बिगाड़ तेजी तै होण लाग र्या सै।

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