60 साल मैं के खोया, के पाया
यो पन्दरा अगस्त फेर आया
सते फते नफे सविता कविता सरिता और ताई भरपाई फेर शनिवार नै जन चेतना केंद्र मैं कट्ठे होगे अर बात चाल पड़ी पन्दरा अगस्त पै। सते बोल्या - हमनै 47 मैं आज़ादी पन्दरा अगस्त नै पाई थी अर 66 मैं हरियाणा बण्या जिसकी खातर भगत सिंह नै फांसी अर गांधी जी नै गोली खाई थी। ठारा सौ सतावण मैं आज़ादी की पहली जंग लड़ी लाखां लोगां नै कुर्बानी दी थी। किसान लड़े, कारीगर लड़े, बीर लड़ी, मर्द लड़े, राजे लड़े, रजवाड़े लड़े, लजवाणे के भूरा निंघाइयां लड़े। फते बोल्या - हरियाणा मैं भी तो बहोत से लोगां नै ज्यान की बाजी लाई थी। अपने खिडवाली गाम के ग्यारा लोग शहीद हुए। नफे बोल्या - के नाम थे उनके? सते बोल्या - इनके नाम थे बही शेख, लालू बालमीकी, तिरखा बालमिकी, मोहमा शेख, जुलफी मौची, सुनार रामबक्स, बेमा बालमिकी, इदुल मौची, मुफी औला पठान, मोहर नीलगर, सायर बालमिकी, अर सुंनाकी बालमिकी। खास बात तो या सै अक खिडवाली के कई मानसां धौरे बूझी इनके बारे मैं फेर किसे नै बेरा ए कोनी इनका। सविता बोली - म्हारे हरियाणा की यादाश्त कमजोर सै। इसे करके तो पूरे देश मैं 1857 राष्ट्रीय विद्रोह की 150वीं वर्षगांठ मनाई जावण लागरी सै अर हाम हाथ पै हाथ धरे बैठे सां । कविता बोली - और के मेवात मैं सदरुदीन किसान नै अपनी शहादत दी थी। ताई भरपाई बोली - 1857 अर 1947 के बीच मैं भी तो बहोत से लोगां नै कुर्बानी दी थी देश की आज़ादी की खातिर। हरियाणा के फौजी आजाद हिंद फौज मैं शामिल हुए। गांधी, नेहरू, भगत सिंह, अंबेडकर हर नै भी तो कुर्बानी दी।
फेर सवाल यू सै अक जिसी आजादी का सपना भगत सिंह हरनै देख्या था वा आजादी म्हारे पूरे भारत मैं अर म्हारे हरियाणा मैं आई अक नहीं? इस साठ साल की आजादी मैं के खोया के पाया? नफे बोल्या - और तो बेरा न फेर हरियाणा नै तो आर्थिक मोरचे पै तरक्की के सारे रिकाट तोड़ दिये। एयरकन्डीशन्ड जीवन शैली पै पहोंचग्या हरियाणा। घर मैं, कार मैं, स्कूल मैं, दफ्तर मैं, बाजार मैं, सारै एयरकन्डीशनर छागे। साइनिंग हरियाणा सै म्हारा आज। कविता बीच में बोल पड़ी - नफे बस बहोत होली तेरे साइनिंग हरियाणा की। इसका असली रूप बहोत दूसरा सै - सफरिंग हरियाणा। आर्थिक जगत मैं जित इतनी तरक्की करी सै उड़ै ए समाजिक स्तर पै आज बी हरियाणा बहोत पाछै सै। पाछले साल का लिंग अनुपात एक हजार पै आठ सौ बीस सै। पढ़े लिख्यां मैं यो अनुपात एक हजार पै छह सौ सतरां का सै। दलितां की हालत का के जिकरा सै। महिलावां पै घरेलू अर बाहरी हिंसा बढ़ती आवै सै। नफे बोल्या - कविता तनै तो हमेशा चीजां मैं मीन-मेख काढ़ण की आदत सी होगी। ताई भरपाई बोली - मीन मेख का सवाल नहीं सै। जिस आजादी अर तरक्की का तनै जिकर करया सै वह तो दस प्रतिशत आबादी धौरे मुश्किल तै पहुंची सै। हरियाणा के 90 प्रतिशत नै जिनमैं दलित, महिला अर युवा लड़के-लड़की शामिल सैं, उननै तो मेहनत करकै हरियाणा बनाया सै फेर इस तरक्की का फल तो चाख कै बी कोनी देख लिया। हमनै आजादी के संघर्ष मैं जो जनतांत्रिक अधिकार संविधान मैं हासिल करे थे वे कड़ै पहोंचे सैं म्हारे परिवारां मैं? या पिछड़ी सोच, रूढ़िवाद अर अंधविश्वास की जड़ता अर इसके रुखालीये स्वंभू पंचायतें इनै कड़ेै बड़ण दिये नागरिक अधिकार म्हारे परिवारां मैं? इननै तो आजादी सै अंतरजातीय ब्याह करण आल्यां नै फांसी तोड़ण की, फतवे करकै तबाह करण की, इननै आजादी सै दुलिना कांड की, गोहाना कांड की, हरसौला कांड की।
इन तथाकथित पंचायतां नै आजादी सै आसण्डा कांड की, जौन्धी मैं पति-पत्नी नै बाहण-भाई बणावण की। नये बास मैं माणस मरवावण की। रविदास कहगे - ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिलै सबन को अन्न। छोट बड़ो सब सम बसैं, रैदास रहै प्रसन्न। सोचना चाहिए साठ साल की आजादी का हरियाणा मैं के मतलब सै?---
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें