सोमवार, 26 सितंबर 2016

म्हारी शिक्षा - सोचां किमै

म्हारी शिक्षा - सोचां किमै
सत्ते फत्ते नफे कविता सविता सरिता अर ताई भरपाई शनिवार नै फेर कट्ठे होगे। सत्ते बोल्या - बहोत बढ़िया करया सरपंच नै। स्कूल कै ताला जड़ दिया। फत्ते बोल्या - क्यूं जड़ दिया? कविता बोली - रिजल्ट दसमी का पांच परसैंट आया सै। नफे बोल्या - और के, ये मास्टरनी आज्यां सैं रोहतक तै अर स्वैटर बुनें जावैं सैं। बालकां नै पढ़ावण की कड़ै फुरसत सै। सरिता बोली - फलाने गाम मैं तो एक बी मास्टरनी कोन्या स्कूल मैं फेर रिजल्ट तो उड़े का बी तीन परसैंट सै। उड़ै बी ताला लागना चाहिये। उड़ै कम रिजल्ट क्यूं रैहग्या? नफे बोल्या - उस गाम के स्कूल का तै इन शहरियां नै सत्यानाश कर दिया। न्यों कहवैं सैं जै ये गामां के बालक पढ़ा दिये तो म्हारे बालकां नै नौकरी कोन्या थ्यावै। ज्यां करके पढ़ात्ते ए कोन्या गाम आल्यां नै। कविता बोली - नफे बात किमै जंची नहीं। फलाने गाम मैं तो एक बी शहरी मास्टर कोन्या फेर रिजल्ट उड़े का बी छह परसैंट सै। सारे गामां आले रलदू मास्टर सैं उस स्कूल मैं तो। नफे सिंह कड़ै हार मानण आला था, बोल्या - उस गाम मैं मेरे मामा सैं। मामा का छोरा बतावै था अक उड़ै जाट अर बाह्मणां के बीच मैं लाठा बाज रहया सैं। जाट कहवैं ये बाह्मण ना पढ़ात्ते अर हैडमास्टर बी बाह्मण सै अर बाह्मण कहवैं सैं अक ये जाट मास्टर कोन्या पढ़ात्ते। दो जाट मास्टर सैं ऊधम तार राख्या सै स्कूल मैं। दारू पीवैं स्कूल मैं बैठ कै अर दूसरी कुबध करैं वे न्यारी। सत्ते बोल्या - इसे करकै मनैं तो अपने बालक गाम के स्कूल मैं तै काढ़ के परले गाम आले माडल स्कूल मैं भेजने शुरू कर दिये। ताई भरपाई बोली - तनै तो काढ़ कै माडल स्कूल मैं भेज दिये। तेरा तो चौखा ब्यौंत सै। फेर म्हारे बरगे के करैं दो किल्यां आले। सविता बोली - थारै तो ताई दो किल्ले सैं बी जिनकै धरती सै ए कोन्या अर कोए नौकरी ना वे कड़ै खंदावैं अपने बालकां नैं? सरकारी स्कूलां मैं तो ये म्हारे बरगे दलितां के बालक सैं कै गरीब जाट बाह्मणां के। इसे करकै किसे नै चिंता कोन्या स्कूलां मैं पढ़ाई की। प्राइवेट स्कूल हर गाम गेल्यां दो-दो, तीन-तीन होगे। उननै अपनी फीस तै मतलब सै अर कै बालकां की ड्रैस तै मतलब सै। इम्तिहान मैं बालकां नै नकल मरवाकै रिजल्ट बढ़िया कढ़वा लें सैं अपने स्कूल का। ताई भरपाई बोली - हम इनकै ताले लाकै के करना चाहवां सां? कमलू मास्टर जी बतावै या अक जितने छंटे औड़ मास्टर सैं अर, ये लैब आले सैं कै और क्लर्क सैं उनके तार तो ऊपर ताहिं फिट होरे सैं अर जो पढ़ावणिया मास्टर सै उनकी कोए सुणता कोन्या कै वे चुप रहवैं सैं। इस मारे मामले नै समझण खातर और पैनी नजर चाहिये अक म्हारे स्कूलां का इतना बुरा हाल क्यूं होग्या? सविता बोली - ये तो बीमारी के लक्षण सैं असल बीमारी की जड़ तो किते और सै। नफे बोल्या - दूसरयां नै दोष देवण तै पहलम हमनै अपणे गिरेबान मैं भी झांक कै देख लेना चाहिये। ये छोर-छोरियां के स्कूल न्यारे होने चाहिये। म्हारे कुछ भाई तो बहोत पहलम तै न्यों कहत्ते आये सैं। कविता बोली - नफे इन भाइयां नै महिला की शिक्षा का प्रचार तो खूब करया फेर सह-शिक्षा का विरोध करकै हरियाणा का नुकसान बी बहोत करया। नफे सिंह तो फूट पड़या - कविता या बात सही सै उनकी इस सह-शिक्षा नै बिगाड़ फालतू करया सै। स्कूलां मैं बलात्कार? कविता बी अड़गी अर बोली - सह-शिक्षा का विरोध गलत सै। औरत तो आज घरां मैं भी सुरक्षित कोन्या। घरां मैं भी उनके सगे संबंधियां धोरै बलात्कार की शिकार होवै सै औरत। न्यों तो औरत कित जा? एक सर्वे मैं तो था अक 52 प्रतिशत बलात्कार जानकार अर रिश्तेदारां द्वारा करे जावैं सैं। बीर-मरद नै नयारे-नयारे करकै किसी दुनिया बनाना चाहवां सां आपां? ये बिगाड़ के कारण टोहने पड़ैंगे अर औरत ताहिं बराबरी का दरजा देना ए पड़ैगा। एक नया समाज जड़ै बीर-मरद कान्धे तै कान्धा मिला कै समाज का विकास करैं, बनाना जरूरी सै अर वो बेहतर शिक्षा अर सह-शिक्षा बिना संभव कोन्या। नफे सिंह बोल्या -कविता, माड़ी सी डट। पूरा भाषण दे दिया तनै तो। फेर या बी ठीक नहीं वा बी ठीक नहीं, ठीक के सै न्यों तो बताओ। कविता बोली - इतनी जल्दी क्यू कररया सै।
पहलम गलत के-के सै इसनै तो आच्छी ढाल समझ ल्यां ठीक के बारे मैं जिबै तो पड़ताल करी जा सकै सै। फत्ते बोल्या - तो के करां इन स्कूलां का सुधार क्यूंकर हो? कविता बोली - सारे गाम मां तै अर हर कौम मां तै बढ़िया माणस अर औरत छांट कै एक निगरानी कमेटी बनावां ग्यारा मैम्बरां की जिसमैं पांच महिला जरूर हों। गलत-सही के आधार पै जातपात, लिंग भेद अर अमीर-गरीब के भेद तै ऊपर उठकै या कमेटी स्कूल के बारे मैं किमै सोंचै तो किमै बात बण सकै सै। न्योंए एक-दूसरे पै दोष मढ़कै हम बीमारी की सही रग कोन्या पकड़ पात्ते।
ताई भरपाई बोली - हां, वे ज्ञान-विज्ञान आले बी एक दिन कैहरे थे अक शिक्षा जगत नै भी मुनाफे की नजर तै देखण की ललक नै आज म्हारे देश मैं गैट के रास्ते प्रशस्त कर दिये सैं। इब योहे तय करैगा अक नागरिकां नै कैसी अर कितनी कीमत चुकाकै शिक्षित किया जावै।

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