पाणी पै लाठ्ठा बाजैगा
पाणी पै गामां लाट्ठा बाजता देख्या था खेत क्यारां के पाणी के वारां पै। फेर ईब तो न्यों सुणण मैं आवै सै अक जो तीसरा महायुद्ध होवैगा तो ओ पाणी के मामले पै होवैगा। पाणी पै दुनिया का संकट तावला ए इसा रूप धारण कर लेगा जिसतै पाणी उसे तरियां खरीद्या अर बेच्या जावैगा जिस तरियां पाइप लाइन अर टैंकरां के जरिये तेल बेच्या जावै सै। सच्चाई या सै अक 1.3 अरब तै फालतू माणसां नै स्वच्छ पाणी उपलब्ध कोन्या। 2.4 अरब लोग साफ-सफाई के प्रबंध की सुविधा तै वंचित सैं। पाणी के संकट के कारण रोजाना लगभग 6000 लोग मरण लागरे सैं। इसतै फालतू आपातकाल का संकट और के हो सकै सै? आवण आले बख्तां मैं मानव समाज की मांग उसकी सप्लाई तै 30 प्रतिशत फालतू होगी। लगभग 40 देशां अर एक अरब लोगां के धोरै निकट भविष्य में पर्याप्त मात्रा मैं जल उपलब्ध नहीं होगा। सन् 2025 ताहिं इसे लोगां की संख्या बधकै 2.3 अरब ताहिं पहोंच जावैगी। आज छह अरब लोग इस दुर्लभ जल संसाधन की खातर एक-दूसरे तैं होड़ लावण लागरै सैं जबकि सन् 2050 ताहिं दस अरब लोग तिसाये होज्यांगे। इनमैं ज्याद महिलाएं अर कमजोर तबक्यां के लोग होवैंगे। भारत की शहरी आबादी का जो 38.38 प्रतिशत हिसा गरीबी की रेखा के नीचे रहवै सै उसनै आसानी तै पाणी उपलब्ध नहीं सै। जमीन्दोज पाणी मतलब धरती के तले का पानी जो सै उसका लगातार दोहन कर्या जाण लागर्या सै। खासकर आंध्रप्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश मैं यो दोहन बधता जावण लागर्या सै। पाणी का एक जागां तै दूसरी जागां ढोवण का राष्ट्रीय खर्च आये साल 15 करोड़ महिला दिवस सै अर जै पीस्यां मैं कीमत आंकी जावै तो इसका प्रतिवर्ष नुकसान 10 अरब रुपये सै।
भारत मैं पाणी तै जीवित बीमारियां तै आये साल 9 करोड़ मानव दिवसां का नुकसान होन्ता बताया। 1985 में 750 गाम इसे थे जड़ै पाणी का कोए स्रोत नहीं था। 1996 मैं इसे गामां की संख्या बधकै 65000 होगी बताई। म्हारे देश मैं 80 प्रतिशत बच्चे पाणी जनित बीमारियां के शिकार होवैं सैं अर इन मां तै प्रति वर्ष लगभग 7 लाख बालक मरैं भी सैं मतलब 1944 बालक रोज मरैं सैं। 4.4 करोड़ लोग पाणी की खराब क्वालिटी करकै नुकसान ठावैं सैं? इस खराब पाणी में लोहा, फ्लोराइड, नाइट्रेट, आर्सेनिक, भारी धातु अर खारा पाणी शामिल सै। पाणी की कमी के चलते दिल्ली-हरियाणा सीमा पै रोहतक रोड इलाके मैं दंगा भड़क ग्या था जिसमैं तीन पुलिस कर्मियों सहित 15 लोग घायल हुए अर अनेक वाहन क्षतिग्रस्त होगे थे। पूर्वी दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके मैं पाणी नै लेकै झगड़ा फैल ग्या जिसनै सांप्रदायिक रंग ले लिया। इस झगड़े मैं दो लोग घायल होगे थे। 18 प्रतिशत जल स्रोत प्रदूषित हो लिये। इस धरती पै पाणी की कुल मात्रा का 97 प्रतिशत हिस्सा महासागरों और समुद्रों में है। 2 15 प्रतिशत हिस्सा बर्फ के रूप में मौजूद सै तथा अन्य जीवधारियां अर लोगां की खातिर पाणी की जो मात्रा उपलब्ध बची सै वा सिर्फ 0.5 प्रतिशत सै। जल की इस अल्पमात्रा का वितरण भी सारी जागां समान ढंग तै नहीं होंता।
यू पाणी का संकट इतना भयानक और कितै कोन्या जितना भयानक यू भारत मैं सै। संयुक्त राष्ट्र के एक अध्ययन के हिसाब तै एशिया मैं प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष शुद्ध पाणी की उपलब्धता मात्र 3000 क्यूबिक मीटर सै। भारत मैं या मात्रा 2500 क्यूबिक मीटर सै। शंका जाहिर करी जावै सै अक 2005 तक भारत मैं पाणी का घोर संकट आखड्या होगा। अर यो होग्या। पाणी की किल्लत भारत में और बधी सै। हरियाणा मैं भी इस सबके चलते कई वातावरणीय समस्याएं साहमी आ खड़ी हुई। पहली बात तो याहे सै अक जितना पाणी हरियाणा की खेती न चाहिये उतना पाणी इसपै कोन्या। दूसरी बात याबी सै अक जितना पाणी सै उसका इस्तेमाल बी किस तरियां कर्या जावै सै। बहोत सी जागां पै धरती तै नीचे के पानी का स्तर बहोत नीचै जा लिया अर किसान की मुसीबत बी बधगी। हैंड पंप अर कुय्यां की जागां ट्यूबवैल के पाणी के कनैक्शन घरां मैं लिये जावण लागरे सैं। पाणी की समुचित निकासी की जागां बनी नहीं सै। गालां का कीचड़ बधग्या अर बीमारी बी बधगी। खाज बधग्या, दमा बधग्या, अर पेट की गैस की बीमारी बधगी। नहरों के पाणी का संकट बधग्या। रजबाहयां तै निकले खालां की खुदाई का रोला बधग्या। जोहड़ां का पानी ज्यादा प्रदूषित होग्या। कीटनाशक दवाइयां के इस्तेमाल नै पाणी मैं अर धरती मैं इनकी मात्रा बधा दी। इसतै बी बीमारी बधगी। बरसात के मौसम मैं पानी का कहर चारों कान्हीं देख्या जा सकै सै - चाहै शहर हो अर चाहे गाम हो। कुछ इलाक्यां में सूखे के हालात बने रहवैं सैं। इस पानी का भंडारण करना अर किफायती इस्तेमाल करना पानी की उपलब्धता बनाये राखण की खातिर जरूरी बात सै। हमनै सोचना पड़ैगा अक किस ढालां बहुमूल्य पाणी के प्राकृतिक स्रोतां का रखरखाव करां अर इननै प्रदूषित होवण तै बचावां ताकि मानवता का बड़ा हिस्सा स्वच्छ पाणी ताहिं पहोंच बना सकै। राजस्थान के किसानां का आंदोलन भी इसे ढाल पाणी की कमी करकै चाल रह्या सै। सोचो मेरे बीरा किमैतो।
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