किसी हो भारत की सरकार ?
सते, फते, सविता, कविता अर नफे सते हर के घरां बैठे थे। बात चाल पड़ी केंद्र की सरकार पै। सते बोल्या - पहलड़ी सरकार तै दुःखी होकै उसके धक्का मारकै तो इस सरकार नै ल्याये थे फेर इसकी बी चाल अर रंग-ढंग उसे बरगे लाग्गे मनै तो। फते बोल्या - कुछ तो फरक सै उसमैं अर इसमैं। इतनी वार मैं सते की बहु सरिता अर नफे की भाभी कमला बी उड़ै ए आगी। नफे अर उसकी घरवाली खजानी यूपी में तीन-चार दिन लाकै आये थे खजानी के पीहर में। कमला बोली - लैक्सनां का चर्चा जोरां पै सै उड़ै तो। सते बोल्या - यूपी के लोग किसी सरकार चाहवैं सैं? कमला बोली - यूपी आल्यां का तो मनै बेरा कोन्या अक वे किसी सरकार चाहवैं सैं फेर सविता अर गाम की कई लुगाई एक दिन बैठ कै जरूर बतलाई थी अक म्हारे देश की सरकार किसी होनी चाहिए? नफे बोल्या - तो आज थाम अपनी भड़ास काढ़ल्यो आच्छी ढालां। फते बोल्या - के गलत बात सै इसमैं? हमनै तो ताश खेलण तै फुरसत कोन्या ईसी बातां पै विचार करण की। हां, बोलो थाम नै किसी सरकार बनानी चाही। सविता बोली - हमतै ईसी सरकार चाहवां सै जो अमरीका के आगै गोड्डे ना टेकै। दूसरे देशां मैं बिना बात सेना भेजण की अमरीका हिम्मत ना करै। आजाद अर गुट निरपेक्ष विदेशी नीति अपनावै। नफे बोल्या - थाम इतनी दूर की क्यूकर बतलाई? जरूर इन ज्ञान-विज्ञान आल्यां की झपेट में आरी दिखो सो? कमला बोली - ओ अपना सतत शिक्षा का केंद्र नहीं खोल राख्या सै इन ज्ञान-विज्ञान आल्यां, नै, उसमैं चर्चा होरी थी। हां, तो और के बतलाई थी ईब तो पूरी बात बताओ।
सविता नै फेर बोलना शुरू करया - पूरे देश के हितां की रुखाली हो, चाहे कोए गरीब हो चाहे अमीर हो। धर्म के नाम पै, अर जात्यां के नाम पै कट्टरवादी उन्माद फैलाकै लोगां नै ना जलवावै। दुलिना अर गोहाना बरगे कांड ना होवण दे। गऊ के नाम पै लोगां नै ना भिड़वावै। सहशिक्षा का विरोध ना करै। कविता बोली - इसका मतलब ये सारे उल्टे काम म्हारी सरकारें करवावैं सैं अक म्हारा बी कोए दोष सै? सते बोल्या - इन बातां पै चर्चा फेर किसे दिन करल्यांगे, आज तो सरकार पै ए गैहटा उतरण दे। सविता नै आगै बताया - गरीबी का पक्का इलाज करण की गारंटी करैं। भूख तैं मरण आल्यां का खूब हांगा लाकै राह टोहवै। बेरोजगार छोरे-छोरियां ताहिं बेरोजगारी भत्ता देवैं। कविता हटकै फेर बोली - ईसी सरकार कड़ै सै मनै बताओ तो सही? सते बोल्या - बीच मैं टोक के गड़बड़ मत ना करो। कहे पाछै कह लियो अपनी बात। हां सविता तों अपना मीटर चालू राख। सविता बोली - जो भ्रष्टाचार नै जड़ तै पाड़ कै बगादे। नफे बीच मैं फेर बोल पड़या - ज्यूकर म्हारले सीएम नैं कर दिया करप्सन का खात्मा। सविता बोली - ना, असल में करप्सन का खात्मा करण आली सरकार। देश के कानून विदेशियां के हक मैं ना बदलैं अर देश की आम जनता के हकां की रुखाली करै। सार्वजनिक क्षेत्र के नवरतन कारखान्यां ने ना बेचै। काला बाजारियां नै जेल मैं ठोक दे। खेती में सरकारी निवेश ताहिं बढ़ावा देवै। नफे बोल्या - कसूता घोटा मार कै आरी सै सविता तंू तो। सते बोल्या - घोटा मारकै तनै पास करी थी दसमी जमात। सविता इन सारी बातां नै समझै सै जिबै तो तरतीब वार सारी बात करण लागरी सै। रट्टा मारकै ईसी बात कोन्या हो सकदी। सविता बोली - और चर्चा करूं अक छिक लियै? सते बोल्या - आज इस बारे में तों जो बताना चाहवै सै वे सारी बात बतादे। सविता बोली - ईसी सरकार जो सूखा राहत का बख्त तै इन्तजाम करै अर गाम के बेजमीन्यां के रोजगार का इन्तजाम करै। फसल की ठीक कीमत तय करै अर दूसरे देशां ते नाज ना मंगवावै। डब्ल्यूटीओ की दाब मैं ना आवै। खेत मजदूरां के खातर संसद में कानून पास करै। सबके स्वास्थ्य की गारंटी करै। बारहवीं ताहिं की शिक्षा सबनै मुफ्त देवै। संसद मैं अर विधानसभा मैं महिलावां खातर एक तिहाई रिजर्व करवावै। हड़ताल का अधिकार बरकरार राखै। बिजली का निजीकरण रोकै। नदी का कटाव रोकण की खातर पूरा ध्यान देवै अर दूरगामी योजना बनावै। फते बोल्या - ईसी सरकार के न्योंए थोड़े बणज्यागी? इसकी खातर तो कसूते पापड़ बेलने पड़ेंगे। सविता बोली - हम तो तैयार सैं पापड़ बेलण नै थाम अपनी बात बताओ? नफे कै गले नहीं उतरी ये सारी बात अक इसी बी सरकार हो सकै सै? उसकी पार्टी का ब्योंत नहीं था इन बातां मा तै दो बी पूरी करण का। बात नै घुमा कै बोल्या - कड़ै सै ईसा राज? सविता सहज दे-सी बोली - जिब देखण का मन बणावैगा तो ईसा राज कड़ै सै इस बात का बी बेरा तो लाए लेगा। सते बोल्या - जै ईसी सरकार कितै ना बी हो तो के होग्या? सोच्चण मैं अर विचार करण मैं के हरजा सै? देश आजाद करावण की बात तो पहलम विचार में आई होगी उसतैं पाछे अमल शुरू हुया होगा। सविता बोली - आज नहीं तो काल इन बातां पै गौर तो करना ए पड़ैगा। ये जो सोच्चण के नाम पै ताले ला राखे सैं ये खोलने बहोत जरूरी सैं। नफे बोल्या - के धिंगतानै खुलवावैगी? सविता बोली - पहलम तै मिलकै सोच-विचार करांगे, अर फेर सबनै साथ लेके चालांगे। कोए एतराज? नफे बोल्या - फेर किसा एतराज।
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