गारंटी रोजगार की ?
सते फते नफे सविता कविता सरिता बबीता सुनीता और ताई भरपाई शनिवार को फेर आगे ताई की शाल मैं। नफे बोल्या - आज बस स्टैंड पै बहस होवण लागरी थी अक रोजगार गारंटी कानून 2005 के तहत सोनीपत जिला बी आवै सै अक नहीं? सते बोल्या - सोनीपत का नाम कोन्या। कविता बोली - तो कौनसे कौनसे जिले आवैं सैं म्हारे हरियाणा के इसके तहत? सारे थूम होगे। किसे नै पक्का बेरा ना। महिला साक्षरता समूह की बबीता जो बीए पास सै वा भी काल्लर कोरै बैठी थी इस बात पै। ऊं उसनै बहोत बातां का बेरा रहवै सै। खैर सारे गाम के माणसां धौरे जाके इसके बारे मैं जानकारी लेवण की योजना बनाई। इतनी वार मैं ज्ञान विज्ञान समिति की सरोज गाल मां के जावै थी उस ताहिं रुक्का दे लिया उननै। हाल चाल बूझया। सरिता बोली - सरोज जिब देखो जिबै तेरे हाथ मैं कोए ना कोए किताब जरूर पावै सै। इतनी क्यों पढ्या करै? के डीसी बणैगी इतना पढ़कै। सरिता नै सरोज के हाथ तै ले कै किताब का हैडिंग पढ़या - रोजगार गारंटी अधिनियम (प्रवेशिका) लेखक निखिल डे, ज्यां द्रोज अर रीतिका खेरा। सरोज के मुंह तै एकदम लिकडया - बगल मैं छोरी अर गाम मैं ढिंढोरी। इसे पै तो चर्चा होरी थी।
सविता बोली - सरोज बैठ आज इसपै बता थोड़ा घणा हमनै। सरोज नै बतावणा शुरू करया - रोजगार गारंटी कानून 2005 के तहत हरियाणा के दो जिले थे सिरसा अर महेन्द्रगढ़ अर इस साल तै दो जिले और आगे मेवात अर अंबाला। कुल 4 जिले होगे। सत्ते बोल्या - इस कानून का निचोड़ के सै सरोज? सरोज बोली - घणा तो बेरा ना फेर न्यूनतम मजदूरी पै काम करने नै राज्जी किसे माणस के रोजगार की कानूनन गारंटी ही इस अधिनियम की मूल धारणा सै। इसके तहत आवेदन करने आले किसे भी वयस्क नै बिना देरी के किसे सार्वजनिक काम मैं रोजगार पावण का अधिकार सै। 15 दिनां के भीतर रोजगार मिल जाना चाहिए। ताई बोली - यो तै बहोत बढ़िया कानून बनाया सरकार नै। फेर यो सोनीपत जिले खातर तो कोन्या।
सरोज बोली - हां बाकी कानूनां की ढालां यो भी कितना लागू होवैगा या देखना बाकी सै। जब हमनै इसकी पूरी बात का बेरा ए नहीं होगा तो यू लाग्गू कूण करावैगा? बबीता या बात तो सही सै। फेर सरकार नै तो अपनी तरफ तै यू कानून म्हारे 4 जिल्यां मैं दे दियां। सरोज बोली - इस कानून की भी अपनी कुछ सीमाएं सैं। नफे बोल्या - वे कुणसी? सरोज बोली - यह गारंटी ग्रामीण क्षेत्रां मैं दी गई सै शहरां मैं नहीं। दूसरी बात या सै अक या स्कीम प्रति घर प्रति वर्ष 100 दिन की खातर सीमित सै। फेर इसका यू मतलब बी कोन्या अक यू कानून थोथा सै। ना यू भरमा सै।
पहली बरियां सारे ग्रामीण मजदूरां नै अधिकार के तौर पर रोजगार पावण का मौका इसे अधिनियम के तहत दिया जावैगा। ताई बोली - सरोज न्यों बता इसका के लाभ होगा? सरोज बोली - कई लाभ सैं। सबतै पहलम यू एक प्रभावी रोजगार गारंटी अधिनियम ग्रामीण परिवारां की गरीबी अर भूख मिटावण मैं मदद करैगा। या बात सही सै अक न्यूनतम मजदूरी पै 100 दिनां के रोजगार की गारंटी कोए सुनहरा अवसर कदम नहीं सै फेर किसे तरियां गुजारा करणियां की खातर यू अर्थपूर्ण जरूर सै। दूसरी बात इस अधिनियम के फलस्वरूप गांवों से शहरों मैं पलायन कम हो ज्यागा। गाम मैं ए काम हो तै लोग शहरां की तरफ नहीं भाजैंगे। तीसरी बात या सै अक यू कानून महिलावां के सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण स्रोत होगा। इतनै कुछ आर्थिक आजादी तो मिलै ए गी। नफे सिंह बोल्या - सरोज न्यों बता इस कानून के तहत कौन कौन आवैंगे? सरोज बोली - कोए बी वयस्क स्त्री-पुरुष आवेदन कर सकै सै। बीपीएल कार्डधारी परिवारां ताहिं ए नहीं सै। यू सबकी खातर सै। पहली अप्रैल तै साल शुरू होगा आगले साल मार्च ताहिं। इस 12 महिने मैं 180 दिन का रोजगार। हरेक परिवार नै 100 दिन का कोटा मिलै सै। इस 100 दिन के कोटे मैं एक परिवार के अन्य मैंबरां तै भी काम दिया जा सकता है। परिवार के अलग अलग सदस्य अलग अलग दिनों या एक ही दिन काम पा सकैं सैं बशर्ते उननै उस वित्तीय वर्ष मैं 100 दिन तै अधिक काम ना मिल्या हो। सरिता बोली - मजदूरी का भुगतान कितने दिन मैं होगा? सरोज बोली - एक हफ्ते मैं होगा। 15 दिन के भीतर भीतर घणे तै घणा। सरकार रोजाना देवण का आर्डर बी दे सकै सै। नफे बोल्या - जो बख्त पै नहीं मिलै तो? सरोज - मजदूर मुआवजा/हर्जाना लेवण का हकदार होगा। पुरुष अर महिला की बराबर की मजदूरी होगी। इबै और बी कई बात रहैगी उनपै फेर कदे बात करांगे। सविता बोली - सरोज शनिवार नै एक घंटा काढ़ लिया कर म्हारी खातर। सरोज बोली - नेकी अर बूझ-बूझ।
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