पुलिस हरियाणा की
रोज अखबारां मैं पढ़ां सां अक आज पुलिस नै गुडगामां मैं फटे चक दिये अर आज अमृतसर विच मंडी वाले कुट दिते। कुछ दिन पहले पटना मैं कर्मचारियों को तमाशा दिखा दियो। जड़ जित देखो वहीं पै पुलिस आने आले साल 2006 मैं के होगा इसका ट्रेलर से दिखाती पाई 2005 मैं। थाण्यां में बलात्कार, मार-पिटाई, हिरासत मैं माणस की मौत, एनकाउनटर मैं फलाणा बदमाश ढेर कर दिया, गरीब घूमदे रहे फेर केस दरज नहियो किता, रात नै पुलिस चौकी जाना पड़या तो ड्यूटी पै तैनात पुलिसिया पूरा टुन था अर सही सुर मैं बोल्या, गजब है हरियाणा की पुलिस। अखबारां मैं और बेरा ना किसे किसे तरां की खबर पढ़ने को मिल्ज्यांगी। हम इसी किसी ट्रेनिंग देवण लागगे इन पुलिस आल्यां नै? नेतावां के आगै बिछण मैं कोए शरम नहीं महसूस करदे आपां। सिफारिस हो तैं बंदूक का लाइसेंस दो दिन मैं बणज्या अर उल्टी सिफारिस हो तै दो घंटे मैं हथियार जब्त। पुलिस का पहलम आला खारणा रह्या ना अर नये की के कहवां जो भरती ते पहलम अर भरती के बाद मैं पुलिस का नौजवान भुगतै सै उसकी चरचा नहीं कितै। पुलिस के सिपाही की आतम छवि बिगाड़ण मैं म्हारे पूरे समाज की भूमिका सै। एक कहावत सै अक रक्षक बणगे भक्षक देश के, बाड़ खेत नै खावै आज, दुखी माणस दुख अपना, कित जाके सुनावै आज। म्हारे घरां मैं चाचा का छोरा पुलिस सब इंस्पेक्टर सै। कई बर खाली बैठे हों तो ओ पुलिस महकमें की भीतर बाहर की सारी बात बता दिया करै। कई बर तो पुलिस नै संदक पता हो सै अक कतल किसनै कर्या फेर पचास हजार गोज मैं घलगे तो नजर घूमैए कोनी कातिल की तरफ। दूसरी बात या बी हो सकै सै अक ऊपर तै फोन की घंटी बाजै अक फलाने का नाम निकाल दिया जाये तो मिन्टां मैं नाम बाहर। फेर बी फिकर की कोए बात नहीं सै हरियाणा तरक्की करण लागर्या सै, चारों तरफ सुरक्षा ए सुरक्षा सै। बदमाशां की हरियाणा मैं कोए जागां नहीं सै। दूसरे देशां मैं जाकै पाछा देख्या सै कईयां नै तो। पुलिस नै सब किमै ‘टाइट’ करकै धर दिया, जो कुछ गलत होर्या था वो सब ‘राईट’ कर दिया। काला काम हो चाहे हो भूरा सब ‘व्हाइट’ कर दिया, जो दिन मैं नहीं हुया वो पूरा ‘नाईट’ मैं कर दिया। खत्म सभी ‘फाईट’ कर दिया। हरियाणा का पूरा लम्बा ‘हाईट’ कर दिया। जिसनै बैक ‘बाईट’ करी उसकी ढबरी ‘टाईट’ करकै जेल मैं डाल दिया अर उड़ै उसकी ‘डाईट’ बंद करवा दी। के कहने म्हारी पुलिस के!
