भूत प्रेत कोन्या होन्ते
मैं बस मैं बैठा था जीन्द जाने के लिए। यात्रियों में बहस हो रही थी कोए कह रहा था कि धरती पर सारी चीजें हैं जिसके लाग्गै ओए मान्नै सै भूत नै। मैं भी कभी नहीं मानता था लेकिन म्हारी भाभी मैं आ गया भूत। वो 8-10 आदमियों को फैंक रही थी जैसे हिन्दी फिल्म का हीरो गुन्डों को फैंकता है। दूसरा बोलया मैं भी नहीं मान्या करदा पर मेरे भाई के लड़के मैं आ गया, वो उर्दू मैं बोल रहा था। अब मैं मानता हूं कि धरती पै सब कुछ है। जो आदमी उनके साथ बहस कर रहा था वह अकेला पड़ गया और चुप हो गया। तभी जयप्रकाश जो बस में ही था, ने भी बहस में हिस्सा लिया। वह बोला - पीछे क्या हुआ उस पर तो बहस करना ठीक नहीं लेकिन अब किसी को कुछ हो रहा हो तो मैं ठीक भी करूंगा और यह भी साबित करूंगा कि इस घटना के पीछे भूत नहीं बल्कि कोई और कारण है। तभी वह एएसआई बोला - हमारे घर में तो अब भी रोज कुछ ना कुछ घटना घट रही है। परसों ही मेरा एक्सीडेंट हो गया। मरते-मरते बचा हूं। हमारे घर चलो और ठीक करके दिखाओ, फेर मानूंगा आपनै। और जो कुछ लेणा चाहो वह भी दूंगा।
जयप्रकाश ने उसका पता ले लिया और अपना पता दे दिया। मैंने भी जयप्रकाश का पता नोट किया और टेलीफोन नम्बर भी। जयप्रकाश ने एएसआई को कहा - जब जरूरत हो हमें बुला लेना। हम आ जायेंगे। एक हफ्ते के बाद मैंने जयप्रकाश से टेलीफोन पर पूछा तो उसने बताया। अगले ही दिन वो खुद ही लेवण आग्या अर बोल्या - आप ईबे चालो। आज रात म्हारे आंगन मैं खून, सरसों, लोहे की कील, हल्दी व पतासे पड़े मिले। मैं और सोहनदास ही थे दफ्तर मैं। सोहन दास नै भी कहया अक थाम इबै जाओ। जयप्रकाश उनके साथ चला गया। वहां जाकर उसने देखा व बताया - मैंने घर की सारी चीजें देखी। वह जो सामान आया था वहीं पड़ा था। जब मैं हाथ लगाकर देखने लगा तो उस एएसआई की पत्नी बिमला ने कहा - भगत हाथ ना लावै ना तो आप का भी कुछ हो जायेगा। भैंस का कटा थण व पूंछ भी देखो। उसके बाद सभी सदस्यों से बात की। उनके घर मैं एएसआई, पत्नी बिमला अर एक लड़का नीरज जो बारहवीं मैं साईंस का विद्यार्थी था। एक लड़की नीतू जो 8वीं कक्षा में पढ़ै थी। उसके बाद मैंने एक-एक से बात की। दोनों बच्चों ने कोई खास जानकारी नहीं दी। वे कुछ मजाक भी कर रहे थे और डर भी रहे थे। उसके बाद मनै बिमला को अन्दर बुलाया। बिमला ने बताया - ये घटनाएं तीन महीने से घट रही सैं। सबसे पहले हमारे घर मैं कभी कुछ तो कभी कुछ पड़ा मिलता। मैं घरवाले से बात करती तो वो मुझे धमका देते अर कहते कि यू तेरा बहम सै और कुछ नहीं। उसके बाद जो भैंसों के साथ हुआ फेर वे कहण लगे अक किसी पड़ौसी का काम सै, तुम देखती रहया करो। फेर मनै कई स्याणों को बुलाया। उन पर चोरी से ही 15 हजार रुपए खरच करे। फर्क कोनी पड़या।
मैंने पूछा - आपके पड़ौस में किसी के यहां स्याणा आता-जाता है। बिमला ने बताया कि मेरी जेठानी बुलाती भी है और जाया भी करै। मैंने कारण पूछा तो बताया कि इसका एक ही लड़का था वह एक एक्सीडैंट मैं मरग्या। उसके बाद यह चाहती है कि इसे लड़का हो जाये। शायद इसीलिए करती है। बाद मैं मनै एएसआई को बुलाया अर खून पड़ण आली घटना के बारे मैं पूछया अर जित वो सोया था वा जागां बी देखी। उसनै बताया अक दरवाजा बन्द था। करीब 11 बजे मेरी छाती पर मैंने कुछ गीला महसूस करया। मैंने खड़ा होकर लाइट जगाई तो देखा मेरी दरी पर काफी खून पड़ा था। उस दिन के बाद मैं घर में सोने से डरता अर मेरी पत्नी की तो नींद आणी बन्द होगी। मैं उनके साथ छत पर गया। भाई के घर की छत पर आसानी से जाया जा सकता था। फेर मनै जहां एएसआई की चारपाई थी उस जगह की छत को देखा। वहां कुछ नई मिट्टी पड़ी थी। उसको खोद कर देखा तो एक पोलीथीन का लिफाफा मिला जिसके भीतर कुछ खून ईब बी था लेकिन सूख्या औड़ था। एएसआई नै वो लिफाफा काढ़ लिया। उसके बाद एएसआई कै सारी कहानी समझ मैं आगी। बोल्या किसनै दाब्या होगा? मैंने कहा उसका तो मैं पता कर ल्यूंगा लेकिन थाम उसके साथ झगड़ा नहीं करोगे। फेर मैं उसके भाई के घरां गया। वहां उसकी भाभी श्यामो एकली थी।
उसनै मेरे को प्रणाम किया। चाय-पानी पूछा अर बोली - महाराज थाम इनका तो इलाज करे रहे सो म्हारे घर का भी कुछ देखो। मैंने चारों तरफ नजर घुमा कै सारी बातें बता दी जो मुझे पहले ही मालूम थीं। उसको लगा कि ये तो सब-कुछ जाणै सै। पहोंच्या औड़ स्याणा सै। फेर मनै कहया - आप अपने देवर नै क्यों परेशान कर रही सो? के इसतै लड़का हो ज्यागा? एक-दो बर तो उसनै इनकार करया फेर थोड़ी बार मैं उसनै सब हां कर ली और या भी मानगी अक आगे तै ईसा नहीं करूंगी। फेर इलाज तो म्हारा भी कर दयो जिसतै म्हारा घर बस्या रैहज्या। फेर मनै समझाया अक ऐसा करने तै अर कै इस तरियां स्याणे बुलाणे तै बच्चे पैदा नहीं होन्ते। वो ठग हों सैं, उनके चक्करां मैं हमनै पीस्सा अर बख्त बर्बाद नहीं करना चाहिये। श्यामो नै कहया - जो ईसा कुछ नहीं होन्दा तो तनै म्हारे घर की सारी बात क्यूकर बता दी? मैंने कहा - ऐसा कोई नहीं बता सकदा। मैंने यह सब जानकारी आपकी देवरानी से पता की थी, उसके बाद श्यामो को कुछ समझ मैं आई।
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