गाम मैं सते, फते, नफे, सविता, सरिता, कविता अर धापां ताई एतवार नै कल्लेवार सी कट्ठे होज्याया करैं किमैं दुख-सुख की बतलावण की खातर। इस बैठक की एक खास बात सै अक इसमैं भागीदारी रलमफलम हुया करै। छोरी बी, बहू बी, ताई बी, दलित बी, बैकवर्ड बी, मुसलमान बी, पंजाबी बी, बिहारी बी, जाट बी, अर बाह्मण बी शामिल होवैं सैं अर अपनी बात खुलकै करया करैं। मेरे ख्याल मैं राम राज इसे ढाल की बैठकां आले गामां आला राज रह्या होगा कदे। फेर इब्बी कितै कितै इसे रामराज के खण्डर बचरे सैं अर यू गाम बी इनमां तै एक लाल्यो। बात बीमारी पै चाल पड़ी। ताई बोली मनै तो या सांस की बीमारी अर यू गठिया बा कोन्या टिक्कण देेन्ता। सारे डाक्टरां का इम्तिहान सा लेकै देख लिया फेर कोए आराम नहीं। देशी बी खाकै देखली। नेड़े धोरै कोए सरकारी अस्पताल बी कोन्या। रात नै कई बै बहोत दिक्कत बणज्या सै। फते बोल्या मनै तो या खाज कोन्या टिक्कण देन्ती। के थोड़े डाक्टरां धोरै हांड लिया। सते नै टोक दिया - मेडिकल मैं गया था।
फते मन सा मारकै बोल्या - उड़ के बी धक्के खालिये चमड़ी आले महकमे आले बी हार कै न्यों बोले - यासै तेरै अलरजी जो होसै अल्लाह की मरजी। सरिता एकदम कूद कै पड़ी - रामदेव जी का इलाज नहीं करया। फते बोल्या - कैम्प मैं जावण का तो ब्योंत कड़ै फेर ताई कै दो तीन बै टीवी पै सुन्या इसके बारे मैं उड़ै बी कोए जिकरा कोन्या पाया। नफे पेट नै पकड़ कै अर उठ कै चाल पड़या तो सविता बोली नफे जी थाम के सारी हाण पेट नै पाकड़ें हांडे जाओ सो? नफे बोल्या - बूझो मतना सविता जी। मरोड़ होरी सैं। तीन म्हिने हो लिये, दवाई खा खाकै या एसिडिटी की बीमारी और पाल ली। सविता बोली मेडिकल मैं दिखाकै आ। दखे मंगलवार आले दिन जाईये उड़ै एक लाम्बा सा डाक्टर बैठै सै। मैं तो जमा बारा बानी कर करदी उसनै। बोल मैं एक सत सै उसके तो आधा तो मरीज उड़ै ए ठीक होले सै। कविता ईब ताहिं चुपचाप सुनै थी वा बोली - ये तां सारी बीमारियां साडे पेके चे बी हैंगी। उथे तां डिगी दे पानी दी थांते पानी वी ट्यूबवैल दा पीन्दे नै।
नफे बोल्या - मेडिकल का एक डाक्टर सै अपने पड़ोसी गाम का ओ न्यों कहवै था अक उनके गाम मैं बी ये बीमारी खूब बधरी सै। अर ओ तो मनै न्यों कहवै था अक साफ पानी कोन्या गामां मैं इस करकै ये बीमारी सैं सारे कै गामां मैं। अर उसनै तो मेरे तै बूझया अक ट्यूबवैल का पानी पीओ सो ओ टैस्ट बी करवा कै देख्या सै अक ओ पीवण जोा बी सै अक नहीं? मैं न्यों समझया अक डाक्टर मजाक करै सै मेरी गेल्यां। ओतो न्यों कहवै था अक पानी नै उबाल कै पीया करो। उनै के बेरा अक कितना ईंधन चाहिये। कविता बोली - ये डिग्गी का पानी बी तां टैस्ट करवाके देखना चाहिये कि इसदी बी क्लोरीनेशन ठीक किती जान्दी है के नहीं। ताई बोली या के बला होसै? सविता नै बताया कि यू डिग्गी के पानी नै साफ करण का एक तरीका सै। कविता ने बताया कि उनके गाम खरल में ज्ञान विज्ञान वाल्यां ने एक सर्वे किता हैगा 500 घरां दा और उसमें ये बात उभर के आई हैगी कि इन परिवारां दा बीमारियां दे इलाज ते एक साल विच 11 लाख रपईये खर्चा आया हैगा। एक तां महंगाई इनी दूजे बीमारियां ज्यादा तीजे अस्पतालां, डाक्टरां ते दवाईयां दी कमी। साडे वरगे बन्दे की करन? नफे सिंह बोल्या - अस्पतालां का तो भट्ठा बिठा दिया। बात तो याबी सै अक जै ये बीमारी गन्दे पानी करकै होवैं सैं तो डाक्टर साफ पानी किततैं ल्यावैंगे। जिननै साफ पानी का इंतजाम करना सै उनकै तो ग्यारा-ग्यारा हजार की माला घालां सां आपा। सरिता बोली - तो फेर के करां/न्योंए बीमार होकै मरते रहवां?
सते बोल्या - हैल्थ सब सैंटर की कर्मचारी तै बूझां अक के करां? सरिता बोली - बूझल्यो। फेर ट्यूबवैल के पानी का टैस्ट क्यूकर होवै अर कड़ै होवैगा? डिग्गी का पानी बी टैस्ट करवाना चाहिये। अर एमएलए धोरै चालना चाहिये एक पीएचसी खुलै म्हारे गाम मैं अर म्हारी सीएचसी मैं पूरे डाक्टर लाये जां। सते बोल्या - लोग कहवैंगे ये ‘बैठक’ आले बी राजनीति करण लागगे। फते बोल्या - जै पीवण के साफ पानी की मांग करना अर बीमारी के इलाज खातर अस्पताल की मांग करना राजनीति सै तो फेर ठीक सै हम या बात मान लेंगे अक हम राजनीति करां सां। देखी जागी, मरना उं बी सै अर न्यूं बी सै तो कुछ करकै तो मरां। म्हारे बालक तो पेट पाकड़ें नहीं हांड्या करैंगे। बाकी आगली बैठक मैं चरचा करांगे। हम बिना बात की बातां पै तो गैहटा तारें रहवां सां फेर म्हारे जीवण मरण के सवालां नै आपां राजनीति का नाम देकै कन्नी काटना चाहवां सां। असल मैं हमनै अपने जिम्मे के काम करने त्याग दिये। कितने त्याही यां आपां! न्योंए एक दिन बामरी के कारण इस शरीर नै बी त्याग द्यांगे।
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