सोमवार, 17 अक्टूबर 2016

असल बैरी - साम्राज्यवाद


जित म्हारे देश मैं कुछ अमीर लोग सैं अर वे आड़े के गरीब लोगां का शोषण करैं सैं इस तरियां एक गरीब देश के रूप मैं म्हारे राष्ट्र का शोषण भी कुछ अमीर देशां द्वारा अर उनके नियंत्रण मैं काम करण आली संस्थावां द्वारा कसूते ढाल कराया जावण लागरया सै। धर्राटा ठा राख्या सै। बहोत से कारणां तै म्हारा भारत देश इन अमीर देशां व इनकी कटपुतली संस्थावां के कर्जे के जाल में फंस लिया सै अर इसे करकै म्हारी बांह बी कसूती ढाल मरोड़ी जावै सै। ज्यूकर गाम मैं ब्याज पै पीस्से देवनिया बीस ढाल की बेगार करावै अर जित चाहवै उड़ै वोट गिरावै न्योएं ये कर्ज देवण आले म्हारी आर्थिक अर विकास की नीतियां पै भी तरहां तरहां के दबाव बनावैं सैं। म्हारे देश मैं राज करणियां फेर न्यों कहवैंगे अक बांह कोन्या मरोड़ राखी म्हारी, हम तो अपने स्वामी रामदेव जी आला प्राणायाम कररे सां। वैश्वीकरण, सुधारीकरण, उदारीकरण अर निजीकरण के शगूफे म्हारी कष्टां की रामबाण दवाई म्हारले शासक बी बतावैं सैं। इन सुधारां की कोल्हड़ी सिर्फ भारत भारत मैं कोन्या चाली या ज्यादातर गरीब देशां मैं म्हारे तै बी पहलम चला ली। उड़ै इसनै माणसां की जो गत बनाई सै उसका हम सबनै बेरा सै फेर हम फेर बी न्योएं कहवां सा अक याहे रामबाण दवाई सै गरीबी दूर करण की। इस वैश्वीकरण अर निजीकरण की थोथ म्हारे सबकै साहमी आली अर रही सही कसर और पांच सात साल मैं पूरी हो लेगी। सच्चाई अर कड़वी सच्चाई या सै अक गरीबी अर बेरोज़गारी दूर करण की खातर या बात लगाकर साफ होन्ती जावै सै अक साम्राज्यवादी शोषण का विरोध हो। इसमैं सबतै बड्डी दिक्कत या सै अक साम्राज्यवादी देशां के धोरै ए सबतै घातक हथियार अर फौज की ताकत भी सै। सीधी-सीधी टक्कर का मतलब साफ सै के बगैनी म्हारी गेल्यां। प्रतिरोध के म्हारे तरीके के हों? यक्ष प्रश्न सै यो।
पहलम तै भारत मैं एक ईस्ट इंडिया कंपनी आयी थी अर सहज सहज दिल्ली की गद्दी पै कब्जा कर लिया। ईब तो हजारां बदेशी कंपनी छागी भारत मैं। सीधे गामां ताहिं पहोंच बना ली। वैश्वीकरण अर निजीकरण की नीतियां का विरोध जीवन मरण का सवाल होग्या भारत के किसान की खातर अर कर्मचारी की खातर। एक ढाल का प्रतिरोध जो सोच्या जा सकै सै वो सै अक आपां लोगां के बीच मैं जमकै प्रचार करां अक वे बदेशी कंपनियां का सामान ना खरीदैं। दाल मशाले युवक युवती तैयार करैं अर स्वदेशी का साथ मैं प्रचार करैं। गीत गावैं नाटक दिखावैं, घर-घर अलख जगावैं। अमरीका की दादागिरी खोल कै दिखावैं। इस ढाल एक तीर तै कई निशाने पै आज्यांगे। म्हारे नौजवान अपनी सामाजिक सार्थक भूमिका निभाज्यांगे।
युवा लड़के लड़कियां नै दहेज का डटकै विरोध करना चाहिये। ब्याह पाछै दहेज करकै जै पत्नी पै कोए अत्याचार होवै सै तो उसका मजबूती से विरोध करना बहोत जरूरी है। परिवार मैं, आस पड़ौस मैं समाज मैं किते बी लिंग के आधार पै भेदभाव होवै सै तो इसनै रोकण का जतन जरूर करना चाहिये। खाप की स्वयंभू पंचायतां के दकियानूसी फैंसल्यां का विरोध करे बिना म्हारा गुजारा कोन्या। म्हारे संविधान नै ब्याह शादियां के जो कानून बनाये सैं उनके हिसाब तै ब्याह शादियां ताहिं सामाजिक मान्यता मिलनी चाहिये। स्वयंभू पंचायतां नै समानान्तर न्याय प्रणाली चलावण का कोए हक नहीं सै अर यू गैर कानूनी सै। हरियाणा मैं लोगां की पिछड़ी सोच का फायदा ये स्वयंभू पंचायत ठायें जावैं सैं। आपां मूकदर्शक बनकै इनकी गेल्यां शामिल होकै समाज मैं न्याय की साथ खड़े होवण की जागां अन्याय के साथ खड़े हो ज्यावां सां। म्हारी सेहत के बारे मैं जानकारी की कमी करकै अर कई डाक्टरां अर दवा कंपनियां की मिलीभगत के कारण म्हारी अज्ञानता का अनुचित फायदा ठाया जावै सै अर म्हारे दुख दरद बढ़ ज्यां सैं। इसकी बाबत जागरूकता अभियान अर जित संभव हो चिकित्सा उपलब्ध करवाना भी बहुत सार्थक सामाजिक काम सै। इसे तरियां अनपढ़ लोगां नै पढ़ावण का काम भी सार्थक काम सै अर इसकी गेल्यां जागरूकता का काम भी जुड़ ज्यावै तो सोने पै सुहागा। शिक्षा में नीतियां के स्तर पै मौजूद विसंगतियां का विरोध अर सुधार की खोज बहुत महत्वपूर्ण काम सै समाज सुधार का।
जड़ बात या सै अक समाज नै रसातल मैं जावण तै बचावन की खातर एक नये नव जागरण रूपी समाज सुधार आंदोलन की जरूरत सै जिसमैं महिलावां की, दलितां की अर नौजवान लड़के लड़कियां की बहोत महत्वपूर्ण भूमिका सै। हरियाणा मैं यू काम कितै कितै सै अर रफ्तार बड़ी धीमी सै। इसकी पहचान करना युवा वर्ग का पहला काम सै। सामाजिक क्षेत्र के सवालां पै साफ समझ बनाकै आगे बढ़ना पड़ैगा। खेती की दुनिया मैं आई खड़ौत अर कम पैदावार के कारण टोहवने पड़ैंगे। समझाना पड़ैगा किसानां ताहिं अक आत्महत्या नहीं, आत्म बचाव का आंदोलन खड्या करना पड़ैगा। साम्प्रदायिक ताकत म्हारी एकता नै तोड़न आवैंगी बार बार फेर उनतै खबरदार रहना बहोत जरूरी काम सै।
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