फेर एक बात सै कितै कितै आज बी पुलिस में मानवता मिल ज्या सै। एक बर एक पुलिस इंस्पेक्टर कै जिम्मे एक कतल के केस मैं तीन मुजरिमां नै पकड़ कै ल्याने की ड्यूटी लागगी। थानेदार गेल्यां तीन सिपाही देख कै एक महिला नै दरवाजा खोल दिया। आंख मलदे तीनों माणस गहरी नींद तैं उठकै आगे अर पेश होंगे। एकबै इनस्पेक्टर नै आव देख्या ना ताव देख्या अर हथकड़ी लादी तीनूओं कै। चाल्लण की तैयारी करली। जीप मैं बैठण तै पहलम इंस्पेक्टर के मन मैं ख्याल आया अक जिसनै कतल कर राख्या हो ओ अपने घर मैं न्यूं ताणके गहरी नींद मैं कोनी सो सकदा। उसने तीनू माणस छोड़ दिये। थानेदार पै बहोत दाब आई उननै पकड़ण को फेर थानेदार कोनी मान्या। इन्कवारी दूसरे थानेदार ताहिं दे दी। ओ तीनूआं नै पाकड़ कै लियाया अर मुकदमा शुरू होग्या। इन तीनूआं के वकील नै जज साहिब ते मांग करी अक पहलम आला थानेदार गवाही खतर बुलाया जा। ओ हाजिर होग्या। वकील नै बूझया - थामने ये पकड़े क्यू ना? थानेदार बोल्या - मेरे दिल नै गवाही दी अक ये मुजरिम कोन्या। ये तो घर मैं गहरी नींद सोवण लागरे थे। कातिल इतनी गहरी नींद अर वो बी अपने घर में नहीं सो सकदा। जज कै बात सही समझ मैं आगी अर उसने तीनूं बरी कर दिए।
न्योंए एक आई जी पुलिस बताया। पूलिस आला कोए बी गुण कोनी उसमैं। पुलिस सुधार प्रोग्राम के लाग्या रहवै सै अक पुलिस की छवि सुधरनी चाहिये। कितै साहित्य बेचदा पावैगा अर कितै गोस्ठी करदा दीखैगा। माणस तै माणस की ढालां बात करैगा। ‘भगत सिंह से दोस्ती’, ‘प्रेमचंद से दोस्ती’ करदा हांडे जावै सै। और बी कई उदाहरण तो पा ज्यांगे हरियाणा पुलिस मैं। फेर पुलिस तै साफ-सुथरी छवि की बाट उस बख्त देखना जिब सारा समाज पाताल मैं जावण लागर्या हो, पुलिस गेल्यां ज्यादती नहीं सै के? एक बर पुलिस आल्यां के नेशनल स्तर के खेल होवैं थे। बंगाल, केरल, आंध्रप्रदेश, हरियाणा कई प्रदेशां के पुलिस के खिलाड़ी आ रे थे। रात नै कठ्ठे बैठ कै गप मारैं थें। एक बोल्या साड्डी पंजाब दी पुलिस सब नालों चंगी है। बंगाली बोले - नहीं हमारा अच्छा है। एक ने कहा ‘हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े लिखे को फारसी क्या।’ ऐसा करते हैं एक शेर को जंगल में छोड़ देते हैं, जिस प्रदेश की पुलिस सबसे कम समय में पकड़ कर ले आयेगी वह नंबर वन होगी। आंध्र की टीम नै बैठ कै योजना बनाई अर दो घंटे मैं शेर हाजिर कर दिया। बंगाल की टीम बी ढाई घंटे मैं पकड़ ल्याई। हरियाणा की टीम गई। सांझ होगी उल्टी ए कोनी आई। फिकर होगी। आगले दिन गये जंगल मैं टोहवण तै देख्या अक एक रीछ बांध राख्या पेड़ कै अर लागरे गुड़गामा की पुलिस की ढालां। रैफरी ने कहा - यह क्या कर रहे हो भाई? शेर नहीं पाया? हरियाणा की पुलिस बोली - बस पांच मिन्ट और डट ज्याओ पांच जूत लाग्गे नहीं अर यू ईब हां भर ले सै अक हां मैं शेर सूं। आई किर्म समझ मैं अक ईब्बी कसर रैहगी? मिलकै सोच्चणा पड़ैगा। फेर सोच्चे कौण? म्हारे बेटा-बेटी सैं ना पुलिस मैं। अर जिब आपां बिजली की समस्या लेकै सड़कां पै उतरां सां तो ये बेटा-बेटी म्हारा क्यूंकर सत्कार करैं सैं? पुलिस बनाई तो जनता की हिफाजत खातर अर या करै सै के? देखियो आगै आगै के और देखना पड़ैगा।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें